दोस्तों नें किया था ‘भयानक’ की हत्या, लेडी सिंघम नें एक हफ्ते में ही कर दिया खुलासा

Share this news...

रोजल उर्फ भयानक की मारपीट से आजिज़ थे दोस्त, मारपीट कर फेंक अाये थे हड़ाहसराय में…

Tabish Ahmed
ताबिश अहमद

 

 

 

 

 

वाराणसी: दशाश्वमेध क्षेत्राधिकारी स्नेहा तिवारी का गुड वर्क जारी है, लेडी सिंघम के नाम से मशहूर पुलिस की तेजतर्रार अधिकारी नें बीते 22 जनवरी को हत्या कर फेकें गये रोजल उर्फ भयानक (22) की हत्या की गुत्थी सुलझाकर आरोपियों को गिरफ़्तार कर उन्हे जेल भेज दिया है।

आज एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में वरिष्ठ पुलिस अधिक्षक आर० के० भारद्वाज एवं क्षेत्राधिकारी दशाश्वमेध स्नेहा तिवारी ने बताया कि रोजल उर्फ भयानक की मारपीट से आजिज़ आकर उसके दो दोस्तों ने ही उसकी हत्या की थी। पुलिस ने रोजल के दोस्त पथरगलिया दालमंडी के बाबू चापड़ उर्फ अमीरुद्दीन और मदनपुरा के शीबू उर्फ दिलशाद को जेल भेज दिया।

22 जनवरी की सुबह सराय हड़हा स्थित एक मस्जिद के समीप गली में बोरे में भर कर रोजल का शव फेंका गया था। रोजल का हाथ-पैर और गला रस्सी से बंधा हुआ था। रोजल के पिता अब्दुल कय्यूम ने नया चौक के बाबर और लल्लापुरा के जानू के खिलाफ चौक थाने में मुकदमा दर्ज कराया था। अब्दुल कय्यूम का आरोप था कि पुरानी रंजिश में बाबर ने जानू और अन्य अज्ञात साथियों के साथ रोजल की हत्या की है।

एसएसपी राम कृष्ण भारद्वाज ने बताया कि घटनास्थल के समीप के सीसीटीवी कैमरे की फुटेज और क्षेत्रियों लोगों से पूछताछ के आधार पर पता लगा कि 21 जनवरी की रात बाबू चापड़ और शीबू इलाके में देखे गए थे।

सोमवार की सुबह दोनों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की गई तो उन्होंने बताया कि रोजल उनका दोस्त था। तीनों साथ नशा करते थे। मगर, नशे में धुत होने के बाद रोजल दोनों को मारता-पीटता था। 21 जनवरी की रात भी नशे में धुत रोजल आया और दोनों को सराय हड़हा स्थित मस्जिद के समीप बुलाकर मारपीट शुरू कर दिया। इसी दौरान रोजल का पैर फिसला और वह जमीन पर गिर गया।

मौका पाकर दोनों ने उसकी पिटाई शुरू कर दी। इसके बाद रस्सी से रोजल का गला और हाथ-पैर बांध कर दोनों ने उसे प्लास्टिक के बोरे में भर दिया और भाग निकले। समाचार पत्रों में खबर प्रकाशित हुई तो दोनों को पता चला कि रोजल की मौत हो गई है। एसएसपी ने रोजल की हत्या के खुलासे पर सीओ दशाश्वमेध स्नेहा तिवारी, चौक थाने के एसएसआई शेष कुमार शुक्ला व एसआई अमरेंद्र पांडेय की प्रशंसा की।

वरिष्ठ पुलिस अधिक्षक ने कहा कि हत्या जैसे अपराध में बगैर किसी ठोस साक्ष्य के जब मृतक के परिजन किसी को नामजद कर देते हैं तो पुलिस की मुश्किलें बढ़ जाती है। इस मामले में भी ऐसा ही हुआ। मगर, सीओ दशाश्वमेध के सुपरविजन में चौक पुलिस ने धैर्य के साथ जांच की। बगैर सर्विलांस की मदद के मुखबिरों की सूचना और इलाकाई लोगों से पूछताछ करके साक्ष्य जुटाते हुए कार्रवाई की और आरोपियों को गिरफ़्तार कर जेल भेजा।

Share this news...