निर्देशक सनत कुमार के लोकप्रिय नाटक “सदगति” का मंचन भारत रंग महोत्सव में किया गया

सद्गगति- janmanchnews.com
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रंगमंच की दुनिया,

क्या दलित होना अपराध है ? प्रकृति ने मनुष्य को जन्म देते समय कोई भेद-भाव नहीं किया जैसे कुलीन जाति के बच्चों को जितनी शक्ति दी उतनी ही दलित बच्चे को. जब प्रकृति ने कोई भेद-भाव नही की तो हम क्यों करते हैं यह सब ? दलितों से बेगार का काम लेना में बडी जातियों का धर्म भ्रष्ट नही होते, लेकिन वहीं अगर उनके कुंए का पानी कोई दलित पी ले तो छुआ-छुत मानेंगे.

पटना में आयोजित अंतराष्ट्रीय भारत रंग महोत्सव 2017 के प्लेटफ़ार्म शो में रंगसृष्टि, पटना के द्वारा सदगति का मंचन प्रचलित निर्देशक – सनत कुमार ने किया। नाटक ‘‘सदगति’’ दलितों पर हो रहे अत्याचार, शोषण, भेदभाव एवं छुआ-छुत का प्रकटिकरण है.

प्रेमचंद के दो कहानीयों (सद्गति एवं ठाकुर का कुंआ) पर अधारित  इस नाटक के लेखक अनिल ओझा ने यह सवाल उठाया कि क्यों हजारों वर्षों से जाति के नाम पर अमान्वीय व्यव्हार होता आया है ? नाटक के प्रदर्शन से यह स्पष्ट होता है कि कहीं न कहीं किसी न किसी रुप में यह शोषण आज भी बरकरार है. वर्ण व्यवस्था में दलितों की हालत और उनकी जीवन गति को समझाता यह नाटक दलित विमर्श पर लिखी गयी एक महत्वपुर्ण नाटक है.

आज के सामाजिक परिवेश मे देखें तो बढ़ते वर्गभेद और जातिगत भेदभाव को मिटाने के प्रयास में यह काफी सार्थक नाट्य प्रदर्शन है, इसमें एक तरफ जहां शोषितों के दर्द को दर्शाया गया वहीं दूसरी तरफ इसे ख़त्म कर सामाजिक सद्भाव स्थापित करने की प्रेरणा भी दी गयी.
प्लेटफार्म शो में भाग लेने वाले कलाकारों का नाम इस प्रकार है- धीरज कुमार, चन्दन कुमार, प्रिया कुमारी, सिम्मी कुमारी, राजदीप कुमार, रंधीर कुमार, रवि कुमार, उज्जवल कुमार, अनुराग कुमार आदि।
नाल वादक- हिरा लाल, डफली- मनीष महिवाल, खंजरी- सुनील कुमार सिंह, और आर.सी. जेटली आदि थे।

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