Murder

पत्रकार के बेटे की निर्मम हत्या, स्कूल प्रबंधन की कार्यशैली संदिग्ध

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Meenakshi Mishra

मीनाक्षी मिश्रा

अमेठी। वैसे तो पत्रकार जो की चौथे स्तंभ का दर्जा भी रखता है आये दिन समाज हित में कभी प्रशासन का तो कभी बुराइयों का दंश झेलता रहता है।

वहीं सच का आइना दिखाने के एवज में इन्ही लोगों द्वारा प्रताड़ित भी किया जाता रहा है। किंतु सब कुछ गंवा कर भी निर्भय होकर पत्रकार सच के सापेक्ष में मशगूल होकर अविरल चलता रहता है। किंतु लगातार प्रत्यक्ष खड़े रहने वाले सर्वाधिक खतरा झेलने वाले पत्रकार को शासन प्रशासन से किसी भी प्रकार की सुरक्षा नही दी जाती।

जनपद अमेठी में पत्रकारों को आये दिन निशाना बनाया जाना आम बात हो गयी है। किन्तु एक पत्रकार के कलेजे के टुकड़े की हत्या से संपूर्ण जनपद थर्रा गया। वहीं मामला मीडिया का होने के बावजूद प्रशासन की हीला हवाली जारी रही। अपने किसोर बेटे को खोने के असहनीय गम के चलते दर्द से पिता कराहता रहा।

ज्यादातर माँ बाप अपने बच्चे को अच्छी शिक्षा के लिये हॉस्टल भेज कर चिंता मुक्त हो जाते हैं। किंतु आये दिन विद्यालयों में हो रहे हादसे सोंचने पर मजबूर कर देते हैं कि क्या हमारे मासूमों की जिंदगी को इस प्रकार से दांव पर लगाया जा सकता है।

जवाहर नवोदय विद्यालय जोकि माध्यमिक शिक्षा के लिये बेहतरीन संसथान माना जाता है। वहाँ पर रात्रि में एक बच्चे का बिना किसी एंट्री के गायब हो जाना और विद्यालय प्रबंधन को इसकी भनक तक ना लगना बेहद सनसनी खेज है। दरअसल इसी विद्यालय के कक्षा 11 के छात्र अभय सिंह उम्र 17 वर्ष की बेहद वहशी तरीके से गला दबाकर निर्मम हत्या कर दी गयी। वहीं हत्या के पश्चात हत्यारो द्वारा शव को रेलवे ट्रैक के किनारे फेंक दिया गया।

अभय सिंह पुत्र अजय सिंह निवासी जनपद सुलतानपुर जनपद अमेठी में जिला मुख्यालय से लग रहे नवोदय विद्यालय में कक्षा 11 का छात्र था। बीते शनिवार की रात 11 बजे के लगभग विद्यालय में उसकी मौजूदगी बतायी जा रही है। जबकि अगले दिन रविवार की सुबह में उसका शव विद्यालय से कुछ दूरी पर रेलवे ट्रैक के किनारे पड़ा मिला। वही छात्र के शव के सम्मुख ही उसका मोबाइल फोन प्राप्त हुआ।

सहपाठियों के अनुसार मृतक अभय सिंह रात्रि तकरीबन 11 बजे तक विद्यालय में रहा, सुबह जब अभय सिंह नहीं दिखाई दिया तो साथीयो ने पता करने की कोशिश के बाद इसकी सूचना विद्यालय के स्टाफ को दी। विद्यालय स्टाफ ने अभय सिंह का पता लगाने का प्रयास किया। लेकिन जब उसको पता चला कि अभय सिंह का शव रेलवे ट्रैक के किनारे पड़ा है तो विद्यालय प्रशासन ने गौरीगंज कोतवाली में अभय सिंह के गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराने का प्रयास किया। थाना प्रभारी दीपेंद्र सिंह ने शव मिलने की सूचना के बाद गुमशुदगी रिपोर्ट दर्ज करने से इंकार कर दिया।

जवाहर नवोदय विद्यालय जो की चुनिंदा संस्थानों में नाम दर्ज कराता है मामले में संदिग्ध नजर आ रहा है। रात 11 बजे छात्र का गायब हो जाना और विद्यालय प्रबंधन को इसकी खबर तक ना होना लापरवाही की पराकाष्ठा दर्शाता है। वही संवेदनहीनता व लापरवाही की पराकाष्ठा का आलम यह रहा कि विद्यालय प्राचार्य व स्टाफ द्वारा घटनास्थल तक पहुँचने की जहमत नही उठाई गई।

प्रधानाचार्य द्वारा पुलिस को बयान दिया गया कि नवम्बर माह से विद्यालय में गेट पर अंकित होने वाले रजिस्टर का पता नही स्कूल प्रबंधन की भूमिका को संदिग्ध बनाता है। वही पोस्टमार्टम होने तक विद्यालय से किसी भी स्टाफ का घटना स्थल तक ना पहुंचना, छात्र का शव मिलने के पश्चात गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराने का प्रयास करना। छात्र की हत्या से सम्बंधित सूचना परिजनों को ना देना विद्यालय प्रबंधन को कटघरे में खड़ा करता है।

मिली जानकारी के अनुसार छात्र के शव के पास ही उसका मोबाइल पड़ा हुआ था। जिससे ग्रामीणों ने उसके पिता अजय सिंह को सूचना दी। अजय सिंह द्वारा अपने निवास स्थान सुल्तानपुर जिले के हरौरा बाजार मे रहने के कारण साथीयो को सूचित किया गया। विदित होकि अजय सिंह हिंदुस्तान दैनिक समाचार पत्र से जुड़कर अमेठी में कई वर्षों से पत्रकारिता जगत मे अपनी सेवाएं दे रहे है।

उन्होंने अपने साथियों द्वारा मामले की पुष्टि की। थाना जीआरपी प्रतापगढ़ को सूचित कर मामले को अवगत कराया। जीआरपी थाने के एएसआई आनंद भूषण बेलदार द्वारा मौके पर पहुंचकर पंचनामा कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया।

परिजनों की तहरीर पर अमेठी पुलिस गौरीगंज कोतवाली प्रभारी देवेंद्र सिंह जीआरपी का मामला बताकर मामले से अपना पल्ला झाड़ते हुए नजर आए। मीडिया के दबाव के बाद कोतवाली गौरीगंज में मामले में एफआईआर देर शाम 6 बजे पंजीकृत किया। जिले मुख्यालय से 2 किमी की दूरी पर स्थित जवाहर नवोदय विद्यालय से जुड़े हुए मामले को भी निर्मम पुलिस मुकदमा दर्ज करने से आनाकानी करती रही। मीडिया कर्मियों और पत्रकार संगठनो को थाना प्रभारी से लेकर के पुलिस अधीक्षक तक दबाव बनाने के बाद मामले को पंजीकृत किया गया।

घटना की जानकारी होते ही जिले के जिलाधिकारी, अपर पुलिस अधीक्षक, राजनीतिक पार्टी के जनप्रतिनिधि व भारी संख्या में मीडिया कर्मी दिनभर उपस्थित रहे। खबर लिखे जाने तक हत्या के कारणों का पता नहीं लग सका है।

जीआरपी एस पी सौमित्र यादव घटना स्थल का मुआयना करने पहुँचे। वहीं अमेठी एस पी द्वारा मौके तक पहुँचने की जहमत न उठाना संवेदन हीनता को दर्शाता है।