Muslim Women

यहां दुआ करता हर मुसलमान – या खुदा, दे दे कब्रिस्तान…

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Betab Ahmad

बेताब अहमद

विशेष। सुनने में अजीब लगती है यह बात, लेकिन सौ फीसदी सच है. हमारे देश में एक गांव ऐसा भी है जहां का हर मुसलमान अपनी दुआओं में खुदा से कब्रिस्तान मांगता है.

यूपी के आगरा जिला मुख्यालय से लगभग 3० किलोमीटर दूरी पर है ‘छह पोखरा’ गांव. इस गांव में करीब 35 मुस्लिम परिवार रहते हैं. सभी मजदूरी का काम करते हैं. गांव में मुस्लिम परिवारों की आबादी करीब 200 की है. लेकिन यहां एक भी कब्रिस्तान नहीं है. मजबूरी में गांव के मुसलमान अपने मृतकों का अंतिम संस्कार, याने दफनाने का काम अपने घरों के बाहर ही करते हैं.

अंधविश्वास का साया…

लोगों का मानना है कि कब्र की वजह से उनके घर के बच्चों को शैतान पकड़ लेता है. इसके बाद वह झाड़फूंक के चक्कर में फंसते हैं. नूरबानो के घर के बाहर ससुर हुसैन खान की कब्र है. नूरबानो बताती हैं कि उनकी 18 साल की बेटी रजिया पिछले तीन साल से बीमार है और कोई दवा का असर नहीं होता है.

इस कारण अब झाड़फूंक का इलाज चल रहा है. यहीं पड़ोस की रहने वाली बेबी के घर में एक कथित तांत्रिक उसकी 16 साल की बेटी मुमताज का झाड़फूंक के जरिए इलाज कर रहा था. घर के युवक लाल खान ने बताया कि गांव में कब्रिस्तान न होने के कारण उनके परिवार का कोई मरता है तो उन्हें घर के बाहर दफनाते हैं. अब कोई रूह अच्छी होती है और कोई शैतान. घर के काम करने और निकलने पर पैर लग जाता है, जिससे ऊपरी चक्कर हो जाते हैं. इसी कारण कई घरों के बच्चे वर्षों से बीमार हैं.

कब्रिस्तान की दुआ…

पिछले 60 सालों में यहां 50 से अधिक मुस्लिमों की मौत हुई है और उन्हें घर के बाहर ही दफनाया गया है. गांव पोखर के किनारे बसा है और बारिश में पोखर में पानी चढ़ने के कारण कब्रें धंस कर खत्म भी हो जाती हैं. दूसरे गांव का कब्रिस्तान लगभग लगभग 16 किलोमीटर दूर है. वहां तक शव ले जाना मुसीबत से कम नहीं, ऊपर से दूसरे गांव के लोग बाहर वालों को अपने यहां शव दफनाने नहीं देते. इसीलिए यहां का हर मुसलमान जब भी दुआ मांगता है, तो यह दुआ जरूर करता है कि गांव में एक कब्रिस्तान बन जाए.