saharsa torch operation

जब घायल महिला का सफाईकर्मी ने टॉर्च की रौशनी में कर दिया ऑपरेशन

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Sarfaraz Alam

सरफराज आलम

सहरसा। डबल इंजन की सरकार में स्वास्थ्य व्यवस्था की एक बानगी देखिए। सड़क दुर्घटना में घायल एक महिला को इलाज के लिए अस्पताल लाया जाता है। अस्पताल…कोई पीएचसी या रेफरल अस्पताल नहीं, बल्कि सदर अस्पताल। वहाँ न तो रौशनी है और न ही डॉक्टर। घायल महिला का टार्च की रौशनी में ऑपरेशन होता और इलाज करता है डॉक्टर के बदले वहाँ तैनात सफाईकर्मी।

बताया जा रहा है कि सड़क दुर्घटना में घायल एक महिला को इलाज के लिए सहरसा सदर अस्पताल लाया जाता है। लेकिन जब वह अस्पताल पहुंची तब न तो वहां कोई डॉक्टर मौजूद था और न ही बिजली थी। बिल्कुल अंधेरा था। तब सफाई कर्मचारी ने टॉर्च जलाया और उसकी रोशनी में ही मरीज का ऑपरेशन कर दिया। इसके बाद जब अस्पताल के सिविल सर्जन से संपर्क किया गया तो पता चला वह तो पटना में हैं। ऐसे में निश्चित ही सफाईकर्मी ने ही और लोगों के साथ मिलकर महिला का ऑपरेशन किया।

बिहार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय इस बात को गलत बताते है। पर वह स्वीकार करते है कि एक घायल महिला को टांके लगाए गए थे, ऑपरेशन नहीं किया गया था।

इस घटना का एक वीडियो भी वायरल है। इस विडीयो में ऑपरेशन कर रहे डॉक्टर से पूछा गया कि कब से लाइट नहीं है तो उसने कहा कि कल से लाइट नहीं है। फिर जब उससे यह पूछा गया कि अस्पताल में लाइट होनी चाहिए और ऑपरेशन थियेटर में तो हर समय रहनी चाहिए। तो उसने कोई जवाब नहीं दिया। इसके बाद जब डॉक्टर से उसका नाम पूछा गया तो पता चला कि जो ऑपरेशन कर रहा है वह डॉक्टर नहीं बल्कि अस्पताल का सफाईकर्मी है।