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ग्रामीणों ने खुद हटाए अतिक्रमण, पक्के निर्माण तोड़कर चौड़े किए रास्ते, हांसई गांव बना मिसाल

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Omprakash Varma

ओमप्रकाश वर्मा

धौलपुर। सूबे के बाड़ी गांव हांसई में “सोच बदलो, गांव बदलो” टीम से प्रेरित होकर गाँव हांसई के सभी ग्रामीणों व युवाओं ने संगठित होकर ये निर्णय लिया कि हम अपने गांव के विकास में सभी बाधाओं को दूर करेंगे।

इसी क्रम में कुछ दिन पहले गांव के युवाओं और कर्मचारियों ने एक आम सभा की जिसमें सबसे बड़ी समस्या गांव के रास्तों की थी गांव में मात्र 8-9 फ़ीट की गलियां थी और सभी पक्के मकान थे। अतः ये कार्य बहुत ही कठिन था। क्योंकि लगभग 50 कच्चे और पक्के मकान टूट रहे थे लेकिन इसके बावजूद सभी ग्रामवासियो ने रास्ता चौड़ा करने का निर्णय लिया।

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अब तक हंसाई गांव में रास्ता चौड़ा करने काम जारी है और लगभग सत्तर प्रतिशत कार्य हो चुका है। जिसमें ज्यादातर ग्रामीणों ने बढ़-चढ़ कर अपने पक्के मकानों को तोड़ना शुरू कर दिया है। गांव के ही छोटे लाल सरपंच जी ने अपनी पक्की दीवार को तोड़कर पीछे हटाया। इसी क्रम में रामबाबूमीना, केशव, रामपति, राजेंद्र, रामजीत, अमरसिंह, मोहन, सुक्का, राधेश्याम, मुन्ना, सुगनलाल, हीरासिंह, हीरालाल, प्रभु मीना, हरी, धर्मा, रामसिंह, भवानी, रामसिंह, रामखिलाड़ी, लक्ष्मीनारायन, रामसुत आदि अन्य ग्रामीणों ने रास्ते को चौड़ीकरण में सहयोग किया।

हांसई गांव की ये छोटी सी शुरुआत गांव में एकता और भाईचारा बढ़ाने के भी कार्य कर रही है। “सोच-बदलो, गांव बदलो” टीम के साथी देवेंद्र सिंह ने आज गांव में लोगों की जागरूकता का अवलोकन किया और पाया कि वास्तविकता में यहाँ लोग पूरे जिलेे में हटकर कार्य कर रहे है। जहां प्रशासन अतिक्रमण हटाने में नाकाम रहता है।

वहाँ हांसई के लोगों ने निश्वार्थ भाव से अपनी जमीनों से रास्ते चोड़े कर रहे है। हंसाई गांव में शहरों से अच्छी सफाई देखने को मिली। हांसई के कुछ युवाओं का कहना है कि गाँव के रास्ते बड़े होंगे तो हमारी सोच भी बड़ी होगी। जिसमें आगामी “सोच बदलो, गांव बदलो” टीम की 17 फरवरी को गांव में होने वाली मीटिंग पर चर्चा हुई। इस मीटिंग में रामनाथ जी, साहब सिंह, दीवान, मांगीलाल, नारायणसिंह, रामदयाल, लाखन सिंह, ज्ञानसिंह, अनूप शर्मा, मोहन मीना आदि अनेक नागरिकों ने भाग लिया।