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Dhai Kangoora Mosque

इतिहास से भी पुरानी जिन्नातों की मस्जिद के नाम से विख्यात बनारस की ढ़ाई कंगूरा मस्जिद

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फिलहाल ढाई कंगूरा मस्जिद की उम्र का कोई पुख्ता सबूत नही है…

–ताबिश अहमद

वाराणसी: यहां 1400 साल पुरानी एक ऐसी मस्जिद है, जिसका इत‍िहास अमेरिका, बांग्लादेश और साऊथ अफ्रीका तक की लाइब्रेरी में मौजूद है। अक्सर विदेशी रिसर्चर यहां आते हैं अपनी खोज के अनुसार यहां एक पिलर को ढूंढते है, जिस पर शायद इस मस्जिद का इतिहास दर्ज है। लेकिन, पेंट‍िंग की वजह से आज तक ये सि‍र्फ एक राज ही बना हुआ है।

जिन्नातों वाली मस्जिद के नाम से मशहूर है ये जगह…

काशी के आदमपुर थानान्तर्गत चौहट्टा लाल ख़ान मुहल्ले में ये मस्जिद ढाई कंगूरा मस्जिद या जिन्नातों वाली मस्जिद के नाम से मशहूर है। लोगों की मानें तो 86 पिलर्स पर टिके मस्जिद के एक पिलर पर इसका राज छि‍पा है कि इसे कब, क‍िसने और कैसे बनवाया था।

लोग बताते है कि “हमने अपने पूर्वजों से सुना है कि यह मस्जिद 1400 साल पुरानी है। इसको जिन्नातों ने ढाई दिन में ही बना दिया था, इसलिए इसे ढाई कंगूरा की मस्जिद भी कहा जाता है।”

मस्जिद के ऊपर और मेन गेट पर पत्थरों से फारसी भाषा में हिजरी (इस्लाम‍िक कैलेंडर) का 2 नीम (फारसी में नीम आधे को कहते हैं) यानि ढाई लि‍खा है। इसके अनुसार, ये ढाई हिजरी का बना हो सकता है और इस समय 1439 हिजरी चल रही है।

इसकी बनावट में लगे विशाल पत्थर और विशाल बुर्जों को देख अपने आप लगता है कि इसे किसी साधारण इंसान ने नहीं बनाया होगा। इसके अंदर प्लेन सीढ़ि‍या बनी हैं, जिसकी संख्या 9 है, इतनी ऊंची सीढ़ि‍या फिलहाल प्रदेश के किसी मस्जिद में नहीं है।

इसमें छत से भी नमाज करने की व्यवस्था है, बाहर से किसी किले के तरह बनी यह मस्जिद अपने आप में नायाब कला का अद्भुत  नमूना है।

बनारस के लोगों के मुताबित ”इस मस्जिद में रुहानी ताकतें यानि जिन्नों का साया है। इनकी शान में कोई गुस्ताखी नहीं कर सकता। इनसे मांगी मुरादें पूरी होती है, इसलिए यहां लोग आते है।”

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