भांग की महिमा अपरमपार, बस गटकनें से पहले जान लें यह राज़

भांग
Government Approved Bhang Shops are common scenes in Varanasi...
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बनारस की हर गली में मिल जाएगी सरकारी भांग की दुकान, महाशिवरात्रि के पर्व पर यह हो जाती है और ख़ास…

Shabab Khan
शबाब ख़ान (वरिष्ठ पत्रकार)

 

 

 

 

 

वाराणसी: शिव की नगरी काशी दो चीज के बिना अधूरी है, पहली गंगा और दूसरी शिव जी की अतिप्रिय बूटी यानि भांग। गंगा और भांग दोनों ही भगवान शिव को अत्‍यंत प्रिय हैं। बनारसी पंडों ने इन्‍हें आपस में बहन बताते हुए यहां तक कहा है कि मां गंगा मृत शरीर को तारती हैं, जबकि भांग जिंदा मस्‍तिष्‍क को तारती है।

वैसे तो साल के बारहों महीने काशी में भांग और ठंडई की दुकानें सजी रहती हैं, लेकिन महाशिवरात्रि के पर्व पर इसकी डिमांड कुछ ज्‍यादा ही हो जाती है।


हालांकि खांटी बनारसियों से भांग की महिमा छिपी नहीं है। हर शाम यहां के अधिकांश खांटी पुरनिया व्‍यापारीगण अपनी-अपनी दुकान-गद्दी बढ़ाने के बाद कम से कम एक गिलास ठंडई लेना अपनी आदत में शुमार रखते हैं। नई पीढ़ी भले ही व्‍हिस्‍की, रम, बीयर या जिन की दीवानी हो, खांटी बनारसियों के लिए भांग की ठंडई का आज भी कोई जोड़ नहीं है।

बनारस और दुनियाभर में बहुत सारे लोग ये मानते हैं कि भांग का सेवन करना स्‍वास्‍थ्‍य के लिए हानिकारक है, वहीं ऐसे भी लोग अधिक संख्‍या में हैं जो इसके भांति-भांति के फायदे गिनाते हैं। महाशिवरात्रि के पर्व पर ‘जनमंच न्यूज़’ ने भी सोचा कि चलें हम भी भांग के नफा-नुकसान को लेकर थोड़ा खोज-खबर कर लें।

हमने शहर के जाने-माने चिकित्‍सकों और पुराने भंगेड़ियों से इसके फायदे नुकसान के बारे में पूछा और जो निष्कर्श निकल कर आया हम आपको बताते हैं। जानकारी की खोज में बनारस की गलियों में चक्कर लगाकर और भांग के बारे में अपने सवालों के जवाब की खोज करते हुये हमनें एक डिस्कवरी यह कर डाली कि बनारस ही पूरे विश्व में वो जगह हैं जहां हर दूसरा व्यक्ति इसका स्पेश्लिस्ट है, हमने पाया कि काशी ही विश्व की ‘भांग राजधानी’ है।

क्या है शिवबूटी या भांग


1. आयुर्वेद में इसे इसे विजया के नाम से पुकारा गया है। विजया भांग का संस्‍कृत नाम है। इसके अलावा हिन्‍दी, मराठी, गुजराती और बांग्‍ला में इसे भांग कहते हैं। अरबी में बिन्‍नव तथा लैटिन में कैनिबिस सेटाइवा के नाम से ये पहचानी जाती है।

2. इसके पौधे की उम्र मात्र एक साल होती है। तीन फीट से लेकर आठ फीट ऊंचा पौधा बिलकुल सीधा होता है। भांग की डालियां पतली और हरी होती हैं। इसकी पत्‍तियां कटी हुई होती हैं। कुछ-कुछ नीम के पत्‍ते की तरह। भांग के पौधे में सफेद फूल भी उगते हैं और बाजरे के जैसे इसमें फल भी लगते हैं।

3. भांग के पौधे बिहार, पश्‍चिम बंगाल, उत्‍तर प्रदेश, उत्‍तराखंड, पंजाब और हिमाचल प्रदेश में पाये जाते हैं।

4. आयुर्वेद के अनुसार इनमें नर और मादा दो तरह के पौधे होते हैं। नर पौधों की टहनियां और पत्‍तियां भांग कही जाती हैं, जबकि मादा पौधे (कैनेबिस इंडियाना) के फूलों की मंजरी गांजा के रूप में उपयोग में लायी जाती है। दोनों ही बेहद नशीली होती हैं।

5. कम लोग जानते हैं कि इसी पौधे की शाखाओं से विशेष विधि के द्वारा ‘चरस’ का निर्माण होता है। चरस पूरी दुनिया में सबसे नशीला पदार्थ माना जाता है और भारत सहित विश्‍व के अधिकांश देशों में इसका उत्‍पादन, बिक्री, भंडारण और सेवन कानूनन जुर्म माना जाता है।

6. भांग को अगर औषधि के रूप में लें तो यह बड़ी गुणकारी भी है। शुद्ध भांग और दूसरी जड़ी बूटियां मिलाकर बनाये गये चूर्ण से दस्‍त, भूख का न लगना, पेचिश आना, खाना न पचना, जैसी समस्‍याएं दूर होती हैं।

7. आयुर्वेद के अनुसार भांग का सेवन कोई गलत चीज नहीं है। आयुर्वेद ने भी माना है कि भांग एक औषधीय पदार्थ है, जिसका प्रयोग कई बीमारियों को दूर करने के लिए किया जा सकता है।

8. आयुर्वेद के अनुसार विजया या भांग तभी फायदेमंद है, जब इसकी मात्रा संतुलित हो। वैसे भी अति किसी भी चीज की नुकसानदायी ही होती है।

9. किसी को हर समय सिर दर्द रहता है तो भांग की पत्तियों के रस का अर्क बनाकर उसके कान में 2-3 बूंद डाल देने से तुरंत आराम मिलता है।

10. आप विश्‍वास नहीं मानेंगे, कई देशों में डॉक्‍टर भांग की 125 मिलीग्राम और हींग मिलाकर मानसिक रोगियों की दवा में प्रयोग करते हैं। इसे मानसिक रोगियों के इलाज में भी इस्‍तेमाल में लाया जाता है।

11. किसी की भूख बढ़ानी हो तो सही मात्रा में भांग का सेवन करने से उसकी भूख बढ़ सकती है। इसके लिए काली मिर्च के साथ भांग का चूर्ण चिकित्सकीय परामर्श में सुबह और शाम रोगी को चटाना चाहिए, कुछ ही दिनों में भूख बढ़ जाती है।

12. किसी पुरुष को सेक्सुअल एक्टिविटी बढ़ाने में दिक्कत आ रही है, तो वह आयुर्वेदिक डॉक्टरों की सलाह से दवाओं के साथ निश्चित मात्रा में यदि भांग ले तो लाभ हो सकता है।

13. भांग का सेवन करते ही हम अपनी शारीरिक इंद्रियों पर नियंत्रण खो देते हैं। इसलिए लोग भांग खाते ही झूमने लगते हैं।

14. भांग के कुछ ऐसे नुकसान हैं जो दिखाई तो नहीं देते, किंतु अंदर ही अंदर हमारे शरीर को नष्ट करते हैं। शराब जहां खून को प्रभावित करती है वहीं भांग का नशा सीधे हमारे नर्वस सिस्‍टम पर असर करता है। लंबे समय तक इसके सेवन से याद्दाश्‍त में कमी आती है।

15. भांग का सेवन चाहे किसी भी रूप में किया जा रहा हो, ठंडई बनाकर, भांग की पत्तियों को चिलम में डालकर धूम्रपान करके या पानी के साथ घोंटने पर…. हर स्‍थिति में ये नुकसानदायक ही है। भांग सीधे दिमाग पर असर करता है।

16. भांग के कण दिमाग की उन नसों पर अटैक करते हैं जो हमारी हंसी, खुशी, दु:ख और उदासी आदि भावनाओं से जुड़े होते हैं। यही कारण है कि भांग खाने के बाद कुछ लोग खूब रोते या हंसते हैं। कभी-कभी तो खूब खाते भी हैं।

17. जो लोग ऐसा सोचते हैं कि भांग उतरने के बाद उसका नशा भी खत्म हो जाता है, तो वो गलत हैं। शराब से अलग भांग का असर लंबे समय तक इंसानी दिमाग पर प्रभाव डालता है। व्‍यक्‍ति को ये महसूस ही नहीं होता, लेकिन धीरे-धीरे उसका दिमाग प्रभावित होता रहता है।

18. भांग की मात्रा अत्‍यधिक होने पर हार्ट-अटैक का भी खतरा बना रहता है। वहीं इसे खाने के बाद मीठा खाने की चाहत बढ़ जाती है। डीहाईड्रेशन (शरीर का निर्जलीकरण) भी काफी तेजी के साथ होता है।

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