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जाति आवासीय प्रमाण पत्रों के लिए तहसील कर्मचारी को देना पड़ रहा है नजराना

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Raghunandan Mehta

रघुनंदन कुमार मेहता

गिरिडीह। केन्द्र सरकार द्वारा जहां ग्रामीणों को हर सरकारी कार्यों के निष्पादन के लिए हर विभाग कोडिजिटल इंडिया के तहत ऑनलाइन किया जा रहा है। यहां तक की करोड़ों रूपये खर्च कर हर पंचायत सचिवालय को डिजिटल बनाया गया है। जिसके तहत पंचायत सचिवालय में पंचायत सचिव से लेकर राजस्व कर्मचारी, जन सेवक आदि पदाधिकारियों के लिए अलग अलग कार्यालय बनाया गया है।

जिससे ग्रामीणों को प्रखंड व जिला मुख्यालय के चक्कर लगाने से निजात मिल सके। जिसके तहत अन्य सरकारी कार्य के निष्पादन के लिए लोगों को जहां तहां भटकना नहीं पड़ेगा। लेकिन फिलहाल ऐसी स्थिती बन गयी है कि छात्र छात्राओं को जाति आय आवासिय प्रमाण पत्रों में राजस्व कर्मचारी की अनुशंसा के लिए अंचल मुख्यालय क्या आवास तक का चक्कर लगाना पड़ रहा है।

उसपर भी प्रमाण पत्रों में अनुशंसा के लिए राजस्व कर्मचारी को प्रसाद के तौर पर नजराना भेंट करना पड़ता है। नजराना नहीं देने पर आवेदन पर अनुशंसा तो कर दी जाती है, लेकिन प्रज्ञा केन्द्र में आवेदन कर देने के बाद उस ऑनलाइन आवेदन पर राजस्व कर्मचारी द्वारा अनुशंसा नहीं किया जाता है।

कुछ ऐसी हीं स्थिति बिरनी प्रखंड के हल्का नंबर आठ के आवेदकों को भुगतना पड़ रहा है। राजस्व विभाग द्वारा हल्का कर्मचारी के लिए द्वारपहरी में लाखों रूपये खर्च कर तहसील कार्यालय की स्थापना की गयी है।

लेकिन तहसील कार्यालय में अधिकांशतः दिन ताला हीं लटका रहता है। जिसके कारण छात्र-छात्राओं को द्वारपहरी से लगभग पचीस किमी की दूरी तय कर बिरनी पहुंचाना पड़ता है । उसपर भी हल्का कर्मचारी अंचल कार्यालय में मिलेगा या नहीं इसकी कोई भरोसा नहीं रहता है।