Pratibha Puniya

छह बार रिजेक्ट होने पर भी हार नहीं मानी गांव की इस बेटी नें, सातवीं बार में रचा इतिहास

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गांव की एक बेटी की कहानी जिसनें छह बार असफल होने के बाद भी छू लिया आसमान…

–युवराज सिंह

चुरु (राज): कहते हैं ना हर सफलता के पीछे कड़ी मेहनत, लम्बा संघर्ष, परिवार का साथ और कभी नहीं टूटने वाला हौसला होता है। फिर चाहे सफलता की राह में कितनी भी बाधाएं आए। कितनी बार भी असफलता मिले, मगर कामयाबी हासिल करने से कोई नहीं रोक सकता। संघर्ष जितना ज्यादा होगा कामयाबी भी उतनी ही बड़ी होगी। इस बात का उदाहरण है राजस्थान के चूरू जिले के सादुलपुर तहसील के गांव नरवासी की बेटी प्रतिभा पूनिया।

जानिए प्रतिभा पूनिया की कामयाबी की कहानी

प्रतिभा पूनिया भारतीय वायुसेना में महिला फाइटर पायलट है। दिसम्बर 2017 में ही प्रतिभा पूनिया को बतौर फाइटर पायलट कमिशन मिला है। प्रतिभा पूनिया भारतीय वायुसेना में महिला फाइटर बनने वाली राजस्थान की दूसरी बेटी है।

इससे पहले जुलाई 2016 में झुंझुनूं जिले के गांव पापड़ा की मोहना सिंह फाइटर पायलट बनी थी। भारतीय वायुसेना में लड़ाकू विमान उड़ानें वाली प्रतिभा पूनिया महिला फाइटर पायलट बनने वाली राजस्थान की दूसरी बेटी हैं।

अब प्रतिभा पूनिया वायुसेना में सुखोई व मिग, मिराज जैसे लड़ाकू विमान उड़ाएगी। इसी साल जनवरी में प्रतिभा पूनिया का वायुसेना में फ्लाइंग ऑफिसर के पद पर चयन हुआ था। इसके बाद वायुेसना के प्रशिक्षण केन्द्रों पर कड़ा प्रशिक्षण लेकर फाइटर पायलट बनी है।

प्रतिभा पूनिया नरवासी निवासी पूर्व सैनिक छोटूराम व उर्मिला की बेटी है। फाइटर प्लेन से दुश्मनों पर बम बरसाएगी गांव की ये लडक़ी, बेहद रोचक है इसकी कामयाबी की स्टोरी। प्रतिभा के पिता छोटूराम व मॉ  उर्मिला ने बेटा-बेटी में कभी फर्क नहीं समझा। जब प्रतिभा पैदा हुई थी तब घर में थाली बजाकर खुशियां मनाई गई थी। यही नहीं बल्कि प्रतिभा के जन्म पर बेटे की तरह ही उसका दशोठन भी किया गया था। आज उसी बेटी ने पूरे राजस्थान के बेटों से भी बड़ी सफलता हासिल की है।

असफलता ने बनाया ताकतवर

फाइटर पायलट बनने के बाद प्रतिभा पूनिया पिछले रविवार को अपने गांव नरवासी आई थी। प्रतिभा के परिजनों ने बताया कि फाइटर पायलट बनने के लिए उसने सात बार परीक्षा दी। छह बार उसे रिजेक्ट कर दिया गया था। रिजेक्ट से वो मायूस नहीं हुई बल्कि अपनी कमियां सुधारती गई और राजस्थान की दूसरी फाइटर पायलट बेटी बनकर इतिहास रच दिया।