“जय जवान, जय किसान” के सही मायनों पर सरकार की नीति ढुलमुल

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शहीदों के अतिंम संस्कार में शासन की तरफ से कोई भी नुमाइंदा नहीं पहुंचता है…

rinto singh
रिन्टू सिंह, शिवपाल, अम्बेडकर नगर

ब्लॉग डेस्क। “जय जवान, जय किसान”… भारत के सभी जवान, सभी किसान को मेरा सादर चरण अभिनदंन है।
मै काफी दिनों से जवान और किसान की हलात पर गहन अध्ययन कर रहा हूं।

जहां तक मुझे पता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जवानों को आधुनिक ढंग से तैयार कर रहे हैं। फिर भी अभी बहुत खामियां है। उड़ी हमले के बाद हमारे कई जवान शहीद हुये जो अलग प्रदेश से आते हैं।

अलग-अलग प्रदेश के सरकारों द्वारा सहायता राशि कम और ज्यादा के रूप में दी गयी। जिससे उनके परिवारों ने सहायता राशि लेने से इन्कार कर दिया। जिसको तमाम चैनलों ने इसे पुरे भारत को दिखाया।

कही-कहीं तो प्रदेश सरकारों के ऊपर शहीदो की जाति देखकर सहायता राशि देने का इल्जाम लगा। कहीं-कहीं तो शहीदों के अतिंम संस्कार में शासन की तरफ से कोई भी नुमाइंदा नहीं पहुंचा।

ये प्रदेश सरकारों का देश के वीर जवानों का घोर अपमान है। मै प्रधानमंत्री जी और प्रदेश के सभी सरकारों से निवेदन करता हूं कि शहीदों को उचित सम्मान दिया जाय और उनके परिवार के साथ न्यायो चित सहायता करने की एक स्पष्ट हो।

नीति तैयार हो जिससे उनके परिवार को समाज में सम्मान से जीने का अधिकार प्राप्त हो। यही शहीदों का सच्चा एवं ऊंचा सम्मान है।

वहीं हालत हमारे किसानों की है उनके साथ भी दोहरा रवैया अपनाया जा रहा है पूरे भारत में जितना कर्ज किसानों के ऊपर है उतना ही कर्ज कुछ रहीश लोगों द्वारा लिया गया है। बस फर्क सिर्फ इतना है कि किसान अपनी जान दे रहा है और रहीश अपने में मस्त है।

एक ही देश मे आखिर ये दोहरा रवैया क्यों? आखिर वो दिन कब आयेगा जब हिंदुस्तान के जवान और किसान खुश नजर आयेंगें। (जय हिन्द! जय भारत)

(लेखक हिन्दु-मुस्लिम एकता मंच के संस्थापक हैं।)

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