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किसानों के लिए अब दुश्मन बन चुकी हैं गाय और बैल

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Mithiliesh Pathak

मिथिलेश पाठक

श्रावस्ती। एक जमाना था जब गाय बैल देश के किसानो की सबसे बड़ी पूंजी होते थे। मशीनों के आने के साथ ही बैल बेकार हुए और अब तो गाय भी जब दूध देना बंद कर देती है, तो किसानों के लिए बेकार हो जाती है, लेकिन आज नौबत यहां तक आ गयी है कि गाय और बैल अन्नदाता कहे जाने वाले किसानों के दुश्मन बन गए हैं।

देखिये उत्तर प्रदेश के श्रावस्ती जिले से चौकानें वाली खास रिपोर्ट:-

आधी रात का वक़्त है, उत्तर प्रदेश के श्रावस्ती जिले के इकौना, गिलौला समेत लगभग पूरे जिले के ग्रामीण आम तौर पर इस वक़्त लोग गहरी नींद में होते है, लेकिन अब ग्रामीण युवा और बुजुर्ग आधी रात को जागते है। एक हाथ में डंडा और दूसरे हाथ मे टार्च लिए गांव के लोग अपने खेतों की पहरेदारी करने में जुटे हुए हैं, क्योकिं इनकी मेहनत पर कोई पानी फेरने की फिराक में लगा हुआ है।

अचानक खेतों की दूसरी तरफ़ कुछ हलचल होती है और पहरेदारी कर रहे किसान उसी तरफ दौड़ पड़ते है। अंधेरे का फायदा उठाकर एक पूरा झुंड किसानों की फसल चट करने के प्रयास में है, और यह है इलाके का लावारिश गोवंश।। जिन्हें किसान खेतों से निकालकर किस तरह सड़कपर खदेड़ रहा है वह तस्वीरें आप भी अपनी स्क्रीन पर देख सकते हैं।

यह गोवंश एक, दो, दस, बीस या सौ पचास नही इलाके में ऐसे हजारों गोवंश का झुंड तैयार हो गया है। जिनका कोई मालिक नही ठिकाना नही, इनमें कुछ ऐसे बैल हैं जो खेती किसानी में अब उपयोगी नही रहे ऐसी गाये हैं जो अब दूध नही दे रही। ऐसे में इनके खाने का खर्च जब किसानों पर बोझ बन गया तो किसानों ने इनको लावारिश छोड़ दिया हैं।

cow on road at night

Janmanchnews.com

जो अपने खाने के जुगाड़ में गांव- गांव जाकर खेतों पर धावा बोलती है। रात के अंधेरे में अधिकांश धावा बोला जाता है। जिसके चलते किसान की आधे घण्टे की लापरवाही महीनों की मेहनत पर पानी फेर देती है। इस लिए गांव के किसान रात रात भर जागकर खेतों की रखवाली में जुटे रहते हैं।

दिन के समय यह जानवर सड़कों को अपना ठिकाना बनाते है। जिनके कारण सड़क पर लगातार हादसे भी बढ़ते जा रहे हैं। हादसों का शिकार कभी व्यक्ति बनता है, तो कभी गोवंशीय जानवर।

किसानों ने अपने खेतों में बाकायदा मचान बना रखी है। जिससे दूर तक टार्च की रोशनी में निगाह दौड़ाई जा सके। भाजपा सरकार जिन किसानों का अपना हितैषी बता रही थी, उन्हीं किसानों का भाजपा सरकार से मोहभंग होता दिखाई पड़ रहा है। यह हम नहीं किसान खुद कह रहा, सुनिए किसान की जुबानी।

खैर यह तस्वीरें सिर्फ श्रावस्ती जनपद की ही नही आस पास के जिले, बलरामपुर, बहराइच, गोंडा आदि जिलों में भी यही तस्वीरें देखी जा सकती हैं।

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