टिकाऊ कौन? पार्टियों का गठबन्धन या आम आदमी का गठबन्धन…

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Sudhanshu Aanand
सुधांशु आनंद
विचार। सत्तर के दशक में “इंदिरा हटाओ देश बचाओ,”कांग्रेस हटाओ देश बचाओ” का नारा दिया गया था और फिर वही लोग आज फिर “मोदी हटाओ देश बचाओ”, “भाजपा भगाओ देश बचाओ” का नारा बुलंद कर रहे हैं जबकि उस समय भी जे.पी. ने कहा था हमें सिस्टम बदलना होगा केवल व्यक्ति या पार्टी बदलने से देश नहीं बदलेगा।
आज वही बात अरविंद केजरीवाल भी कह रहे हैं कि जब तक अंग्रेजों वाली व्यवस्था (सिस्टम) को नहीं बदलेंगे, नए भारत का निर्माण संभव नहीं। सिर्फ चेहरे या पार्टी बदलने से आम आदमी के हालात नहीं बदलेंगे। अत: तब भी पार्टियों की खिचड़ी मिलकर जनता पार्टी बनी थी और जनता ने उसका हश्र देख लिया। इस बार फिर बिहार से लालू की अगुआई में 18 छोटी-बड़ी पार्टियों का महगठबन्धन बनाने की कवायद हो रही है। बिहार में महागठबंधन के प्रयोग का नतीजा जनता भुगत रही है।

इस लिहाज से अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी के “एकला चलो रे” का सिद्धांत ज्यादा मुफीज जान पड़ता है। क्योंकि जैसे-जैसे आम जनता राजनीतिक रूप से जागरूक हो रही है, उसका सभी पार्टियों से विश्वास खत्म होता जा रहा है। जागरूकता का प्रयोग दिल्ली में हुआ और आम आदमी पार्टी (आप) को 70 में से 67 सीटें मिली।

Arvind Kejriwal
File Photo: CM Arvind Kejriwal
आप इसे महज संयोग नहीं कह सकते बल्कि केजरीवाल के आम आदमी से घुलने-मिलने और गठबंधन बनाने का परिणाम था कि सारी बड़ी पार्टियां धराशाई हो गई। संभव है आने वाला समय पार्टियों के महागठबंधन (ठगबंधन) से ज्यादा आम आदमी के मजबूत गठबंधन से राजनीतिक हालात बदले।

दरअसल आज भारतीय जनमानस अशिक्षा और गरीबी के कारण ठग नेताओं और बाबाओं के चक्कर में या अंधविश्वास में लुटते आएं हैं। इसलिए आज समय है कि हम नेताओं या बाबाओं के अच्छे दिन या सब ठीक हो जाएगा के झांसे में न पड़कर ठंडे दिमाग से सोचना होगा कि आम आदमी ही गठबंधन बनाकर देश को बदल सकते हैं।

ये नेता या बाबा पिछले सत्तर सालों से अपनी दुकान अपने या अपने परिवार के लिए चला रहे हैं। कभी जाति के नाम पर तो कभी धर्म के नाम पर ये सिर्फ हमारी भावनाओं से खेल रहे हैं। इनका देश और समाज बदलने का वादा सिर्फ कोरा वादा है।

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अगर अतिश्योक्ति न हो तो दिल्ली सरकार के सिस्टम बदलने की दिशा में आम आदमी (बिना किसी भेदभाव) के लिए स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में जो काम किए जा रहे हैं वह आने वाले समय में नज़ीर बनेगा।

झूठ बोलकर या घोषणा पत्र में जनता से झूठे वादे कर वोट लेने वाली पारिवारिक, धार्मिक, जातिवादी और भ्रष्ट पार्टियों से आने वाले समय में जनता जितना जल्दी छुटकारा पा ले, इससे उसका ही फायदा है। समय की मांग है।” पार्टियों का गठबन्धन नहीं, आम आदमी का गठबन्धन हो।”

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