रातोरात बनारस बना मास्को, कोहरे की चादर तान सोता रहा शहर, ठंड व गलन से जनजीवन प्रभावित

Varanasi Under Fog
Varanasi Under Dense Fog...
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हिमालय की हवा शीतलहरी बन पूर्वाचल पहुँच गयी है जिसके दो दिनों तक बने रहनें की उम्मीद है…

Shabab Khan
शबाब ख़ान (वरिष्ठ पत्रकार)

 

 

 

 

 

वाराणसी: शुक्रवार को बनारस की सुबह हड्डियों को कंपा देने वाली ठंड से शुरु हुई। घर का दरवाजा खोलकर देखा तो लगा मास्को पहुँच गये, मौसम ने कुछ ऐसी करवट बदली कि लोग ठंड व गलन से कंपकपा उठे। बाहर सिर्फ कोहरा और धुंध के अलावा कुछ भी दिखाई नहीं दिया। रोशनी तो थी लेकिन कुछ भी देख पाना संभव नहीं हो रहा था। आसमान से गिर रहे धुंध की चादर ने सब कुछ अपनी आगोश में ले लिया था। वाहन चालक जान पर खेलकर चीटीं की रफ्तार से चलते दिखे।

दोपहर बाद कोहरा कुछ छटा तब सूरज की किरणें धरती तक पहुंचीं। हालांकि किरणों में वो तेजी नहीं थी। सूरज भी ठंड के चलते कुछ अलसाए से दिखे। मौसम विभाग ने 24 घंटे में अधिकतम तापमान 19. 0 डिग्री सेल्सियस व न्यूनतम तापमान 11.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया।

सुबह ठिठुरा देने वाली ठंड से लोगों को दोपहर बाद कुछ राहत तब मिली जब सूरज ने दर्शन दिए लेकिन ठंड के आगे वह भी बेअसर दिखे। धूप का भी प्रभाव नहीं था। वहीं सुबह शुरू हुए कोहरे का कहर दोपहर तक बना रहा और धूप में भी कोहरे ने लोगों को परेशान किया।

शीतलहर के प्रकोप से जनजीवन अस्त व्यस्त रहा। आदमी तो ठंड से बचने के लिए कुछ न कुछ उपाय तो कर ही ले रहे हैं लेकिन मवेशी और पशु पक्षी बेहाल रहे। सड़कों पर चलने वालों का हाल यह रहा कि सड़क पर निकले तो कपड़ों में पूरी तरह कवर दिखे।

प्रसिद्ध मौसम एक्सपर्ट प्रो. एसएन पांडेय का कहना है कि पश्चिमी विक्षोभ के पीछे चलने वाली ठंडी हवा ने पूर्वाचल को घेर रखा है। हवा की गति भी सतह से लेकर साढ़े पांच किमी ऊपर तक तेज और उत्तरी पश्चिमी है। हिमालय की ओर से चली ठंडी हवा यहां तक पहुंच गई है। इसका असर दो दिनों तक बने रहने की पूरी उम्मीद है। उन्होंने कहा कि नमी कमजोर रहने के कारण फिलहाल बारिश के आसार नहीं बन रहे हैं।

पश्चिमी विक्षोभ के पीछे चलने वाला कोल्ड फ्रंट (ठंडी हवा का झोंका) पूर्वाचल तक पहुंचा है। वातावरण में फैले धूल के कणों पर यह नमी बैठ रही है जिससे कोहरे का घनापन बढ़ जा रहा है। अभी मौसम का मिजाज ऐसे ही बना रहेगा।

ठंड का असर दिखा बनारसी दिनचर्या में:

– घाटों से लेकर सारनाथ तक में घट गई सैलानियों की संख्या।

– सुबह-ए-बनारस की खासियत नहीं देख पा रहे हैं सैलानी।

– ट्रेन, बस से लेकर हवाई जहाज तक का संचालन प्रभावित है।

– मार्केट पर भी ठंड का प्रतिकूल असर दिखा।

-शराब की दुकानों पर शौकीनों की भीड़ देखी जा रही है।

-नगर निगम नें चौराहों पर अलाव के लिए फिलहाल लकड़ी नही गिराई है, लोग अपने जुगाड़ से टायर, प्लास्टिक, अखबार व टूटे फर्नीचर, खिड़की, दरवाजे जलाकर खुद को गर्म रखने की जुगत में देखे जा सकते है।

-ठंड का प्रकोप बढ़ते ही मोदी जी का बनारस को चौबीस घण्टे बिजली देने का वादा बिजली विभाग नें तोड़ दिया है। बिजली नही तो पानी नही, टंकी के पानी से नहाकर कोई बनारसी मरणोंपरांत वीरता पुरस्कार लेने के मूड मे नही है।


ठंड से टकराने की कोशिश न करें:

बच्चों को लेकर विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होती है। उन्हें कोल्ड डायरिया होने का खतरा होता है। उल्टी-दस्त, पीठ में अकड़न हो तो सीधे डाक्टरों से संपर्क करें।

अस्थमा मरीज घर के बाहर निकलने से पूरी तरह परहेज करें। घर से बाहर निकले तो अपने कान, सिर को अच्छे से करें कवर। थोड़ा दौड़ने के बाद पसीना आने पर गर्म कपड़ों को न उतारें। सर्दी जुकाम को हल्के में न लें और घरेलू उपचार करने की जगह तुरंत डाक्टर को दिखाएं।

और हाँ, ठंड का मज़ा भी लें, चाय की कपों के साथ वक्त बितायें, मूँगफलियों को नमक के साथ चबायें, चूड़ा-मटर का स्वाद लें। मगर कमरा बंदकर उसमें अंगीठी जलाने की गलती कभी न करें, ऐसा करनें वाले अगली ठंड का मज़ा नही ले पाएगें।

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