UP election

मतदाताओं में दिखा उत्साह, संजय सिंह ने निभाई ये राज परंपरा

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मीनाक्षी मिश्रा,

अमेठी। पूरे प्रदेश में सर्वाधिक चर्चित व कांग्रेस की बहुप्रतिष्ठित सीट अमेठी जो कि कांग्रेस के गढ़ के रूप में भी जानी जाती है , यहाँ पर पांचवे चरण में मतदान शांति पूर्वक सम्पन्न हुआ। विदित हो कि यह सीट हमेशा से कांग्रेस के गढ़ के रूप में जानी जाती है। अतः यहाँ कई दिग्ज्जों की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है। अनुमानन अमेठी में 56 प्रतिशत वोट के साथ मतदाताओं का मिला जुला उत्साह देखने को मिला।

विदित हो कि अमेठी में मुकाबला इसलिये भी दिलचश्प था। क्योंकि यहाँ पर राज परिवार से ताल्लुक रखने वाले डॉ संजय सिंह की प्रथम पत्नी गरिमा सिंह बीजेपी से जबकि उनकी दूसरी पत्नी अमिता सिंह कांग्रेस से एक दूसरे के खिलाफ मैदान में हैं। साथ ही सर्वाधिक विवादित मंत्री रहे गायत्री प्रजापति की प्रतिष्ठा इस सीट से दाँव पर लगी है। अतः इन तीनों दिग्ज्जो का राजनैतिक भविष्य व प्रतिष्ठा मत पेटियों में बंद हो गयी है।

अनोखी मान्यता:

भारत में वैसे तो अनेक अनोखी मान्यताएं देखने को मिलती हैं। आम जनता की तो क्या कहा जाये राजनेता भी टोटकों को अपनाने में पीछे नहीं रहते। यूपी में पांचवे चरण के चुनाव के दौरान एक ऐसी ही मान्यता सामने आई। अमेठी के रामनगर बूथ पर पहला वोट एक धोबी ने डाला, ऐसा वर्षों पुरानी मान्यता के तहत हुआ। दरअसल राजघराने में ऐसी पुरानी मान्यता है कि प्रथम वोट धोबी के डालने से शुभ होगा। अतः कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य और अमेठी राजघराने से ताल्लुक रखने वाले डॉ. संजय सिंह अपनी दूसरी पत्नी अमीता के साथ अमेठी के रामनगर बूथ पर वोट डालने पहुंचे।

उनसे ठीक पहले बुजुर्ग पंचम ने वोट डाला। पंचम रामनगर गांव से हैं और धोबी ब‌िरादरी से ताल्लुक रखते हैं।  ‌इस बूथ पर पंचम 58 साल से पहला वोट डालते आ रहे हैं। गौरतलब है कि इस बार संजय सिंह की दूसरी पत्नी अमीता कांग्रेस से प्रत्याशी हैं। जबकि संजय की पहली पत्नी गरिमा भाजपा से चुनावी मैदान में उतरीं हैं। बुजर्ग धोबी पंचम ने बताया क‌ि जब वह 21 साल के थे तब उन्होंने पहली बार वोट डाला था। तभी इस परम्परा की शुरुआत हुई थी अब उनकी उम्र 79 वर्ष है।


संजय सिंह ने इस बाबत बताया कि यह परम्परा उनके पिता के वक्त से चली आ रही है। गांववालों ने इसका कारण बताया क‌ि धोबी का किसी काम की शुरुआत करना शुभ माना जाता है। चुनाव कुशलता से हो जाए इस वजह से इस परंपरा की शुरूआत हुई और अब तक इस निर्वहन होता आ रहा है।