रुपेश मोतिहारी

गुहार: सरकारें नहीं पिघली…क्या आप बचा सकते हैं रुपेश की जिंदगी?

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जनमंच टीम,

मोतिहारी। कहने को तो अनेक स्वयं सेवी संस्थाएं और सरकार के जनप्रतिनिधि गरीबों की मदद के लिए हर समय तैयार रहते हैं, लेकिन इससे बड़ा सच क्या हो सकता है कि एक बेबस गरीब पैसे के अभाव मेंं अपने जिंदगी का आखिरी लम्हा मुंबई के ग्लोबल हॉस्पिटल में जी रहा है।

आपको बताते चलें की रुपेश पांडेय बिहार के मोतिहारी जिले के रहनेवाले हैं जो क्रॉनिक लिवर डिजीज से ग्रसित हैं। यह बीमारी हेपेटाइटिस बी से संबंधित है। वे मुंबई के ग्लोबल हॉस्पिटल में एडमिट हैं। वहां के डिपार्टमेंट आॅफ हेपटोलॉजी के हेड डॉ. समीर आर शाह ने अविलंब लिवर ट्रांसप्लांट की एडवाइस दी है। कहा है कि मरीज की जान बचाने के लिए लिवर ट्रांसप्लांटेशन ही एकमात्र विकल्प है। लिवर ट्रांसप्लांटेशन में 25 लाख से अधिक रूपये खर्च बताया गया है।

पीएमओ से गुहार…

केंद्रीय कृषि मंत्री व मोतिहारी के सांसद राधामोहन सिंह ने इस परिवार की बेबसी पर तरस खाकर पीएमओ से मदद की सिफारिश की थी। उसके जवाब में 16 फरवरी को लिखे पत्र में प्रधानमंत्री कार्यालय ने मदद करने में असमर्थता वाली बात कही है। प्रधानमंत्री कार्यालय ने लिखा है कि रुपेश के आवेदन की जांच की गई और उसकी गुहार सही भी पाई गई लेकिन अर्जी स्वीकार नहीं की जा सकती।

पीएमओ ने अपनी दलील में कहा है कि मरीज की परिस्थितियां चाहे जैसी हो, सरकार अपनी शर्तों पर मदद करती है। सरकार ने ये कारण गिनाए हैं और अर्जी लौटा दी है। कहा है कि मरीज सरकारी अस्पताल में इलाजरत होना चाहिए या प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से अनुमोदित पैनल में शामिल प्राइवेट अस्पताल में इलाज कराने के लिए ही सरकार अपने कोष से सहायता देती है। सरकार का यह जवाब सुनकर इस परिवार के पांव तले जमीन खिसक गई है।

अपने परिवार में इकलौते अर्निंग पर्सन हैं रुपेश…

रूपेश की पत्नी जूली के मुताबिक वह घर के इकलौते कमाऊ मेंबर हैं। उन्हीं पर सारा दारोमदार है। घर में दो बच्चे राजा व निषा अभी मैट्रिक में हैं। पिता के इस हाल में होने से उनका भविष्य अंधकार में है। उनके बीमार रहने से आय के साधन तो पहले ही बंद हो गए हैं, उपर से घर की जमा पूंजी भी हाथ से निकल गई है।

परिवार वाले बिहार से लेकर मुंबई तक इलाज करा कर थक चुके हैं। घर की आर्थिक स्थिति अत्यंत खराब है। अब तक के इलाज में ही सारे पैसे खत्म हो गये हैं। यहां तक सगे-संबंधियों से कर्ज लेकर भी इलाज कराया गया है। अब कोई कर्ज देने को तैयार नहीं। ऐसे में लिवर ट्रांप्लांटेशन के लिए कहां से 25 लाख रुपये जुटा पायेंगें।

ट्वीटर के जरिए मांगी गई मदद…

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव, विधानसभा अध्यक्ष विजय चैधरी समेत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय कृषि मंत्री राधामोहन सिंह, वित मंत्री अरूण जेटली, गृहमंत्री राजनाथ सिंह, स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और पीएमओ कार्यालय के अलावा फिल्म स्टार सलमान खान और उनकी संस्था वीईंग ह्यूमन, अक्षय कुमार, आमिर खान, शाहरुख खान और उद्योग पति मुकेश अंबानी से भी मदद की गुहार लगाई है। इन फिल्मी हस्तियों से ट्वीटर के जरिए मदद मांगी गई। लेकिन कोई भी अबतक मदद के लिए आगे नहीं आये हैं।


मदद के लिए सितारों के घर पर दस्तक…

सलमान व शाहरुख के आवास पर मुंबई में 2 दिसंबर को रुपेश के परिजन मदद के लिए गुहार लगाने के लिये भी गया था लेकिन उनसे मुलाकात नहीं हो पाई। सलमान को अनगिनत बार ई-मेल भी किया गया पर कोई जवाब नहीं आ सका। इसके साथ ही देश की तमाम बड़ी हस्तियां यथा फिल्मी, उद्योगपति, धनाढ्यों, रईसों, राजनीतिज्ञों से भी मदद की गुहार लगाई। लेकिन अबतक निराशा ही हाथ लगी है।

रुपेश के मां-बाप इस दुनिया में नहीं हैं। हाल ही में उनकी मृत्यु हुई है। इलाज के बगैर किसी को नहीं मरने देने का भरोसा दिलाने वाले रहनुमाओं की नियत और नीतियां इससे परिलक्षित होती हैं। इस बदनसीब इंसान की बेबसी और लाचारी सिस्टम पर करारा चोट करती है। भारत जैसे देश के लिए यह बड़ा सवाल है।

अब इस परिवार को किसी फरिश्ते का इंतजार है। परिवार ने हिंदुस्तान से मदद की गुहार लगाई है। सरकारें नहीं पिघलीं….क्या आप…..छोटी मदद से बचा सकती है रुपेश की जिंदगी…!

लिवर ट्रांसप्लांट में आप रुपेश की मदद करना चाहते हैं, तो यहां कर सकते हैं संपर्क।
रुपेश के भाई: अमन पाण्डेय मोबाइल नंबर 09470285969