महिलाओं की पुकार, मोदी तूने ये क्या किया……..अब तो बस करो मोदी!

BHU Girl Protest
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हे मोदी अंकल आप मेरी इज्जत और आबरू को भी बचा नही सके सकते, तो क्यों कर रहें है देश की और हमारी सुरक्षा की चौकीदारी? क्या हम लोग महिला और गरीब परिवार में जन्म लिया हूं यह मेरा अपराध है? ये दरिन्दें कब तक मानवता को तार-तार करतें रहेगें?….

Betab Ahmad
बेताब अहमद

विचार। हमारे देश को आजाद हुए 70 वर्ष हो गये हैं लेकिन महिला तबके के लोगों पर जुल्म और सितम जारी है। महिला समाज ने नरेन्द्र मोदी को प्रधानमंत्री बनाया। किन्तु आज यह महिला समाज अपने को लुटा हुआ महसूस कर रही है। मोदी के लिये उसके लब पर गाने के बोल फूट रहें हैं- “अच्छा सिला दिया तुने प्यार का, प्यार में ही लूट लिया घर यार का”।

एक अहम सवाल यह है की इस देश की जनता का विश्वास कैसे लौटाएगें? सुशासन और न्याय के साथ समावेशी विकाश की पहली शर्त अपराध मुकत समाज का क्या हाल है? यह तो अब किसी से छुपा नही है, सिर्फ कांग्रेस के भ्रष्टाचार सरकार को बार-बार कोसते रहने से इस देश की कुशासन क्या छिप जाएगा? मोदी की सरकार के कान पर जूं तक नहीं रेगीं है?

कोई भी ज़िम्मेदार सरकार का नुमाइंदा घटना स्थल पर या घायलों के परिजनों से दुःख भी जानने नही पहुंचा? BHU की छात्राएं के उपर जुल्म को देख कर दिल दहल जाता है, यकीन ही नही आता है कि हम आजाद भारत के महिला समाज की बात कर रहें है। ऐसी निर्गम क्रूर वारदातें कि जिनके सामने तालिबान और अन्य आंतकवादी समूहों द्वारा की जाने वाली घटनायें भी छोटी पङने लगती है।

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क्या किसी लोकतांत्रिक राष्ट्र में ऐसी घटनायें संभव है? वैसे तो असंभव है, लेकिन यह संभव हो रही है, यहां के राजनीतिक और प्रशासनिक ढाचें की नाकामी की वजह से। ऐसा लगता है कि हिंदुस्तान में कानून का राज नही, बल्कि जुल्मों और हत्यारों के कबीले का कबीलाई कानून चलता है? जिसमें भीड़ का हुकुम ही न्याय है और आवारा भीड़ के लिए कृत्य ही विधान है।

बदलते भारत के विकास की राह में स्पीड ब्रेकर क्यों आ जातें है? चुक कहां हो रही है? ये दरिंदें का वहशीपन कहां से जन्म ले रहा है? दरिन्दों के दिमाग में ये गंदगी कहां से पनप रही है? भारत की धरती बहुत गौरवशाली है। दुनिया की पहली क्रान्ति ईसा से 325 साल पहले हुई थी।

अत्तायी धनानंद से चाणक्य ने मुक्ति दिलाई थी। इस देश की धरती से अहिंसा का संदेश बापू ने पूरे विश्व को दिया। भारत में ही बुद्ध को ज्ञान मिला, महावीर ने जन्म लिया और सिक्ख गुरु नानक गोविंद सिंह ने शंखनाद किया। भारत की इस धरती पे ऐसे दरिंदें? नवरात्रि के व्रत विफल हो गए, संकल्प ताश के पत्तों की तरह धराशायी हो गए।

ये छात्रायें हमलोंगों से कई सवाल पूछ रही है कि क्यों हम कन्या को देवी के रूप में पूजते हो? क्यों ढोंग पखंड करते हो? क्यों मेरे नाम पर भूखे रहते हो? किसी महिला को तो ब्लात्कारियों से बचा नही सकते? सजा दिला नही सकते? पर ये कैसी उपासना है? मैंने क्या किया था, किसी को क्या बिगाड़ा था? तो फिर काहे का जप और काहे का तप?

BHU की छात्राएं पूछती है कि हे मोदी अंकल आप मेरी इज्जत और आबरू को भी बचा नही सके सकते, तो क्यों कर रहें है देश की और हमारी सुरक्षा की चौकीदारी? क्या हम लोग महिला और गरीब परिवार में जन्म लिया हूं यह मेरा अपराध है? ये दरिन्दें कब तक मानवता को तार-तार करतें रहेगें?

ये सिस्टम कब तक सड़ा-गला रहेगा? ये कब सुधरेगें, ये कब जनता के सेवक बनेगें? इस कांड की भयावहता और वहशीपन देख कर पूछने का मन करता है कि क्या एक खैरलांजी नही है? अगर हां तो हमारी मरी हुयी चेतना कब पुनर्जीवित होगी या हम मुर्दा कौम की भांति रहेगें अथवा जिंदा लाशें बन कर धरती का बोझ बने रहेगें। किसी शायर ने ठीक ही कहा है कि–

कई घर हो गए हैं बर्बाद ख़ुद्दारी बचाने में, 
जमीनें बिक गई है सारी जमीदारी बचाने में !

कली का खून कर देते हैं कब्रों की सजावट में,
मकानों को गिरा देतें हैं फुलवारी बनाने में !!

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