Krishna Devi

इस महिला ने कायम की इंसानियत की कई मिसाल, तीस सालों से कर रही है लावारिश लाशों को अंतिम संस्कार

0

कृष्णा देवी विधि विधान से यथोचित संस्कार के बाद कफन देकर लाश को अंतिम यात्रा के लिए विदा करती है…‎

तीस सालों से बिना थके लावारिश लाशों को अपने घर से विधि विधान के साथ अंतिम यात्रा पर विदा करती है…

Praveen Maurya

प्रवीण मौर्य

जनमंच विशेष (छत्तीसगढ़)। हम आपको एक ऐसी महिला से परिचय कराने ले जा रही है, जिसने समाज में इंसानियत की कई मिसाल कायम किये हैं। चाहे वो किसी भी क्षेत्र में क्यों ना हो। दरअसल सिम्स में जितने भी लावारिश लाश पोस्टमार्टम के लिए आते हैं। उन सभी को महिला शख्शियत वर्षों से अपने घर से पूरे विधि विधान के साथ अंतिम यात्रा पर विदा करते आ रही है।

हम बात कर रहे हैं एक ऐसी ही महिला शख्सीयत की जिसका नाम है कृष्णा देवी यादव। कृष्णा देवी यादव का घर सिम्स परिसर के पीछे में है। दरअसल कृष्णा देवी पिछले तीस साल से बिना थके लावारिश लाशों को अपने घर से विधि विधान के साथ अंतिम यात्रा पर विदा करती है। यह ऐसी महिला है जिसने कभी भी किसी गैर जात से गृणा नहीं किया है और ना ही कभी पूछा कि मरने वाला या वाली किस जाति या धर्म से है।

क्योंकि मरने वाले किसी जाति या धर्म के नहीं होते। अक्सर देखने में आया है कि अंतिम यात्रा में सभी धर्म और जाति के लोग शिरकत करते हैं। ऐसे में इस महिला शख्सीयत को इस बात का जरा भी परवाह नहीं है की लोग उसके बारे मेंं क्या सोचते हैं। उसे तो बस इस बात की परवाह रहती है कि अंतिम यात्रा में जाने वाले के सम्मान के खिलाफ किसी प्रकार की भूल से भी गुस्ताखी ना हो जाए। जब भी सिम्स से किसी महिला, पुरूष, युवक, युवती या बच्चों की लाश निकलती है। सबसे पहले कृष्णा मां को सूचना पहुंचती है।

कृष्णा देवी विधि विधान से यथोचित संस्कार के बाद कफन देकर लाश को अंतिम यात्रा के लिए विदा करती है। सिम्स कर्मचारी भी अपनी ड्यूटी समझ लाश को श्मशान घाट पहुंचाने से पहले कृष्णा दाई को बता देते हैं ताकि उन्हें मरने पर कफन नसीब हो। कहते हैं जिंदा आदमी नंगा रह सकता है मगर मुर्दे को कफन जरूरी है। कभी कभी तो एक दिन में लाशों की संख्या और विदाई कार्यक्रम की दो तीन रस्में हो जाती है। बावजूद इसके कृष्णा देवी तल्लीन होकर अपने दायित्वों का निर्वहन कर शव को अंतिम यात्रा के लिए विदा करती है।