विशेष: शिक्षक के अभाव में विद्यालय में अध्ययनरत 1507 छात्र-छात्राओं का भविष्य अधर में लटका

Giridih govt school
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Raghunandan Mehta
रघुनंदन कुमार मेहता की रिपोर्ट…
गिरिडीह। राज्य सरकार द्वारा बालिका शिक्षा स्तर को उपर उठाने व ग्रामीण क्षेत्रों के गरीब मजदूर के बच्चे-बच्चियों को सुलभ तरीके से उच्च शिक्षा दिलाने के लिए उच्च विधालयों को अपग्रैड कर पल्स टू का दर्जा दे दिया गया है। लेकिन बड़ी दुर्भाग्य की बात तो यह है कि राज्य सरकार जिस उद्धेश्य के लिए विधालयों को अपग्रैड कर पल्स टू का दर्जा दिया है वह कारगार साबित नहीं हो रहा है।

कुछ ऐसी हीं स्थिति जमुआ अंचल क्षेत्र के पल्स टू उच्च विधालय चरघरा का हो गया है। जहाँ कक्षा नौ से बारहवीं तक शिक्षा ग्रहण करने के लिए छात्र छात्राओं की संख्या 1507 है लेकिन शिक्षक मात्र पाँच है। उससे भी रौचक की बात तो यह है कि कक्षा नौ व दसवीं के छात्र छात्राओं को गुणवता पुर्ण शिक्षा देने के लिए मात्र एक इतिहास का शिक्षक हैं। जो विद्यालय के प्रभारी प्राचार्य भी हैं। अब आप इसी से अनुमान लगा सकते हैं कि विधालय में अध्यनरत छात्र छात्राओं का भविष्य कितना सुरक्षित है।

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जबकि राज्य सरकार झारखंड के शिक्षा स्तर को उपर उठाने के लिए नित्य लम्बी चौडी कसीदें पढी जा रही है। लेकिन आज भी शिक्षक के अभाव में छात्र छात्राओं का भविष्य अधर में लटका हुआ है। जिसे देखने वाला कोई नहीं है। वहीं पल्स टू के लिए जहां विज्ञान, कला व वाणिज्य के छात्र-छात्राऐं अध्यनरत है जिसे शिक्षा देने के लिए पाँच शिक्षक कार्यरत हैं। वह भी एक डॉ. विमलेन्दू कुमार जो भाषा के शिक्षक है और राजधनवार से इस विधालय में प्रतिनियोजीत हैं।

वहीं विज्ञान के लिए दिनेश रजक, इतिहास के लिए उदय कुमार यादव, भुगोल के लिए विभूति भुषण व अर्थशास्त्र के लिए संजय कुमार नियूक्त हैं। जबकी वाणिज्य के लिए विधालय को एक भी शिक्षक नसीब नहीं हुआ है। जबकी इस विधालय में नवीं व दसम के लिए आठ शिक्षकों की यूनिट है। जबकी मात्र एक शिक्षक कार्यरत हैं।

वहीं पल्स टू के लिए 11 शिक्षक के साथ तीन प्रयोगिक सहायक का पद सृजित है। लेकिन वर्तमान समय में मात्र पांच है शिक्षक कार्यरत हैं। छः कमरे में बैठते हैं पंद्रह सौ छात्र छात्राऐं। इस विधालय में अध्यनरत छात्र-छात्राओं के लिए सबसे बड़ी दुर्भाग्य की बात तो यह है कि विद्यालय है पल्स टू का और कमरा मध्य विधालय से भी कम है। विद्यालय में अध्यनरत छात्र-छात्राओं को एक साथ एक बैंच पर छः लोगों को बैठकर शिक्षा ग्रहण करना पडता है। अध्यनरत छात्र छात्राओं द्वारा बताया जाता है कि नजदीक में दुसरा कोई विधालय नहीं रहने के कारण हमलोगों को विधालय में बैठकर शिक्षा ग्रहण करने भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

प्रायोगिक कक्ष की नहीं है व्यवस्था…

विधालय में प्रायोगिक सहायक व कक्ष नहीं रहने के कारण बारहवीं में अध्यनरत विज्ञान के छात्र-छात्राओं को प्रयोगशाला का लाभ नहीं मिल रहा है। जिसके कारण विज्ञान के छात्र-छात्राओं का भविष्य गांव पर लगा रहता है। विधालय के कमरा को प्रभारी प्राचार्य द्वारा प्रयोगिक कक्ष तो बना दिया गया लेकिन संसाधन के अभाव में लाभ नहीं मिल रहा है।

इन गावों के छात्र-छात्राओं का नहीं हो रहा है नामांकन…

सबसे दुखःद की बात तो यह है कि मेरखोगुंडी, पिण्डराबाद, बलगो, रूपीडीह, हाडोडीह व बाघमारा गाँव के छात्र व छात्राऐं आठवीं के बाद आगे पढ़ना चाहती हैं। लेकिन विधालय में शिक्षक व भवन की कमी रहने के कारण नामांकन नहीं हो पाने के स्थिति में बीच में हीं शिक्षा बंद कर देना पड़ रहा है। सोमवार को इन गाँवों से नामांकन के लिए विधालय पहुँचे छात्र-छात्राओं द्वारा बताया जाता है कि विधालय के प्रभारी प्राचार्य द्वारा कहा जाता है कि तुमलोग चितरडीह विधालय में नामांकन कराओं यहीं नामांकन नहीं ले सकता हुँ। जबकी सुरक्षा के अभाव के कारण चितरडीह विधालय में नामांकन कराना मुनासिब नहीं है। ऐसी स्थिति में हमलोगों का शिक्षण कार्य बीच में हीं बंद कर देना पड़ेगा।

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विद्यालय का कार्यालय कक्ष हो गया है जर्जर….

इधर आज भी भवन के अभाव के कारण विधालय का कार्यालय कक्ष जर्जर भवन में संचालित किया जा रहा है। बरसात के शुरू होते हीं विधालय के छत से पानी रिसाव होना आरम्भ हो जाता है। इस पुराने भवन के चारों बगल द्वार में दरारें पड़ गयी है जो कभी भी धारासाही हो सकता है। जिसके कारण कार्यालय कक्ष में बैठकर कार्य निष्पादन करना लोगों के लिए खतरे से कम नहीं है। बावजूद शिक्षा विभाग मौन साधे हुई है।

क्या कहते हैं प्रभारी प्राचार्य…

इधर इस संबध में प्रभारी प्राचार्य द्वारा बताया जाता है विधालय में जिस अनुपात में छात्र-छात्राओं का नामांकन होता है। उसके अनुरूप विधालय में भवन, शिक्षक, प्रयोगशाला आदि की व्यवस्था नहीं है। जिससे विभाग को कई बार अवगत कराते हुए विधालय में शिक्षक, भवन आदि की मांग किया गया है। मैं विधालय का नाम नहीं बताया चाहता हुँ। जिले में कुछ ऐसे भी विधालय हैं। जहाँ शिक्षक का भरमार है लेकिन बच्चें नहीं हैं।

अगर वैसे विद्यालयों से इस विद्यालय में शिक्षक का प्रतिनियोजन हो जाता तो काफी हद तक शिक्षक की समस्या से निजात मिल सकती थी। लेकिन ऐसी नहीं हो रहा है। जिसके कारण में नामांकन लेना बंद कर दिया हुँ। अगर विधालय में शिक्षक का प्रतिनियोजन हो जाऐ तो नामांकन लेना आरम्भ कर दिया जाएगा।- महेन्द्र प्रसाद वर्मा, प्रभारी प्राचार्य पल्स टू उच्च विधालय, चरघरा

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