लगी है आग चमन में चमन के बहार से…बिहार के संयम और सद्भावना की अग्निपरीक्षा का दौर

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Moinul Haque
मोईनुल हक़ नदवी

विचार। प्रदेश में साम्प्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने की घटनाओं के पीछे कुछ सोशल साइट्स का बड़ा इफेक्ट रहा है। कई झूटे मैसेज, कई पुराने फोटोग्रफ, कई फर्जी विडियो इस तरह-तरह से चल रहे हैं जैसे बिहार में सांस लेना मुश्किल हो गया हो।

यह बात सत्य है कि बिहार में लगभग 9 जिलों में साम्प्रदायिक सदभाव को आग लगाने की कोशिश हुई। इसके पीछे कोई राजनीतिक या धार्मिक मकसद भी रहा होगा। लेकिन सच्चाई यह है कि जितनी तेजी से माहौल बिगड़ा, उतनी ही जल्दी और फुर्ती से माहौल भी नियंत्रित भी हुआ।

अफवाहें अभी तक चल रही हैं माहौल बिगाड़ने की नित नई जतन हो रही है। कई कहानियां सामने आ रही हैं। गरीबों की रोटियां की रोटियां छीन ली गयी है। बेरोजगारों को बिना अपने भविष्य की चिंता किये नया रोजगार, दंगाई के रूप में दिया जा रहा है।

कोई भी बुद्धिजीवी बेरोजगारी के विषय में बात नहीं करता है। हमारे देश का अर्थव्यवस्था चरमराया हुआ है। उसमें कैसे सुधार हो। कोई चर्चा नहीं होती। हमारे नवयुवकों को धार्मिक उन्माद में धकेला जा रहा है। ताकि कोई रोज़गार, शिक्षा, स्वास्थ्य और बेहतर इन्फ्रास्ट्रक्चर की बात न करें। उन्हें धर्म के चक्रव्यूह में ऐसा डालो की कोई रोजगार न मांगें, कोई मंहगाई के विरुद्ध आवाज न उठाएं।

सब को पता है कि ये कौन माहौल बिगाड़ रहा है। माहौल बिगाड़ने से एक को फायदा है पर नुक्सान सब उठा रहे हैं। आप सतर्क रहें और एकदूसरे के मददगार बनें। नौजवानों को उपद्रवी और दंगाई बनने से बचाएं। ताकि बेहतर समाज अस्थापित हो। हर तरफ बिहार में बहार हो, चमन के फूल से चमन में आग न लगे। हमारी पहचान अनेकता में एकता है, उसपर आंच न आने दें।

(ये लेखक के अपने विचार है।)

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