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आपसी कलह से बचने के लिए कांग्रेस बिना सीएम के चहरे के मध्यप्रदेश में चुनाव लड़ेगी

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Sarvesh Tyagi

सर्वेश त्यागी

भोपाल। भाजपा में प्रदेश अध्यक्ष बदलने के बाद अब मप्र कांग्रेस में एक बार फिर प्रदेश अध्यक्ष बदलने की चर्चाएं शुरू हो गईं हैं। बताया जा रहा है कि राहुल गांधी ने कमलनाथ और सिंधिया से मप्र की रणनीति के बारे में बात की है। अनुमान लगाया जा रहा है कि कमलनाथ को प्रदेश कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया जाएगा एवं ज्योतिरादित्य सिंधिया इलेक्शन केंपन कमेटी के चेयरमैन होंगे। यानी भाजपा के राकेश सिंह से कमलनाथ का मुकाबला होगा जबकि नरेंद्र सिंह तोमर के सामने ज्योतिरादित्य सिंधिया होंगे।

कांग्रेस का सीएम कैंडिडेट नहीं होगा…

सूत्रों का कहना है कि कमलनाथ-सिंधिया और राहुल गांधी की मीटिंग में यह भी फाइनल हो गया है कि मप्र में कोई भी सीएम कैंडिडेट नहीं होगा। पार्टी एकजुट होकर चुनाव लड़ेगी और जीतने के बाद मुख्यमंत्री का चुनाव किया जाएगा। यह खबर नेताप्रतिपक्ष अजय सिंह के लिए काफी अच्छी है। वो यही चाहते थे कि सीएम का चुनाव विधायक दल करें।

दिग्विजय सिंह पर फैसला टला…

नर्मदा परिक्रमा से लौटे दिग्विजय सिंह ने मप्र में सक्रिय होने की इच्छा जताई है। उन्होंने राजनैतिक यात्रा का भी ऐलान किया है। सूत्रों का कहना है कि राहुल गांधी से बातचीत के दौरान दिग्विजय सिंह की भूमिका पर भी चर्चा की गई परंतु कोई फैसला नहीं हो पाया जबकि मप्र में दिग्विजय सिह समर्थकों का दावा है कि उनके पास कोई पद नहीं होगा परंतु वो 2018 के चुनाव में निर्णायक भूमिका निभाएंगे।

चार कार्यकारी अध्यक्ष पर भी विचार…

गुजरात की तरह मप्र में भी 4 कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किए जाने पर विचार किया जा रहा है। राहुल गांधी की टीम का मानना है कि इस फार्मूले के तहत गुटबाजी का फायदा उठाया जा सकता है लेकिन मप्र में समस्या यह है कि इसे केवल 4 हिस्सों में नहीं बांटा जा सकता। ग्वालियर चंबल, महाकौशल, मालवा, मध्यप्रदेश मध्य, बुंदेलखंड और मालवा निमाण इस तरह कम से कम 6 हिस्से होंगे।