Kumar Vishwas

कुमार विश्वास को राज्यसभा का ख्याल छोड़कर अपनें से अधिक सक्षम व्यक्ति को सामने लाना चाहिए

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केजरीवाल के सिपहसलार कुमार विश्वास का राज्यसभा के लिए विरोध-विद्रोह पर AAP के वाराणसी जिला अध्यक्ष खलील अहमद से जनमंच नें की खास बातचीत…

Shabab Khan

शबाब ख़ान (वरिष्ठ पत्रकार)

जनमंच खास बातचीत: नि:सन्देह कुमार विश्वास एक कवि-हृदय, सरस, नेक, एवं उत्साही व्यक्ति हैं और अन्ना-आन्दोलन से लेकर आजतक अरविन्द जी के साथ मित्रवत् कार्य करते रहे हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वे ही राज्यसभा में जाने के लिए सबसे उपयुक्त हैं। उनको इतना अधीर नहीं हो जाना चाहिये।

उन्हें अपना आपा नहीं खोना चाहिये। राजनीतिक पार्टी बदलने और नई पार्टी चलाने का मार्ग बड़ा ही बीहड़, जटिल, क्लिष्ट, टेढ़ा-मेढ़ा, ऊबड़-खाबड़, जोखिम भरा, खतरनाक, श्रमसाध्य, पर्वततुल्य, कंटकाकीर्ण, कठोर एवं आग पर चलने जैसा दाहक है। यह कविता जैसा कोमल, सीधा-सपाट, भावुकतायुक्त, सरस, कल्पनालोकी एवं अव्यवाहारिक नहीं।

अरविन्द जी ही अनुभव करते होंगे कि कैसा मृत्यु तुल्य कष्ट उन्हें झेलना पड़ रहा है। चारों तरफ से बाणों की वर्षा हो रही है उनके ऊपर। ऐसे समय में विश्वास जी को उनकी मदद करनी चाहिये या विरोध-विद्रोह? वे राजनीति बदलने आये थे कि राज्यसभा का टिकट लेने? अभी तो लक्ष बहुत दूर है कम से कम राजस्थान की जिम्मेदारी ही गम्भीरता से निभा लेते। वहां से भी भाग लिए।

कुमार विश्वास को गहराई से आत्म निरीक्षण करना करना चाहिये। अरविन्द जी ने उनके साथ बहुत मित्रता निभाई है। उनका बहुत बचाव किया है। हर बात कहने की ही नहीं होती। अब वे ऐसी बचकानी एवं मूर्खतापूर्ण हरकत न कर दें कि पानी नाक के ऊपर चढ़ जाय।

अच्छा होता कि वे कविता के क्षेत्र में जय शंकर प्रसाद, दिनकर, पंत, निराला आदि महाकवियों की ऊंचाइयों को छूते। राजनीति कविता की चीज़ नहीं है। उन्हें दोनों हाथ में लड्डू नहीं मिल सकेंगे। केजरीवाल वर्तमान समय के कृष्ण हैं। जो उनका साथ छोड़ेगा या विरोध-विद्रोह करेगा वह कहीं का नहीं रह जायेगा।

वे अपने विरोधियों के साथ-साथ, जरुरत पड़ने पर अपने अहंकारी संबंधियों का भी दिमाग ठीक करेंगे। लड़ाई बहुत लम्बी है। राम और कृष्ण से भी कई गुनी मेहनत और समय लगेगा इस महान संग्राम में। बहुत ही धैर्य की जरूरत है। स्वार्थी, पदलोलुप, भुक्खड़, पाखंडी, दिखावटी, धोखेबाज, दगाबाज, छलकपटी एवं अहंकारी लोग ज्यादा दिन तक अरविन्द के साथ नहीं टिक सकते।

मेरी सबसे हार्दिक प्रार्थना है कि थोथे आदर्शवाद और झूठी अव्यवहारिक नैतिकता की दुहाई देना छोड़ कर यथार्थ रूप में निष्काम कर्म योगी अरविन्द केजरीवाल का तहेदिल से साथ दें।

बौखलाये साथी जरा ठंडे दिल से विचार करें, फिर केजरीवाल जी को दिनरात मोदी और एलजी के आतंक को झेलना कल्पनातीत कष्ट, पुरुषार्थ एवं पराक्रम का कार्य है।

यह किसी साधारण आदमी के वश का कार्य नहीं है, विश्वास जी को तो केवल हवा महल बनाना है और कल्पना लोक में जाना है। उनको उपरोक्त व्यवस्थाओं से कोई मतलब नहीं है। जगह-जगह लच्छेदार भाषण-गायन करना और तालियां बजवाना ही उनका देश-प्रेम है। वे क्या जानें कि पार्टी और सरकार कैसे चलाई जाती है।

केजरीवाल के सामने पूरे देश का नक्शा है। उनकी दृष्टि बहुत लम्बी और गहरी है। इसलिये कार्यकर्ताओ को अपनी सीमा में रहना चाहिये। केवल अपने तक ही हिन्दुस्तान न समझें। भारत में और भी योग्य एवं उत्कृष्ट लोग हैं। अरविन्द को उनके भी सहयोग-सहायता की जरूरत है। हिन्दुस्तान बहुत बड़ा है, इस में एक से बढकर एक प्रतिभासम्पन्न, सुयोग्य एवं महान लोग हैं। केवल वर्तमान “आप- कार्यकर्ताओ” से ही अरविन्द को महान लक्ष हासिल नहीं होगा।

सभी ईमानदार कार्यकर्ताओ का हृदय से सम्मान है किन्तु देश-हित में उन्हें भी अपने से योग्य, उपयुक्त, उपयोगी, उत्कृष्ट एवं प्रतिभा-सम्पन्न व्यक्तियों को आगे लाने में अपना प्रशंसनीय सहयोग करना चाहिये।