रायबरेली

रायबरेली में भाजपा की रैली संपन्न, दिनेश सिंह भाजपा में शामिल, क्या बीजेपी के लिए रायबरेली इतनी आसान होगी?

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दिनेश प्रताप सिंह के बीजेपी में आने से नाखुश हैं रायबरेली के बीजेपी कार्यकर्ता…

Rahul Yadav

राहुल यादव

 

 

 

 

 

 

रायबरेली: भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में कांग्रेस के दिग्गज नेताओं में शुमार रहे एमएलसी दिनेश प्रताप सिंह ने आखिरकार भाजपा का दामन थाम लिया। बताते चलें लगभग दो सप्ताह से खबरें आ रही थी एमएलसी दिनेश सिंह कांग्रेस पार्टी छोड़ने वाले हैं हालांकि उन्होंने अपने आवास पंचवटी में पत्रकारों से मुखातिब होते हुए 2 दिन पूर्व यह स्पष्ट कर दिया था। 21 अप्रैल को भाजपा के वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में भी भाजपा में शामिल हो जाएंगे।

जनता को संबोधित करते हुए एमएलसी दिनेश सिंह नें कहा मैं रोजगार और विकास के लिए जब भी कांग्रेस के नेताओं से जिक्र करता मेरी बात अनसुनी कर दी जाती थी। मुझे अपने जिले को देख कर दुख होता था, तभी मैंने अपने जिले के विकास के लिए कांग्रेस पार्टी छोड़ने का निर्णय किया। श्री सिंह ने कहा मैंने कांग्रेस नेताओं से जब फ़िरोज़ गांधी राहुल गांधी के दादा की मूर्ति लगवाने की मांग की तो सभी ने मौन साध लिया। जो अपने दादा का ना हुआ वह अपनी जनता का क्या होगा?

स्वागत माला पहनने से पूर्व जनता से दिनेश सिंह ने पूछा क्या मुझे भाजपा में शामिल होने की इजाजत है? बड़ी तादाद कि जमा भीड़ से हां शब्द गुंजा इसके बाद अमित शाह ने माला पहनाकर दिनेश सिंह का बीजेपी में स्वागत किया।

कांग्रेस पर आरोप लगाते हुए बीजेपी नेता दिनेश सिंह ने कहा कांग्रेस द्वारा फुर्सतगंज एयरपोर्ट सिर्फ वीआईपी प्रयोग में आने जाने के लिए इस्तेमाल होता है। उन्होंने कहा अगर फुरसतगंज उड़ान अकादमी से रोजगार मिलता तो रायबरेली के 200 से 300 युवा पायलट होते इसे सिर्फ राजनीतिक मूवमेंट के लिए कांग्रेस प्रयोग करती है।

मंच पर बैठे भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपने संबोधन का इंतजार कर ही रहे थे कि अचानक प्रेस दीर्घा के पास शॉर्ट सर्किट हुआ। देखते ही देखते आग की लपटें उठने लगी। जिला पुलिस कप्तान ने दौड़ कर जान जोखिम में डालकर तारों को अलग किया व फायर एक्सटिंगिशर का इस्तेमाल करते हुए आग पर काबू पा लिया।

हालांकि पूरी मीडिया दीर्घा धुंए से भर गई। लगभग आधे घंटे अफरा-तफरी का माहौल रहा। बाद में सुरक्षा कारणों से काटी गई लाइट पुनः चालू की गई। माइक चालू हुआ और अमित शाह ने जनता को संबोधित करते हुए कहा ऐसी बाधाएं तभी आती है। जब कुछ अच्छा होने वाला होता है। इसके साथ-साथ उन्होंने कांग्रेस पर विकास ना कराने का आरोप भी लगाया तथा राहुल गांधी से भगवा आतंकवाद पर माफी मांगने की भी बात की।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कांग्रेस पर कई आरोप लगाया, यहां तक की सभा में शार्ट सर्किट से आग लगने की घटना को भी उन्होने कांग्रेस के सर मढ़ दिया।

रायबरेली में प्रस्तावित एम्स का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्ववर्ती सरकार ने इस संस्थान की मात्र घोषणा की थी, इस दिशा में कोई कार्य नहीं किया। अब इस संस्थान को प्रारम्भ किया जा रहा है। प्रदेश सरकार इसके लिए जमीन देगी और शीघ्र ही इस दिशा में कार्य शुरू हो जायेगा। उन्होंने कहा की भारत सरकार के रेल मंत्रालय द्वारा रायबरेली में रेल कोच फैक्ट्री की स्थापना की जा रही है, प्रदेश सरकार इसके लिए भी शीघ्र जमीन उपलब्ध करायेगी।

इस सभी परियोजनाओं से अबतक विकास से वंचित रहे रायबरेली जिले का तेजी से विकास होगा और साथ ही लोगों को बड़े पैमाने पर रोजगार मिलेगा। कार्यक्रम को प्रदेश के उप मुख्यमंत्री डाॅ0 दिनेश शर्मा ने भी सम्बोधित किया। कार्यक्रम मेें मुख्य रूप से प्रभारी मंत्री नंदी, कैबिनेट मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य, रीता बहुगुड़ा, अनुपमा जायसवाल, मोती सिंह, एवं पूर्व सांसद प्रत्यााी अजय अग्रवाल, जिलाध्यक्ष दिलीप यादव सहित कई विधायक एवं भारी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता मौजूद रहे।

दिनेश प्रताप सिंह के बीजेपी में जानें को वरिष्ठ पत्रकार योगेश मिश्र इसे बहुत सूझ-बूझ वाली रणनीति नहीं मानते, “दिनेश प्रताप सिंह ऐसा बड़ा नाम नहीं है जिसे पार्टी में शामिल कराने के लिए बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह आएं। दूसरे दिनेश सिंह और उनका परिवार बीजेपी के लिए एक बोझ ही साबित होगा क्योंकि एक तो वोटों के लिहाज़ से उनकी वो हैसियत नहीं है कि बीजेपी उनकी वजह से सोनिया गांधी या कांग्रेस को रायबरेली में कोई नुक़सान पहुंचा सके, दूसरे उनका परिवार पूरे पांच साल सरकार से कुछ न कुछ पाने की इच्छा रखेगा और सरकार को परेशान करेगा।”

योगेश मिश्र कहते हैं कि ऐसे समय में जबकि राज्य सरकार ही नहीं बल्कि केंद्र सरकार पर भी चौतरफ़ा हमले हो रहे हैं, अमित शाह सोनिया गांधी जैसी बड़ी नेता को चुनाव हराने की रणनीति में लगे हैं, ये कोई समझदारी भरा फ़ैसला नहीं है।

बकौल योगेश मिश्र, राजनीति में विरोधियों को हराना लोकतंत्र की ख़ूबी है, लेकिन विरोधियों का राजनीतिक सफ़ाया करने की नीयत रखना कभी भी स्वस्थ परंपरा के तौर पर नहीं देखा गया है।

योगेश मिश्र की तरह रायबरेली के कुछ आम लोग भी ऐसा ही सोचते हैं।

स्थानीय निवासी रमेश बहादुर कहते हैं, “रायबरेली की जो भी पहचान है, वह कांग्रेस पार्टी और सोनिया गांधी, इंदिरा गांधी की वजह से है। इन लोगों ने रायबरेली को बहुत कुछ दिया है। रायबरेली की जनता इतनी जल्दी ये सब नहीं भूल पाएगी।”

रायबरेली के स्थानीय पत्रकार माधव सिंह कहते हैं, “अमेठी में बीजेपी ने पूरी ताक़त झोंक दी लेकिन वो 2014 में भी कांग्रेस को नहीं हरा पाई। रायबरेली तो उससे भी मज़बूत गढ़ रहा है, सोनिया गांधी और इंदिरा गांधी ने यहां की जनता की भलाई और क्षेत्र के विकास के लिए बहुत कुछ किया है। 2019 के चुनाव में तो मौजूदा केंद्र सरकार का भी जनता मूल्यांकन करेगी।”

माधव सिंह कहते हैं कि दो दिन पहले सोनिया गांधी क़रीब डेढ़ साल बाद अपने चुनावी क्षेत्र में आई थीं लेकिन लोगों का उत्साह ये बता रहा था कि फ़िलहाल रायबरेली में उन्हें या उनके रहते कांग्रेस को चुनौती देना कितना मुश्किल है।

वहीं, दिनेश सिंह के बीजेपी में सपरिवार शामिल होने की आहट मिलते ही पार्टी में विरोध के स्वर भी सुनाई देने लगे हैं। तमाम कार्यकर्ताओं ने उनके और उनके भाइयों के ख़िलाफ़ बीजेपी दफ़्तर के बाहर नारेबाज़ी की।

बताया जा रहा है कि रायबरेली के बीजेपी कार्यकर्ता और नेता उनको पार्टी में शामिल किए जाने से बेहद नाराज़ हैं। ऐसे में पार्टी को अपने भीतर ही कड़े विरोध का सामना भी पड़ सकता है।

लेकिन सवाल ये है कि जब पार्टी का मुखिया ही उन्हें सपरिवार अपनाने के लिए आया हो तो कार्यकर्ताओं के आगे और कौन सा रास्ता बचेगा? बहरहाल यह तो आने वाला वक्त बतायेगा कि दिनेश प्रताप सिंह बीजेपी के लिए रायबरेली से ट्रंप कार्ड होगें या जोकर।