LEDA Panchayat

उप विकास आयुक्त के स्थानंतरण के साथ हीं अनाथ हो गया लेदा

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9 फरवरी को बड़ी हीं ताम झाम के साथ कार्यक्रम का आयोजन कर उप विकास आयूक्त ने ली थी लेदा पंचायत को गोद….

पंचायत की चहुमुखी विकास की लोगों में जगी थी उम्मीद….

रघुनंदन कुमार मेहता की रिपोर्ट, 
गिरिडीह। 9 फरवरी 2018 को सदर प्रखंड के अति संवेदनशील क्षेत्र लेदा पंचायत में तत्कालिन उप विकास आयुक्त किरण पासी द्वारा विकास मेला का आयोजन कर ग्रामीणों को हर तरह कि सुविधा उपलब्ध कराने के लिए जिले के तमाम विभागों को एक मंच पर लाकर  ग्रामीणों के बीच उत्साह का माहौल उत्पन कर दिया गया था।

ग्रामीणों की उत्साह ओर दोगुनी हो गयी जब आयोजित विकास मेला कार्यक्रम में उप विकास आयुक्त महोदया द्वारा लेदा पंचायत को गोद लिए जाने की घोषणा कर हर विभाग को पंचायत के चहुमुखी विकास के लिए सर्वेक्षण करने का निर्देश दिया गया था। जिसके तहत पंचायत में सड़क, शिक्षा, स्वास्थ, पेंशन, पेयजल, बिजली आदि सुविधाएें सुदृढ़ करने की बात कही गयी थी। जिसके तहत हर माह सभी विभागों के साथ पंचायत में बैठक कर पंचायत के विकास की रूप रेखा तैयार करने की बात कही थी।

जिसके तहत लेदा व सिंदवरिया पंचायत के ग्रामीणों को पाईप लाईन के माध्यम से शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए लेदा ग्रामीण पेयजल आपूर्ति योजना के तहत लगभग साढ़े तेरह करोड़ की लागत से जल मीनार निर्माण की आधार शिला रखी गयी। लेकिन अब तक उसका निर्माण कार्य भी आरम्भ नहीं हो सका है।

वहीं उप विकास आयुक्त महोदया द्वारा कोवाड कोडरमा सड़क मार्ग पर स्थित कुरूमडीहा से लेदा तक सड़क मार्ग के निर्माण को लेकर डीपीआर तैयार करने से लेकर कृषि विज्ञान केन्द्र के विशेषज्ञ को क्षेत्र में कृषि कार्य को बढ़ावा देने पर कार्य करने का निर्देश दिया गया था। जिससे पंचायत के ग्रामीणों को यह लगाने लगा था कि आजादी के बाद से पिछड़ा लेदा पंचायत में अब विकास की गंगा बहेगी। लेकिन उप विकास आयुक्त के स्थानंतरण के साथ हीं उनके द्वारा ग्रामीणों को दिखाया गया सपना सपना हीं बन कर रह गया है।

क्या कहते हैं पंचायत प्रतिनिधि…

इधर लेदा पंचायत की मुखिया कंचन देवी के अनुसार बताया जाता है कि डीडीसी मैम द्वारा लेदा में विकास मेला का आयोजन कर पंचायत को गोद तो ले लिया गया। लेकिन उनके स्थानंतरण के बाद किसी भी पदाधिकारीऔं ने पंचायत की सूध भी नहीं ली है। पदाधिकारीयों को इस तरह ग्रामीणों को सब्जबाग दिखाकर सपने को चकनाचूर नहीं करना चाहिए।

इससे ग्रामीणों के बीच पदाधिकारी के प्रति गलत संदेश जाता है। वहीं पंसस बसंत बर्मा ने क्षोभ प्रकट करते हुए बताया की विकास मेला के दौरान पंचायत के सैकडों वृद्ध महिला व पुरूषों ने पेंशन कि स्वीकृती के लिए आवेदन जमा किया। लेकिन अब तक उसका कोई फलाफल सामने नहीं आया है।