पूर्व-मध्य रेलवे में मौत के मुआवज़े के नाम पर बड़ा घोटाला, बड़ा होता जा रहा है बीजेपी की नाव में छेद

पूर्व-मध्य
Another Scam unearthed in East Central Railways in the name of Death Claims to Victims' families...
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रेल दुर्घनाओं में पीड़ित या उसके परिवार को मिलने वाले क्लेम की रकम में बड़ी हेराफेरी…

Shabab Khan
शबाब ख़ान (वरिष्ठ पत्रकार)

 

 

 

 

 

हाजीपुर: भारत में हर क्षेत्र में एक के बाद एक घोटाले लगातार सामनें आते जा रहे हैं। विजय माल्या, सहारा, नीरव मोदी, ललित मोदी, लालू यादव जैसे घोटालेबाजों की सूची बढ़ती जा रही है, ऐसा लगने लगा है जैसे भारत एक घोटालेबाजों का देश है, जिसको जहां मौका मिला अपनी जेबें भरने में लगा गया।

ताजा मामला पूर्व-मध्य रेलवे से जुड़ा है। सार्वजनिक क्षेत्र में भारतीय रेल से बड़ा कोई विभाग नहीं है. यह विभाग पूरे भारतवर्ष को हर तरह के महत्वपूर्ण कार्य से जोड़ता है। भारत में पिछले कई सालों में कई बड़े घोटाले सामनें आनें के बाद सोचनीय है कि क्या वास्तव में भारत घोटाले का देश बन गया है।

सूत्रो से मिली खबर के अनुसार पूर्व मध्य रेलवे के क्लेम ट्रिब्यूनल में यात्रियों की मौत पर मिलने वाले मुआवजे (डेथ क्लेम) के नाम पर बड़ी हेराफेरी का मामला उजागर हुआ है। सितंबर 2015 से अगस्त 2017 के बीच ट्रेन से गिरे या फिर कटने से होने वाली मौतों पर मिलने वाली मुआवजे की राशि में यह घोटाला किया गया है। इस वित्तीय गड़बड़ी का पता तब चला जब दिल्ली से कैग (सीएजी) की ऑडिट टीम जांच करने ट्रिब्यूनल पहुंची।

ऑडिट में पता चला कि दो साल में मुआवजे के संबंध में जितने भी आदेश जारी किए गए हैं, उनमें अधिसंख्य मामलों में भुगतान करने का आदेश मिलने के बाद जांच रिपोर्ट भेजी जाती थी। मनमर्जी का आलम यह था कि घटना बेगूसराय की है तो जांच रिपोर्ट बक्सर रेल पुलिस द्वारा भेजी जाती थी। रेलवे क्लेम ट्रिब्यूनल की ओर से सितंबर 2013 से जुलाई 2015 के बीच लगभग दो वर्ष में 789 मामलों का निष्पादन किया गया। वहीं सितंबर 2015 से अगस्त 2017 तक लगभग दो साल में 2564 मामलों का निष्पादन किया गया।

इस दौरान लगभग 151 करोड़ का भुगतान किया गया। 100 से अधिक मामलों में दोबारा क्लेम पर भुगतान कर दिया गया। ऑडिट टीम की ओर से जब इस पर सवाल उठाए गए तो आनन-फानन 80 लोगों से चार करोड़ रुपये की राशि वसूल की गई।

क्या है इस खेल का राज़

कोई यात्री जब ट्रेन से गिरकर या कटकर मरता है तो सबसे पहले स्टेशन प्रबंधक की ओर से जीआरपी को मेमो दिया जाता है। इसके बाद जीआरपी शव पोस्टमार्टम के लिए भेजती है। अधिकांश मामलों में जीआरपी जांच रिपोर्ट शीघ्र सौंप देती है। मरने के 60 दिनों के बाद रेलवे क्लेम ट्रिब्यूनल में क्लेम के लिए मृतक के परिजन की ओर से आवेदन दिया जाता है। मृतक के पहचान पत्र के साथ ही परिजन को बैंक खाता नंबर देना पड़ता है। सभी कागजातों की जांच की जाती है। ट्रिब्यूनल की ओर से जांच के लिए आरपीएफ को कहा जाता है। आरपीएफ की ओर से जांच रिपोर्ट भेजे जाने के बाद ही मुआवजा दिया जाता है।

सितंबर 2015 से अगस्त 2017 के दौरान ऐसे अधिकांश मामलों में आरपीएफ की ओर से जांच रिपोर्ट भेजने के पहले ही मुआवजा देने का आदेश ट्रिब्यूनल की ओर से दे दिया गया। अधिसंख्य मामलों में आरपीएफ की ओर से ट्रेन से कटने की पुष्टि नहीं किए जाने के बावजूद भुगतान का आदेश जारी कर दिया गया।

कई मामलों में देखा गया है कि आवेदक आवेदन देते समय बैंक खाता क्षेत्र का देते हैं, लेकिन ट्रिब्यूनल से मुआवजे का आदेश पारित होने के बाद पार्टी के अधिवक्ता की पहचान पर एक ही बैंक में दोबारा खाता खोला जाता है, उसी खाते में भुगतान किया जाता है। भुगतान होने के तीन दिन में ही पूरी राशि निकाल ली जाती है। कुछ दिन बाद फिर उसी मामले में दूसरे को आवेदक बना फिर से मुआवजा उसी बैंक से ले लिया जाता है, सौ से अधिक मामलों में ऐसा किया गया है।

बड़ी बात तो यह है कि पिछले दो साल के दौरान सारे मामलों में मात्र पांच ही बैंक की शाखाओं में खाता खुलवाकर भुगतान किया गया है। वहीं पांच ही अधिवक्ता सारे मामलों में पैरवीकार हैं। नियमानुसार प्रत्येक दिन न्यायालय की सुनवाई के दौरान कंप्यूटर में केस वाइज इंट्री की जाती है।

केवल अगस्त 2017 की इंट्री पर गौर करें तो सुनवाई के लिए कोई भी मामला प्रस्तुत नहीं किया गया है, लेकिन उस माह अकेले 137 मुकदमों का निष्पादन किया गया। ट्रिब्यूनल में डबल बेंच एक न्यायपालिका तो दूसरी रेलवे के तकनीकी सदस्य की होनी अनिवार्य है, परंतु पिछले दो साल से अकेले एक ही बेंच से निर्णय सुनाया गया।

अब देखना यह है कि PNB से यह घोटाला छोटा है या बड़ा? यह सारे कार्य किस अधिकारियों के आदेश के हिसाब से हुआ है यह तो जांच का विषय है और आपको पता ही है की जांच की रिपोर्ट आने में वर्षो लग जाते हैं। तो क्या हमेशा की तरह फिर से दस-पंद्रह वर्ष इस मामले की जाँच में खपा दिये जाएगें। जो भी हो लगातार खुलते घोटालों से बड़े-बड़े दावों की नाव पर सवार बीजेपी सरकार की नाव में छेद बड़ा होता जा रहा है, यदि ऐसा चलता रहा तो आने वाले लोकसभा चुनाव में बीजेपी का डूबना तय है।

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