अवैध ढाबा संचालक, चालक और परिचालक की साठ गांठ से चल रहा बड़ा गोरख धंधा 

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श्रावस्ती, बहराइच, गोंडा और बलरामपुर से लखनऊ जाने वाले रोडवेज बस सफर का कटु सत्य…

Mithiliesh Pathak
मिथिलेश पाठक

श्रावस्ती। उत्तर प्रदेश परिवहन निगम की बहराइच, बलरामपुर, श्रावस्ती और बलरामपुर से लखनऊ जाने वाली और आने वाली बसों को लेकर एक कड़वा सच जिससे आप अंजान नहीं होंगे।

जरवल थाना क्षेत्र में संचालित ढाबा वालों से बस ड्राईवरों और कंडेक्टरों की रहती है सेटिंग। जिसके चलते सफर कर रहे यात्रियों को ढ़ाबा वालों की मनमानी का होना पड़ता है शिकार।

इन दबंगों की सेटिंग की वजह से यात्रियों को मजबूरी में बासी व मंहगा खाने के साथ महंगा व बेकार नाश्ता करना पड़ता है। आये दिन यात्रियों से दादागिरी व महिला यात्रियों से बदसलूकी सहित जहर खुरानी जैसे अपराधों की कड़ियां भी यहीं से जुड़ती हैं।

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सबसे अहम बात है कि चालक परिचालक केवल उसी ढ़ाबे पर बस रोंकते हैं, जिस पर उनको फ्री में बना हुआ पकवान मिलता है। और उनके इस फ्री खाने के चक्कर में यात्रियों को इसका खामयाजा भुगतना पड़ता है। ढ़ाबा वाले मनमाने तरीके से खाने व अन्य सामानों का पैसा वसूलते हैं। भूख से तड़प रहे लोग खाना खाते हैं और ज्यादा पैसे देते हैं।

बहराइच सहित गोंडा, श्रावस्ती या बलरामपुर से लखनऊ सफर के लिए निकलने वाले यात्रियों की बस जैसे ही रामनगर के आसपास पहुंचती है, वैसे ही चालक व परिचालक को भूख सताने लगती है। जबकि बीच रास्ते में करनैलगंज, जरवलरोड, बाराबंकी सहित पालीटेक्निक जैसी जगहों पर बस चालकों व परिचालकों का सख्त निर्देश रहता है कि कोई भी बस से न उतरे।

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File Photo: Highway

यहां तक कि पानी भरने तक की इजाजत नहीं होती। यात्री बेचारे करें भी तो क्या बस ड्राईवर का सख्त निर्देश जो मिला होता है। साथ ही बस रुकती भी नही। अगर स्पीड धीमी भी होती है तो सिर्फ सवारी बैठाने या उतारने के लिए। इन चारों जिलों से लखनऊ तक का सफर लगभग चार घण्टे का होता है जिसके चलते जोरों की भूख से सबके पेट में चूहें कूदने लगते है।

फिर यह बसें जरवलरोड व रामनगर थाना क्षेत्रों में संचालित चालक व परिचालक के मन पसंद ढाबों पर रोंकी जाती है। जहां इन ढाबों की दास्तां हैरतअंगेज है। यहां बस रूकते ही पहले चालक व परिचालक बस में एनांउन्स करेगें की अब बस यहां कुछ देर के लिए रूकेगी। सभी यात्री आराम से खाना और नाश्ता कर लें। इसके बाद ढाबा संचालकों के गुरगे बस में आयेंगें।

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जो यात्रियों से खाना और नाश्ता करने के लिए जोर डालेंगें। उतरते ही अगर आप कोल्ड ड्रिंक की 200 एमएल की बोतल लेते है तो 20 रूपए की अण्डा आमलेट दो अण्डे का 40 रूपये का। एक प्लेट खाना 100 से 150 रूपये का। भूखा पेट यात्री करे क्या मजबूरी में खाता ही है। अगर इस सफर में साथ बच्चे भी है तो मजबूरी और बढ़ जाती है।

बच्चों के लिए तो खाना और नाश्ता लेना ही है। ऐसे ही एक कर पूरे दिन व रात मिलाकर सैकड़ों बसें इन ढाबों पर रूकती है और हजारों यात्रियो को लूटने का प्रतिदिन का सिलसिला चलता रहता है। ऐसे न जाने कितनी बसें अपनी सेटिंग वाले ढ़ावों पर रूकती है। 

परिवहन निगम व स्थानीय पुलिस की मिलीभगत से चलता है यह धंधा। इस बात से तो उत्तर प्रदेश परिवहन निगम भी अंजान नहीं होगा, और न ही स्थानीय पुलिस ही क्योकिं यात्रियों को सुविधाएं देने के बजाय ऐसी असुविधा देते हैं कि कितने लोग तो भूखे ही सफर कर लेते हैं। जो परिवार के साथ सफर करते होगें वो क्या करें।

इस बात का ख्याल कभी ड्राईवर और कंडेक्टर को नही हुआ होगा। कैसे इतने महगें ढ़ाबे में खाना खाएं। ऐसा लगता है कि वो ढ़ाबा नहीं कोई तीन सितारा होटल खोलकर रखा हो। इन ढ़ाबों से सस्ता तो शहरों का होटल का खाना होता है। जहां कम पैसों में अच्छा खाना मिल जाता है।

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असुरक्षित है ऐसे ढाबे अक्सर होती है घटनाएं: सुरक्षा की दृष्टि से देखें तो जिन ढाबों पर बस रूकती है वहां अगर एक ढ़ाबे और एक दो दुकान सिगरेट और पान मसाला की ही होती है। जिस बेरहमी से ऐसे सून-सान जगह पर बस को रोका जाता है। कभी भी कोई बड़ी घटना लूटपाट जैसी घटित हो सकती है। दो रोटी फ्री में खाने के चक्कर में जिम्मेदार इतना बड़ा रिस्क लेते हैं ये बस के ड्राईवर और परिचालक। ये कोई पहली घटना नहीं है।

इससे पहले के सफर में तो एक यात्री और ढाबे वाले में खाने को लेकर बहस हो गई थी। आलू दम और कुछ रोटी का बिल 120 रूपए बनाया था, जिसे लेकर वो यात्री काफी नाराज हो गया था। और दोनो में जमकर बहस हुई थी। जिस पर ढाबा संचालक दादागिरी पर उतर आया था। और पैसा लेकर ही यात्री को जाने दिया गया। 

यात्रियों का कहना है कि रोडवेज प्रशासन को इस पर पहल करनी चाहिए। ऐसे लोगों पर लगाम लगानी चाहिए। इन अवैध ढाबों के चलते वित्तीय घाटा तो उनको भी होता होगा। अब देखने वाली बात है कि परिवहन निगम इस बात को लेकर अपनी आखें कब खोलता है। या फिर यात्रियों को लुटवाने वाला ये कड़वा सच ऐसे ही चलता रहेगा।

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बोले जिम्मेदार होगी कार्यवाही: जब इस समस्या पर गोण्डा डिपो के एआरएम वीके वर्मा से बात की गयी तो उनका कहना था कि रोडबेज की बसों को वहीं रोंकने की इजाजत है जहां रूकने की इजाजत हो। अगर ऐसी कोई भी डिपो की बस अवैध ढाबों पर रूकी हुई पायी जाती है तो चालक व परिचालक के विरूद्ध सख्त कार्यवाही की जायेगी।

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नियमानुसार होगी कार्यवाही: जरवल रोड थाने के एसओ विद्यासागर वर्मा का कहना है कि ऐसे ढाबों की जांच की जायेगी। जो ढाबा नियमों के अनुसार नहीं संचालित है उन्हे अधिकारियों से सहयोग लेकर सीज किया जायेगा।

(लेखक के अपने विचार हैं।)

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