जनप्रतिनिधियों ने किये कई वादे लेकिन 5 साल से सड़क की पटरी पर पड़े हैं 75 परिवार, कोई नहीं सुननेवाला

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Janmanchnews.com
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दिनेश मिश्रा की रिपोर्ट,

श्रावस्ती। इकौना क्षेत्र में राप्ती नदी की कटान से इमलिया के लगभग 75 परिवार 5 साल से सड़क की पटरी पर छप्पर व पन्नी के नीचे गुजारा कर रहे हैं। लेकिन प्रशासन की तरफ से आज तक इन कटान पीड़ितों के पुनर्वास के लिए कोई व्यवस्था नहीं की गई। ऐसे में इन पीड़ितों के मुंह से यही निकलता है कि हम कटान पीड़ितों की परेशानी पर न कोई नेता ध्यान दे रहा है न ही कोई साहब सुब्बा।

सितम्बर-अक्टूबर 2013 में राप्ती की कटान से ग्राम इमलिया के पुत्तीलाल गुप्ता, दद्दन, परमेश्वरप्रसाद, रामदेव, बधईराम, नन्हे, फेरनलाल, कुद्दन, शिवकुमार, विनोदकुमार, प्रमोद, रामजियावन, बाबादीन, मौनीराम, बाबूराम, छोटे, केशकुमार, रामलखन, रामछबीले, दशरथलाल, रामदीन, महराजदीन, गयादीन, राधिकाप्रसाद, कृपाराम, बदलू, आत्माराम, मनोजकुमार, अलखराम व ननकू सहित 75 परिवारों के घर खेत राप्ती में समा गए थे।

कटान पीड़ित इन परिवारों ने अपने बच्चों को गर्मी, बरसात व जाड़ा से बचाने के लिए गांव के उत्तर पूरब प्रधानमन्त्री सड़क पर छप्पर डालना पड़ा था। इसी बीच गत अगस्त 2014 में आई एक और भीषण बाढ़ ने कटान पीडितों के छप्पर सहित उसमें रखा गृहस्थी का सामान बहा ले गई। दोनों बार तहसील प्रशासन की तरफ से अहेतुक सहायता के रूप में कुछ पैसे देकर घर बनाने के लिए जमीन मुहैया कराने का आश्वासन दिया गया था। लेकिन 5 साल बाद भी प्रशासन आवास के लिए जमीन मुहैया नहीं करा सका। यही नहीं सड़क की पटरी पर बसे कटान पीड़ितों को तहसील प्रशासन अपने खेतों में बसा मान रहा है।

जनप्रतिनिधियों ने भी नहीं लिया पीड़ितों का हाल…

कटान पीडित रक्षाराम व सुरेश ने बताया कि आवासीय जमीन के लिए तहसील दिवस व सांसद विधायक को प्रार्थना पत्र दिया गया। लेकिन कार्रवाई होना तो दूर कोई मौके पर झांकने तक नहीं आया। राकेश व आत्माराम ने कहा कि सड़क की पटरी पर बसे कटान पीड़ितों के सामने सबसे बड़ी समस्या शुद्ध पानी की है। इतनी बडी आवादी के बीच केवल दो हैण्डपम्प लगे है। इन लोगों ने कहा कि पिछले साल चुनाव के समय नेताओं ने आवास के लिए जमीन सहित आर्थिक सहायता दिलाने का आश्वासन दिया था। लेकिन चुनाव के बाद कोई छोटा बड़ा नेता नहीं आया।

रामराजी ने कहा कि छप्पर के नीचे रह रहे बच्चे जाड़ा गर्मी में बीमारी का शिकार हो रहे हैं। बउरा ने कहा हम गरीबों की परेशानी पर न तो कोई नेता ध्यान दे रहा है। न ही कोई साहब सुब्बा। आवास की जमीन देना तो दूर कोई परेशानी में हाल लेने तक नहीं आया।

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