पूर्वांचल की मिट्टी में रचा बसा एक ऐसा किरदार जो सुनता है सबकी पुकार

File Photo: सलाहकार सदस्य उपभोक्ता मामले व खाद्य वितरण मंत्रालय भारत सरकार रविकांत तिवारी
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सात समंदर पार से आये एक शख्स की कहानी…

Priyesh Kumar "Prince"
प्रियेश कुमार “प्रिंस” की कलम से…

विचार। दुनिया के सबसे शक्तिशाली और विकसित देश अमेरिका से चलकर उत्तर प्रदेश के पिछड़े इलाके पूर्वांचल की गलियों में घूम घूम कर अनाथ, बेसहारा गरीब जरूरतमंद लोगों तक पहुंचकर उनके बच्चों की पढ़ाई, दवाई शुद्ध पीने के पानी के साथ-साथ निवाले का भी इन्तेजाम बड़े ही शिद्दत और जिम्मेदारी के साथ करना बड़ी बात है।

समाज में रहने वाले ऐसे कई ऐसे परिवार और जिंदगियां है जो दाने-दाने के लिए मोहताज है। ऐसे बेसहारा बेबस लाचार गरीबों के लिए ये शख़्स किसी भगवान और मशीहा से कम नहीं है। मानवता की रक्षा करने और गरीबों की दिन हीन दशा को सुधारने के लिए रविकान्त तिवारी का समाज के अंतिम आदमी तक निवाला और मासूम बचपन को शिक्षित करने के लिए हर सम्भव प्रयास जारी है।

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File Photo: सलाहकार सदस्य उपभोक्ता मामले व खाद्य वितरण मंत्रालय भारत सरकार रविकांत तिवारी

रविकान्त गोरखपुर जनपद के चौरी चौरा क्षेत्र के मूल निवासी है। इनका बचपन गांव की गलियों में बिता है। खेती किसानी पशुपालन और बागवानी के साथ साथ रविकान्त जनसरोकार के कार्यों में रुचि रखते है। आज इनके पास भारत और अमेरिका में अपनी खुद की आईटी कंपनियां है।

लेकिन भारतीय परिवेश और समाज से नाता पुराना होने के कारण समाज के ऐसे अनाथ बेबस बेसहारा गरीब जिंदगियों ने हमेशा इनसे सवाल किया। फिर क्या था, रविकान्त ने राजनीति और व्यवसाय के साथ-साथ जनसरोकार के मुद्दे को भी गंभीरता के साथ लिया।

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जिसके चलते अपने गोरखपुर जनपद के चौरी चौरा में प्रवास के दौरान ही यह फैसला लिया कि हमारे पूर्वांचल के किसी भी जिले में अब कोई भी लाचार बेबस बेसहारा अनाथ दृष्टिहीन दिव्यांग गरीब पढ़ाई, दवाई, रोटी और शुद्ध पीने के लिए पानी की लाचारी और विवशता के आगे घुटने नही टेकेगा। इसके लिए रविकान्त ने एक प्लान तैयार किया और सृष्टि धर्मार्थ सेवा संस्थान के साथ मसौदा बनाकर इस काम की शुरुआत कर दी।

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रविकान्त तिवारी भारत सरकार में सदस्य, सलाहकार समिति उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय से जुड़े हुए है। अब तक शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए डुमरी खुर्द और तिलौली प्राथमिक विद्यालय चौरी चौरा गोरखपुर को गोद लेकर विद्यालय में छात्र छात्राओं के लिए समुचित संसाधनों की व्यवस्था की जा चुकी है। बच्चे आधुनिक और तकनीकी ज्ञान पा सके इसके लिए एक टैबलेट कम्प्यूटर बैठने के लिए कुर्सी मेज और शौचालय तक का भी निर्माण कराया जा चुका है।

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File Photo: सलाहकार सदस्य उपभोक्ता मामले व खाद्य वितरण मंत्रालय भारत सरकार रविकांत तिवारी

घोषणाओं के हिसाब से प्राथमिक विद्यालय तिलौली को स्थानीय विधायिका चौरी चौरा ने गोद लिया था। लेकिन विद्यालय की दुर्दशा रविकान्त से देखी नही गई और इसे भी गोद लेकर आधुनिक बनाया गया। फिलहाल बचपन मे जिस विद्यालय में पढ़े थे। अब उस विद्यालय को भी गोद लेकर आधुनिक शिक्षा का केंद्र बनाने की भी पहल शुरू हो गयी है। जल्दी ही गोद लिए सभी विद्यालयों में आर ओ वाटर प्लांट लगाने की तैयारी चल रही है ताकि शिक्षा के साथ साथ स्वास्थ्य का भी ख्याल रखा जा सके।

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File Photo: सलाहकार सदस्य उपभोक्ता मामले व खाद्य वितरण मंत्रालय भारत सरकार रविकांत तिवारी

इस काम से जहां समाज और क्षेत्र में रविकान्त की सराहना हो रही है। वहीं गरीब इन्हें अपना भगवान और मसीहा मानने लगा है। रविकान्त ने यह तय किया है कि 6 महीनों तक हम गरीब असहाय और जरूरतमंद परिवारों को भोजन भी देंगे। जिसकी शुरुआत एक संस्था के साथ मिलकर हो चुकी है। पर इस कार्यक्रम को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में चलाएंगे औंर फिर आगे इसे और आधुनिक बनाते हुए कैंटीन के रूप में स्थापित करेंगे।

रविकान्त ने एक आपबीती कहानी के द्वारा बताते है कि ”मैं गोरखपुर जिले के चौरी चौरा का रहने वाला हूं।  

”मैंने गोरखपुर यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की है, उसके बाद बिजनेस की प्लानिंग कर अमेरिका चला गया ।एक बार अमेरिका से वापस दिल्ली उतरा तो वहां से लखनऊ मेल में सेकेंड एसी का टिकट बुक कराया। मुझे किसी काम से लखनऊ जाना था। जब लखनऊ स्टेशन पर गाड़ी पहुंची, तो राजधानी होने के नाते मैं स्टेशन पर उतरकर घूमने लगा।तभी एक लड़की आई और बोली- बाबूजी 10 रुपए दे दो। दुबली-पतली सी थी। मुझे लगा वो मांगने वाली है। मैंने इग्नोर कर दिया। क्योंकि अक्सर सुन रखा था कि ऐसे लोग सिर्फ बातों में उलझाते हैं और जान-बूझकर भीख मांगने वाले होते हैं।”

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”मैंने मजाकिये लहजे में पूछा, क्या करोगी पैसों का? वो बोली भूख लगी है, बाबूजी खाना चाहिए। फिर मैंने बोला- तो चलो खाना खिला दूं, लेकिन पैसे नहीं दूंगा।” मैं स्टेशन से बाहर आकर उसे खाना खिलाया। वो बहुत भूखी थी। उसने बताया, उसने 2 दिन बाद खाना मिला है। मेरा मन भर आया था, क्योंकि मैंने उसका मजाक उड़ाया था। लेकिन वो मुझे आशीर्वाद देकर आगे चली गई।”

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File Photo: गरीबों को भोजन कराते रविकांत

पर मेरे दिमाग मे बार-बार उस लड़की के शब्द और मेरे द्वारा किया गया मजाक सामने आ रहा था। मेरे मन में एक बात आई क‍ि मैं एसी गाड़ी में कम्बल और बेड पर आराम से खा पी रहा हूं। न जानें उस लड़की के जैसे और कितने लोग होंगे, जो भूखे ही रहते होंगे। उसी वक्त मैंने ऐसे लोगों के लिए कुछ करने का मन बना लिया। 

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आज रविकान्त पूरी तरह इस काम मे ईमानदारी के साथ लगे हुए है। ये जब भी गोरखपुर के चौरी-चौरा में होते है तो गरीबो के लिए तमाम आयोजन लगातार चलते रहते है। इनके न रहने पर इन कार्यो की जम्मेदारी सृष्टि धर्मार्थ सेवा संस्थान की रहती है।

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