खादी वस्त्रों को खादी भंडार स्वयं विलुप्त कर रहा

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संजय गुप्ता की रिपोर्ट,

शिवहर। महात्मा गांधी के सपनों का धराशायी करने में जुटा हुआ है सीतामढ़ी जिला खादी ग्रामोद्योग संघ। एक जमाने में जिला शिवहर में खादी वस्त्रों की बिक्री पूरे जोरों पर थी तथा इसका बार बार मीटिंग करने एवं सदस्य बढ़ाने पर जोर दिया जाता रहा था।

मौजूदा समय में खादी वस्त्रों की बिक्री पर पूरी तरीके से नजर अंदाज किया जा रहा है। वहीं मौजूदा प्रबंधक इंदल मंडल द्वारा खादी वस्त्रों की बिक्री के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार न करने से नए युवको में खादी वस्त्रों की बिक्री धूमिल होती जा रही है।

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सीतामढ़ी जिला खादी ग्रामोद्योग संघ का जिला कार्यालय पेट्रोल पंप से पूरब जीरो माइल चौक से पश्चिम अपना भवन तथा अपना दुकान है।

जहां पहले चरखा से सूत काटकर वस्त्रों का निर्माण किया जाता था। लेकिन अब प्रबंधकों के कारण खादी भंडार में रखे चरखा खराब होने के कगार पर है।

जबकि प्रबंधक द्वारा बताया गया कि जिला में डुमरी, सुगिया कटसरी, परसौनी बैज, पवित्र नगर, फतेहपुर में 30 चरखा से सुत काटकर ग्रामीण महिलायें कपड़ा का थान, पायजामा कुर्ता का कपड़ा, बनाया जाता था। परंतु लोगों में चरखा से सूत काटने की पुरानी महिलायें मेहनत करती थी लेकिन अब नये जमाने कि महिलायें चरखा चलाने में कतराती है।

अभी भी खादी भंडार के गोदाम में सवा लाख रूपय का कच्चा माल पड़ा हुआ है, पहले महज पांच साल पूर्व प्रतिवर्ष सुत काटकर चरखा से कपड़ा का उत्पादन दो लाख का शिवहर जिला से किया जाता था।

आधुनिक युग में खादी वस्त्रों की बिक्री पर लगाम लगता दिख रहा है। जबकि गांधी जयंती के अवसर पर इस बार खादी वस्त्रों के बिक्री पर 30 फिसदी की छूट दी गई है।

परंतु बिक्री महज 5 हजार के आसपास प्रतिदिन होने से खादी भंडार क दयनीय स्थिति होती जा रही है खादी भंडार के द्वारा पहले खादी वस्त्रों के जिले में तकरीबन 200 ग्राहक थे टॉप बिक्री लगभग 30 से 40 हजार की रोजाना हुआ करती थी जो अब घटकर बहुत कम हो गया है जबकि दुकान में सूती खादी, चादर गमछा जाजिम रजाई रंगीन कोटिंग, जाडा के लिए सैटिंग आदि उपलब्ध है।

वहीं रेशम कपडा, ऊनी कपड़ा, बनडी मफलर, शाल, टाउजर, पेंट शर्ट, दस्ताना, मंकीटोपी खादी भंडार का उपज है, परंतु खादी वस्त्रों के सदस्यों को शिथिलता एवं व्यापक प्रचार-प्रसार के ना होने के कारण खादी वस्त्रों की बिक्री पर लगाम लगती जा रही है।

चरखा शिवहर जिला में विगत चार पांच महीनों से बंद है कार्य करने वाले तकरीबन 20 से 25 महिलाओं की रोजी रोटी भी बंद है।

विगत 5 साल पूर्व तत्कालीन डीएम विजय कुमार द्वारा जाड़े में गरीब एवं असहायों के बीच कंबल वितरण करने को लेकर शिवहर खादी भंडार से कंबल खरीदा जाता था तथा खादी भंडार से ही चतुर्थवर्गीय कर्मचारी के लिये कोर्ट खरीदकर दिया जाता था जिस कारण खादी वस्त्रों की महत्व सरकारी कर्मी से लेकर ग्रामीण इलाके में खादी वस्त्रों का महत्व दिखता था।

जबकि शिवहर खादी भंडार पर ग्रामोद्योग स्वयंसेवी संस्थाओं के द्वारा गरम मसाला, मिर्च, हल्दी पाउडर, अगरबत्ती, चमनपरास आदि की बिक्री हो रही है।

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