मुंह बोली बहन-भाई के रिश्ते को शर्मसार करने वाले, भाई को 10 साल की जेल

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Janmanchnews.com
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Anil Upadhyay
अनिल उपाध्याय

देवास। अपर जिला एंव सत्र न्यायालय खातेगॉंव के सत्र प्रकरण क्रमांक 335/2015 राज्य शासन द्वारा पुलिस थाना खातेगॉंव विरूद्ध विनोद के प्रकरण में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश माननीय श्री मनोज तिवारी ने आरोपी विनोद पिता भूरेलाल निवासी पिपलदा तहसील कन्नौद हाल मुकाम ग्राम खल तहसील खातेगॉंव को भारतीय दण्ड विधान की धारा 363, 366, 376(2)(एन) एवं लैंगिक अपराधों से बालकों का सरक्षण अधिनियम 2012 की धारा 6 में दोषी पाते हुए 10 वर्ष का सश्रम कारावास की सजा एवं 14,000/- रूपये के अर्थदण्ड से दण्डित किया गया।

घटना का संक्षिप्त विवरण…

अपर लोक अभियोजक गिरधर गोपाल तिवारी ने बताया कि अभियोक्त्री के पिता गणपत द्वारा अपनी पुत्री अभियोक्त्री की गुम हो जाने के संबंध में दिनांक 14.07.2015 को थाना खातेगॉंव में आकर सूचना की तथा उसी दिन शाम 6 बजे प्रथम सूचना दर्ज कराई की वह ग्राम बरछा में रहता है और 3 वर्ष से कचरू पटेल निवासी खल वाले के यहॉं नौकर(हाली) का काम करने के कारण उसी के खेत पर बने मकान में परिवार सहित निवास करता है तथा अभियोक्त्री व पत्नि गॉंव में खुली मजदुरी करते है, आरोपी विनोद ने अभियोक्त्री को 2 वर्ष पहले बहन बना लिया था।

आरोपी विनोद ग्राम खल के ही रामदेव पटेल के यहॉं नौकर (हाली) का काम करता था और वह अभियोक्त्री के घर आता जाता रहता था। सूचना दर्ज कराने के एक दिन पहले दिनांक 13.07.2015 को अभियोक्त्री ग्राम खल में चल रहे स्कूल निर्माण में मजदुरी करने गयी थी वहॉ आरोपी शाम 6 बजे पहुॅंचा तथा मजदुरों की छुट्टी होने के बाद उसने अभियोक्त्री को बहलाया फुसलाया व विवाह का लालच देकर भगा ले गया और तलाश करने पर अभियोक्त्री व आरोपी विनोद नही मिले।

इस पर से थाना खातेगॉव पर अपराध क्रमांक 529/15 पर कायम किया गया उसके पश्चात पुलिस खातेगॉंव द्वारा दिनांक 14.07.2015 को 18 बजे अभियोक्त्री को ग्राम खल से दस्तयाव किया गया व अभियोक्त्री का चिकित्सा परीक्षण कराया गया, और आरोपी को गिरफतार कर अभियोग पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया, प्रकरण अपर सत्र न्यायालय में चलने योग्य होने से सत्र प्रकरण क्रमांक 335/2015 दर्ज किया गया।

प्रकरण से संबंधित साक्षीयो के कथन न्यायालय में कराये गये जिससे यह प्रकट हुआ की आरोपी द्वारा अभियोक्त्री मुंह बोली बहन होने के विश्वासिक संबंधों का दुरूपयोग करते हुए उसकी मॉ द्वारा बुलाया जाने का कहकर अपने साथ बहलाकर ले गया व अभियोक्त्री के साथ जबरदस्ती शारीरिक संबंध दो बार स्थापित किये जिसमें अभियोक्त्री की कहीं भी कोई सहमति नहीं थी तथा अभियोक्त्री की आयु घटना के समय 18 वर्ष से कम थी ऐसी स्थिति में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री मनोज तिवारी ने अपने निर्णय में प्रतिपादित किया गया कि महिलाओं के प्रति ऐसे अपराधो में लगातार बढोत्तरी हो रही है, ऐसे आरोपी के लिये दण्ड के प्रश्न पर नम्रता रखना समाज के लिये व्यापक हित में नहीं है, यदि ऐसे आरोपी को कठोर दण्ड से दण्डित नहीं किया गया तो समाज पर विपरित असर पडेगा तथा आरोपी को प्रोत्साहन मिलेगा।

तदपश्चात अपने निर्णय में आरोपी विनोद पिता भूरेलाल निवासी पिपलदा तहसील कन्नौद हाल मुकाम ग्राम खल तहसील खातेगॉव को भारतीय दण्ड विधान की धारा 363, 366, 376(2)(एन) एवं लैंगिक अपराधो से बालको का सरक्षण अधिनियम 2012 की धारा 6 में दोषी पाते हुए 10 वर्ष का सश्रम कारावास की सजा एवं 14,000/- रूपये के अर्थदण्ड से दण्डित किया गया और आरोपी को जैल वारंट बना कर जैल भेजा गया। अपील अवधि समाप्त होने के पश्चात अभियोक्त्री को क्षतिपूर्ति के रूप में रूपये 12,000/- अक्षरी बारह हजार प्रदान किया जावे राज्यशासन की और से पैरवी अपर लोक अभियोजक गिरधर गोपाल तिवारी ने की।

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