लोन की किस्त जमा नही कर पाया किसान तो रिकवरी एजेंट्स नें चढ़ा दिया ट्रैक्टर

किसान
Recovery Agents of L&T Finance Company forcefully Seized the tractor, and farmer in a bid to stop them crushed to death...
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किसान नें ट्रैक्टर खरीद के वास्ते लिया था 5 लाख का लोन, जिसमे से 4 लाख वह जमा कर चुका था

Shabab Khan
शबाब ख़ान (वरिष्ठ पत्रकार)

 

 

 

 

 

सीतापुर: उत्तरप्रदेश की राजधानी लखनऊ से 80 किलोमीटर दूर सीतापुर में असंवेदनहीनता का ज्वलंत मामला सामने आया है। देख सुनकर अफसोस और आक्रोश दोनो दिलो-दिमाग पर हावी होने लगते है कि आज के न्युक्लियर युग में भी किसान वैसे ही परेशान है जैसा आजादी से पहले था। पहले लगान न देने पर अंग्रेज़ जमीन छीन लेते थे, अब लोन की किस्त जमा न करनें पर किसान की जान ले लिया जाता है।

किसान की बदहाली का एक ऐसा ही मामला सीतापुर जिले का है, जहां फाइनेंस कम्पनी के कर्मचारी एक किसान की जान सिर्फ इसलिए ले लेते हैं, क्योंकि वह मात्र 99 हजार रुपए का ऋण नहीं चुका पाता है। यह हालत उस देश और प्रदेश की है, जहां की करीब 75 फीसदी आबाद कृषि पर आधारित है।

प्रदेश के सीतापुर के महमूदाबाद क्षेत्र के भउरी गांव निवासी दलित किसान ज्ञानचंद्र (45) की ट्रैक्टर के नीचे कुचल कर हत्या कर दी गई। पुलिस ने बताया कि किसान ज्ञानचंद्र ने साल 2015 में एल एंड टी फाइनेंस कंपनी से पांच लाख रुपए का लोन लिया था, जिसमें से चार लाख रुपए दिसंबर 2017 तक चुका दिए थे और बाकी पैसे भी जल्द ही चुकाने की बात कही थी। ज्ञानचंद्र की पत्नी ज्ञानवती ने बताया कि उसके पति ने इस साल जनवरी की शुरुआत में भी 35,000 रुपए कम्पनी को दिए थे, लेकिन फिर भी कम्पनी ने रिकवरी नोटिस जारी कर दिया।

फाइनेंस कम्पनी के एजेंट्स बाकी रकम लेने के लिए ज्ञान के घर पहुंचे थे। मृत किसान के भाई ओमप्रकाश ने बताया कि उस वक्त किसान ज्ञानचंद्र खेत में काम कर रहा था। फाइनेंस कम्पनी के एजेंट्स सीधे खेत पहुंचे और ज्ञानचंद्र से मौके पर ही पैसे चुकाने का दबाव बनाने लगे, एजेंटों ने किसान को धमकी भी दी कि या तो पैसे चुका दो वरना ट्रैक्टर जब्त कर लिया जाएगा। इस पर ज्ञानचंद्र ने कहा कि वह जनवरी के आखिरी तक 65,000 रुपए दे देगा। इस पर भी एजेंट्स नहीं माने और जबरदस्ती ट्रैक्टर की चाबी छीन ली और ट्रैक्टर लेकर चल दिये।

मृत किसान के भाई ने बताया कि एजेंट्स को ट्रैक्टर ले जाने से रोकने के लिए किसान ज्ञानचंद्र ट्रैक्टर के बोनट से लटक गया और ट्रैक्टर न ले जाने को लेकर मिन्नतें करने लगा। इसके बावजूद एजेंटों ने ट्रैक्टर को नहीं रोका। इस दौरान अचानक किसान ज्ञानचंद्र का हाथ बोनट से फिसल गया और वह ट्रैक्टर के नीचे आ गिरा, जिससे किसान ज्ञानचंद्र की मौके पर मौत हो गई। इस घटना से गुस्साए ग्रामीणों ने विरोध प्रदर्शन किया।

इसके बाद जिला और पुलिस प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी गांव पहुंचे और मामले की जांच करने का आश्वासन दिया तब कहीं जाकर गांववालों ने धरना खत्म किया। मृतक के भाई की तहरीर पर पुलिस ने इस मामले में पांच एजेंटों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है। लेकिन मामला यहाँ खत्म नही हो जाता।

पुलिस को पता है कि एजेंट एल एंड टी फॉयनेंन्स कंपनी के थे और वो वही कर रहे थे कि जो उनसे कहा गया होगा। पांच में से चार लाख जमाकर चुकने के बावजूद किसान की कमाई का जरिया छीन कर ले जाना कहाँ तक उचित है लेकिन जाहिर है कंपनी की पॉलिसी ही ऐसी रही होगी कि एजेंट को ट्रैक्टर जब्त करना पड़ा। ऐसे में मुकदमा एजेंट पर तो हो लेकिन कंपनी पर भी 304A के तहत कार्यावाही होना चाहिए। इसके अलावा कंपनी को किसान के परिवार को इतना मुआवजा तो देना ही चाहिए जिससे उनको आर्थिक दिक्कतों का सामना न करना पड़े।

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