देश की तरक्की के लिए आर्थिक और सामरिक क्षमता में विकास के साथ मानव विकास को भी आंकना जरूरी है: रविकांत तिवारी

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– 12 वें अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन प्रेस्टिज प्रबंधन और अनुसंधान संस्थान इंदौर मध्यप्रदेश में आयोजित हुआ…

– देश विदेश से सैकड़ों शिक्षाविदों, विशेषज्ञों और हज़ारों छात्र प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया…

Priyesh Kumar "Prince"

प्रियेश कुमार “प्रिंस”

नई दिल्ली। किसी भी देश की तरक्की को समझने के लिए आर्थिक और सामरिक क्षमता विकास के साथ साथ देश के मानव विकास को आंकना बहुत जरूरी है। क्योंकि लंबे परिदृश्य में मानव विकास ही आर्थिक और सामरिक क्षमताओं की सार्थकता सिध्द करता है। उक्त बातें आका वर्ड एल एल सी एवं इण्डिया ग्लोबल इंक यूएसए के सीईओ एवं सलाहकार सदस्य उपभोक्ता मामले व खाद्य वितरण मंत्रालय भारत सरकार रविकांत तिवारी ने 12 वें अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान इंदौर में बोलते हुए कहा।

मानव विकास की चर्चा करते हुए रविकान्त आगे कहते है कि जीवन प्रत्याशा, शिक्षा के स्तर और प्रति व्यक्ति आय संकेतकों का समग्र आंकड़ा है। जो मानव विकास के आधार पर देशों को रैंक करने में प्रयोग में लाया जाता है। जब किसी देश मे औसत जीवनकाल अधिक हो। शिक्षा स्तर उन्नत हो और प्रति व्यक्ति आय अधिक हो, तो उस देश का एच डी आई बेहतर माना जाता है।

Ravikant tiwari

File Photo: सलाहकार सदस्य उपभोक्ता मामले व खाद्य वितरण मंत्रालय भारत सरकार रविकांत तिवारी

2016 में जारी संयुक्त राष्ट्र मानव विकास रिपोर्ट के अनुसार 2015 में नार्वे मानव विकास के मामले में दुनिया का सबसे विकसित देश था। विश्व की आर्थिक व सामरिक महाशक्ति यूएसए 0.920 एच डी आई के साथ इस कतार में 10 वे नम्बर पर ठिठक गया। हालांकि 1980 में यूएसए का बेहतर प्रदर्शन था। विश्व शक्ति के रूप में चुनौती देने वाला चीन 2015 में 90 वा देश आंका गया था। अर्थात आर्थिक और सामरिक ताकतों को अर्जित करने के वावजूद चीन में लोगो का जीवन स्तर चिंतनीय है।

अपने भारत की स्थिति हाल में एच डी आई 0.624 है, जो विश्व मे 131 वा स्थान रखता है। भारत आर्थिक और सामरिक क्षेत्रों में अपनी शक्ति को जुटाने के लिए संघर्षरत है। पर यह भी नही भूलना चाहिए कि बिना मानव विकास की वास्तविकता के आर्थिक व सामरिक प्रगति दूरगामी साबित होगी।