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आपके पसीने से अनलॉक होगा स्मार्टफोन का लॉक

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Pankaj Pandey

पंकज पाण्डेय

बिजनेस। अब तक फिंगरप्रिंट या फेसआई के जरिए ही स्मार्टफोन और अन्य इलैक्ट्रॉनिक डिवाइस अनलॉक हो पाती हैं। लेकिन, वैज्ञानिकों की मानें तो आने वाले वक्त में स्मार्टफोन और अन्य वियरेबल डिवाइसेज हमारे शरीर के पसीने से भी अनलॉक हो सकेंगी। बिल्कुल बायोमैट्रिक सिस्टम की तरह। अमेरिका के एक विश्वविद्यालय में यह नया तरीका वैज्ञानिकों ने प्रस्तावित किया है। इसमें पसीने के कारण अमीनो एसिड प्रोफाइल बनेगा, जो डिवाइस के मालिक के लिए अलग तरह का होगा

शोधकर्ताओं का कहना है कि इस प्रोफाइल को डिवाइस के साथ स्टोर किया जाएगा। हर बार डिवाइस को अनलॉकर करने के लिए पहचान के तौर पर इसी का इस्तेमाल होगा। एल्बने विश्वविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर जैन हैलमेक के अनुसार, हम सुरक्षा के एक नए तरीके का विकास कर रहे हैं, जो इलैक्ट्रॉनिक डिवाइस के लिए प्रमाणीकरण की प्रक्रिया को पूरी तरह बदल देगा।

पहचानकर्ता के तौर पर पसीने की नकल करना या हैक करना आसान नहीं होगा। इसके लिए पूरे प्रूफ दिखाने होंगे। त्वचा से निकलने वाले पसीने या स्राव में अनेक छोटे-छोटे मॉलेक्यूल और मेटाबॉलिट्स होते हैं। प्रमाण के लिए हर एक का विश्लेषण किया जएगा। इस प्रोफाइल को बनाने के लिए डिवाइस में सबसे पहले ‘मॉनिटरिंग पीरियड’ डालना होगा, जिसमें दिनभर के अलग-अलग समय पर आपके पसीने के स्तर को मापा जाएगा। एक बार जब प्रोफाइल बन जाएगा, तो आप डिवाइस को पकड़कर या पहनकर अपनी पहचान साबित कर सकेंगे।

ज्यादा सुरक्षित होगा यह तरीका…

यह नया तरीका पहचान के वर्तनाम तरीकों में न सिर्फ सुधार करेगा, बल्कि कुछ ऐसे विकलांग लोगों के लिए भी मददगार साबित होगा, जो शारीरिक अक्षमता के चलते फिंग्रप्रिंट से डिवाइस अनलॉक नहीं कर पाते। सबसे खास बात इसके लिए डिवाइस के मालिक को कोई पासकोड याद नहीं रखना होगा। डिवाइस को लॉक करने के बाद अनलॉक करने के वर्तमान तरीके पूरी तरह सुरक्षित नहीं हैं। पासकोड के चोरी होने या किसी के देखे जाने का डर होता है। कई बार फेस-आई भी उतनी प्रभावी नहीं होती। ऐसे में यह तरीका काफी सुरक्षित होगा।