देर रात हुये हमले ने जवानों को संभलनें का मौका नहीं दिया, पाँच जवान शहीद, दो आंतकी ढ़ेर

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रात के अंधेरे में बैरल ग्रेनेड लांचर और अन्य स्वाचलित हथियारों से लैस फ़िदाईन शिविर में घुस गये, 14 घण्टे चली मुठभेड़…

Shabab Khan
शबाब ख़ान (वरिष्ठ पत्रकार)

 

 

 

 

 

श्रीनगर: जिला मुख्यालय से 30 किलोमीटर दूर पुलवामा जिले के अवंतीपोरा क्षेत्र के लेटपोरा में भारी हथियारों से लैस जैश-ए-मोहम्मद के आतंकवादियों द्वारा सीआरपीएफ शिविर में रविवार को सुबह के शुरूआती घंटों में किये गये हमले में पांच जवान शहीद हो गये और दो आतंकवादी मार दिये गये। गोलाबारी में घायल चार जवानों की मौत हो गई जबकि शिविर में पांचवें जवान की मौत हार्ट अटैक से हुयी।

जवाबी कार्यवाही करते हुये सेना ने दोनों जैश ए मोहम्मद से संबंधित आंतकियों को मार गिराया, जबकि शिविर के पास एक इमारत में छिपा अांतकी रविवार देर शाम तक सुरक्षा बलों पर गोलियां चलाता रहा। इससे पहले की सुरक्षा बल उसे मार गिराते वो किसी तरह इमारत से निकल भागा और बल के हाथ नही आया। एक अन्य चौथे आंतकी के होने की भी संभावना जताई जा रही है जो उसी इलाके में कहीं छिपा हुआ है। सुरक्षा बलों ने पूरे इलाके को सील करके तालाशी अभियान शुरु कर दिया है।

मारे गये सभी अांतकी और संभवता दो जीवित आतंकवादी भी कश्मीरी हैं। पाकिस्तान स्थित आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है।

जैश को हाल ही में भारी झटके का सामना करना पड़ा, जब चार दिन पहले, उसके शीर्ष आतंकवादी नूर मोहम्मद तन्त्रे उर्फ ​​नूर त्रैली को सुरक्षा बलों ने मार गिराया था। सूत्रों ने बताया कि जैश के हमले का उद्देश्य त्रैली की हत्या का बदला लेने का था। नवंबर में, संगठन के तीन आतंकवादी मारे गए – उनमें से तलहा रशीद जो जैश प्रमुख अजहर महमूद का भतीजा था।

जम्मू-कश्मीर के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) ने कहा, “पिछले दो-तीन दिनों से एक इनपुट था कि आतंकी (हमला करने के लिए) कोशिश कर रहे थे, शायद वे मौका नही पा रहे थे। एसपी वैद ने रविवार को संवाददाताओं से कहा कि सभी आतंकवादी स्वचालित हथियार और ग्रेनेड से लैस थे। पुलवामा में सीआरपीएफ के 185 बटालियन के प्रशिक्षण केंद्र की परिधि बाड़ को तोड़ने से पहले उन्होंने रविवार सुबह 2 बजे ग्रेनेड फेकें और अंधाधुन फायरिंग की।

सीआरपीएफ के एक प्रवक्ता ने बताया कि एक जवान, बड़गाम जिले के नोगाम छादुरा के सैफुद्दीन ग़नी की मौके पर ही शहादत हो गई जबकि तीन जवान बाद में गोलाबारी नें घायल होनें के बाद उपचार के दौरान शहीद हो गए। सीआरपीएफ के महानिरीक्षक रविदीप साही ने कहा कि रात में अचानक शिविर में भारी सशस्त्र पाकिस्तानी फिदाइन (आत्मघाती दस्ते) ने प्रवेश किया, जिसने कर्मियों को आश्चर्यचकित किया, उन पर ग्रेनेड फेंका गया और उन पर गोली चलाई गई। “यह 2017 के आखिरी दिन पाकिस्तानी आतंकवादियों द्वारा एक घातक फिदाइन हमला था। हमारे लड़कों में से पांच ने श्रीनगर-जम्मू राजमार्ग पर छावनी पर हमले को निष्प्रभावी करने के लिए अपनी जिंदगी कुर्बान कर दी,” आईजी साहसी ने कहा।

आंतकियों के कश्मीरी होनें को ज्यादा तूल न देते हुये वैद ने बताया कि कश्मीरी लड़कों द्वारा आंतकवादी संगठनों में शामिल होने की संख्या बहुत कम हो गयी है। उन्होने बताया कि पत्थरबाजी के मामलों में 2016 और 2017 में 5500 नौजवानों को गिरफ़्तार किया गया था, जिसमें से 4300 को सरकार नें माफ कर दिया, बाकी लड़के भी हमारी नजर मे हैं जिन्हे भविष्य में माफी दी जा सकती है।

वैद ने बताया कि 75 कश्मीरी युवकों को हमने किसी आंतकवादी संगठन मे शामिल होने से रोका, जबकि 7 युवक जो संगठन में शामिल हो चुके थे उन्होने उसे छोड़ दिया और अपनें परिवार में वापस अा गये।

जैश ने लोकल मीडिया को दिये एक बयान में कहा है कि “शहीदों के लहु का असर दिखाई देने लगा है। तलहा रशीद, मोहम्मद भाई, कमांडर नूर मोहम्मद तांत्रे और दूसरे जो शहीद हुये वो लावारिस नही थे।” बयान में और अधिक हमले करनें की धमकी भी दी गयी है।

रविवार को मारे गये आंतकियों की पहचान मंज़ूर अहमद बाबा पुत्र अली मोहम्मद बाबा निवासी द्रबगम पुलवामा और फरदीन अहमद खंदे पुत्र गुलाम मोहम्मद खंदे निवासी नजीन पोरा ट्राल के रुप में हुयी है।

shabab@janmanchnews.com

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