dholpur blood camp

सोशल मिडिया के सदुपयोग से प्रसव महिला को मिला रक्त, हिन्दू-मुस्लिम एकता की अनूठा उदाहरण बना रक्तदान

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रक्त दान करके मिलती है एक अलग सी उर्जा: कमल ठाकुर…

Omprakash Varma

ओमप्रकाश वर्मा की रिपोर्ट,

धौलपुर: देश के कई इलाकों में भले ही हिन्दू-मुस्लिम झगडे होते हो, और कुछ लोग सोशल मिडिया पर जाति-धर्म के नाम पर तथ्यहीन टिप्पणी कर आपस में देश भाव फैलाते हो। लेकिन धौलपुर में सोशल मिडिया हिन्दु-मुस्लिम को आपस में जोड़ने का काम कर रही है। इससे दोनों धर्मों के लोग एक-दूसरे की मदद कर रहे है ऎसा ही एक मामला शुक्रवार को सामने आया।

मामला यह है कि धौलपुर जिले के बाडी कस्बे के कसाईपाडा निवासी हीना पत्नी वकील मुस्लिम, प्रसव पीडा होने पर जिले के डा. मंगल सिंह सामान्य चिकित्सालय धौलपुर में भर्ती कराया। लेकिन चिकित्सकों ने डिलीवरी के समय रक्त की कमी बताई। हीना का रक्त ग्रुप A- होने के कारण ब्लड बैंक में नहीं मिल पा रहा था।

इस पर शिवनगर धौलपुर निवासी सोशल वर्कर कमल ठाकुर ने 24×7 Blood Help Dholpur नाम से अपने वाट्सएप और फेसबुक पर रक्त की जरूरत का मैसेज डाल दिया। ये मैसेज ग्वालियर में जॉब करने वाली धौलपुर निवासी स्वेता ने पढ लिया व मैसेज में दिये गये मोबाइल पर सम्पर्क किया।

बात होने के बाद मुस्लिम महिला हीना की मदद के लिए तुरन्त ग्वालियर से रवाना होकर करीब 2 घंटे में जिला अस्पताल धौलपुर पन्हुची। हालांकि चिकित्सकों ने स्वेता का बजन कम बताते हुए ब्लड लेने से इंकार कर दिया। इस पर गडरपुरा धौलपुर निवासी राजकुमार पुत्र बंगाली शर्मा ने हीना को ब्लड दिया इस तरह हीना के परिजनों ने न केवल आभार जताया बल्कि जिले की हिन्दू-मुस्लिम एकता को देश में अनूठा उदाहरण बताया।

इनका कहना है….

कमल ठाकुर: इनका कहना है कि “मैं इसलिए रक्तदान करता हूँ गरीब, असहाय व निर्धन व्यक्तियों के चहरे की मुस्कुराट से एक अलग सी उर्जा मिलती है और ब्लड उपलब्ध कराने का जोश भी। और कहा कि “ जब किसी और के खून से बचती है, किसी अपने की जान, तब समझ में आता है क्या होता है रक्तदान।

blood donar

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स्वाती: इनका कहना है कि “हम करोडों है फिर भी खून की कमी हैं क्योंकि देना कोई नहीं सभी लेना ही चाहते है। मैं जानती हूँ मेरे रक्तदान करने से ये दुनिया नही बदल सकती लेकिन किसी एक कि दुनिया जरूर बदल सकती है।

राजकुमार शर्मा: इनका कहना है कि प्रत्येक युवा को रक्तदान करने के लिए आगे आना चाहिए और रक्तदान करने से शरीर में नया रक्त बनता है। इसलिए तीन माह में एक बार रक्त अवश्य दान करें।