“इंसान में इंसानियत का अहसास अगर जिंदा हो”…

Muslim preacher
Janmanchnews.com
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Pankaj Pandey
पंकज पाण्डेय

बेगूसराय। “इंसान में इंसानियत का अहसास अगर जिंदा हो तो एक ठोकर से जिंदगी के कई फैसले बदल जाता है।” उक्त बातें ऑल इंडिया मुस्लिम लॉ बोर्ड के महासचिव सह अमीरे शरियत हजरत मौलाना सैयद मोहम्मद वली रहमानी ने शनिवार की देर रात्रि मदरसा तालीमुल इस्लाम बखड्डा में तंजीम बेफाकूल उलेमा के तत्वाधान में आयोजित जलसा को संबोधित करते हुए कहीं।

दीनी तालीम के बिना समाज का सुधार मुमकिन नहीं है। घरों में दीनी तालीम का नज्म हर शख्स की जिम्मेदारी है। हर मुसलमान का यह फर्ज है कि वह अपने बच्चों को दीनी तालीम के साथ-साथ दुनियावी तालीम भी दें।

पवित्र कुरान हमारे समाज के लोगों के रग-रग में बसा है। कुरान की आयतें हमें जन्नत के दरवाजे दिखाती हैं। शरियत इस्लामी कानून का पालन हम लोग बड़े अदब से करते हैं। कुछ लोग एवं सरकार अपनी मर्जी चलाकर हमारे इस्लामी कानून शरियत में छेड़छाड़ का प्रयास कर रहे हैं। हमलोग उचित तरीके से विरोध में आवाज बुलंद भी कर रहे है।

भारतीय संविधान की धारा 25 हमें पूर्णरूपेन धार्मिक स्वतंत्रता की गारंटी देता है। जबकि धारा 44 नीति निदेशक तत्व है। इसलिए कोई हमारी धार्मिक स्वतंत्रता को छीन नहीं सकता। हम इस देश के नागरिक हैं।

उन्होंने कहा, हम अपने धर्म के प्रति एकजुट हैं। दूसरी तरफ जलसा प्रोग्राम में मदरसा तालीमुल इस्लाम बखड्डा के 34 छात्रों को कुरान हिफ्ज करने पर दस्तार बांधी गई। जबकि चार गरीब लड़कियों का निकाह जलसे के दौरान कराया गया। 

अध्यक्षता और संचालन मौलाना रजी अहमद रहमान ने की।

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