अमित शाह-पश्चिम बंगाल

पश्चिम बंगाल में अमित शाह की रैली के मायने…

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पटना। पश्चिम बंगाल की मालदा रैली को संबोधित करते हुए अमित शाह ने ममता बनर्जी और विपक्ष पर जमकर निशाना साधा। इसी ‘निशाने’ को अखबारों ने प्रमुखता से छापी। न्यूज चैनल वाले भी कहां पीछे रहने वाले थे उन्होंने ब्रेकिंग पर ब्रेकिंग चलाई कि अमित शाह ने ये कहा, अमित वो कहा वगैरह-वगैरह। शाह जी भी दीदी को घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ी। उन्होंने कई आरोप लगाए और कई चुनौतियां भी दी। शाह जी ने रथयात्रा से लेकर घुसपैठिए, शरणार्थी, दुर्गा पूजा विसर्जन और सरस्वती पूजा जैसे तमाम मुद्दों पर राज्य सरकार को घेरा।

अमित शाह ने कहा, जिस गठबंधन की रैली में भारत माता की जय का जयकारा ना लगता हो, वह देश का क्या भला करेंगे? अब बताइए इसमें इतना भावुक होने की क्या जरूरत है। क्या भारत माता की जय बोलने से देश की जो समस्याएं वह हल हो जाएंगी? जरा सोचिए। शाह जी को बेरोजगारी, अशिक्षा, युवा, महंगाई, सुप्रीम कोर्ट, सीबीआई, राफेल का भी मुद्दा उठाना चाहिए था जो उन्होंने नहीं उठाया सिर्फ खरी-खोटी सुनाने में लगे रहे।

अपने सभा में उन्होंने जो प्रमुख बातें कही है वह है-ममता दीदी को घुसपैठिए से बहुत प्यार है, रथ यात्रा नहीं तो रैली, रैली नहीं तो पैदल जाएंगे घर-घर, ममता द्वारा आयोजित रैली पर उन्होंने कहा, प्रधानमंत्री बनने की लाइन लगी है, जहां संगीत सुनाई देती है वहां अब बम धमाकों गूंज सुनाई देती है। इस दौरान मूर्ति विसर्जन को लेकर उन्होंने एक बड़ी बात कही कि दुर्गा पूजा विसर्जन और सरस्वती विसर्जन की इजाजत बंगाल में नहीं मिल रही है तो क्या पाकिस्तान जाकर करेंगे। 

पूरे भाषण में अमित शाह ने कहीं भी बेरोजगारी का जिक्र नहीं किया, युवा का जिक्र नहीं किया, शिक्षा का जिक्र नहीं किया, भ्रष्टाचार का ग्राफ विगत चार साल में क्या रहा है इसका भी जिक्र नहीं किया। सिर्फ उन्होंने यह कहा कि हम भ्रष्टाचार को हटाना चाहते हैं और विपक्ष मोदी को। यहां एक बात गौर करने वाली है कि लगभग पांच वर्ष हो गए बीजेपी को सत्ता में आए हुए क्या अभी तक बीजेपी ने भ्रष्टाचार को खत्म नहीं किया है। अगर खत्म नहीं हुआ है तो कब होगा? पूरे भाषण को सुनने के बाद ऐसा लगता है कि शाह जी को अभी भी लगता है कि जात-पात, धर्म, कुल, आतंकवाद और पाकिस्तान का भय दिखाकर चुनाव जीता जा सकता है।

उन्होंने मूर्ति को लेकर जो बात कही वह कुछ ज्यादा ही अटपटा लगता है। अब सवाल यह उठता है कि क्या ममता बनर्जी सही में दुर्गा विसर्जन और सरस्वती विसर्जन नहीं कराने देती है क्या यह सम्भव है? वह भी पश्चिम बंगाल में जहां दुर्गा पूजा और सरस्वती पूजा में सभी धर्म को लोग शामिल होते हैं। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष होने के नाते शाह जी की उत्तरदायित्व बनती है कि वह जनता में भ्रम न फैलाएं, जातिगत राजनीति न करें। राजनीति करें लेकिन तथ्यों पर आधारित, अगर ममता बनर्जी सही में लोकतंत्र को क्षति पहुंचा रही है तो सरकार आपकी है आप उनके खिलाफ सशक्त कदम उठा सकते हैं।