चुनाव से पहले सियासी गरमी…’भोजपुरी स्टार निरहुआ’ भी लगाएंगे राजनीति का ठुमका, उम्मीदवार बनाएगी सपा!

फोटो: दिनेश लाल यादव निरहुआ
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Priyesh Kumar "Prince"
प्रियेश कुमार “प्रिंस”

गोरखपुर। गोरखपुर उप-चुनाव को जीतने के लिए समाजवादी पार्टी लगातार रणनीति बना रही है। पार्टी सूत्रों की मानें तो सपा गोरखपुर में एक भोजपुरी स्टार को संसदीय चुनाव लड़ाने जा रही है। हालांकि पार्टी का कोई भी जिम्मेदार अभी इस पर मुंह खोलने को तैयार नहीं है। बावजूद इसके सपा उम्मीदवार के रूप में ‘निरहुआ’ के सामने आने की चर्चा जोरों पर है। पार्टी कार्यकर्त्ताओं में हो रही सुगबुगाहट के मुताबिक दो-तीन दिनों में इसके नाम की घोषणा की जा सकती है।

पिछले कुछ दशकों से गोरखपुर संसदीय सीट गुरु गोरक्षनाथ के पास थी, लेकिन महंत योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद यहां होने वाले उपचुनाव को लेकर गुणा-गणित होने लगा है। सभी पार्टियां अपने-अपने भावी उम्मीदवारों के चयन में जुट गयीं है। संगठन की ओर से आने वाले नामों में से जिताऊ उम्मीदवार का चयन चलाने लगा है। इसी बीच सपा के कार्यकर्ताओं में हो रहे सुगबुगाहट ने राजनैतिक सरगर्मी बढ़ा दी है। भोजपुरी सिने स्टार निरहुआ को प्रत्याशी बनाये जाने के कयास लगाने जाने लगे हैं।

सूत्रों के अनुसार सपा इस भोजपुरी सुपरस्टार के भरोसे चुनावी बैतरणी पार करने की उम्मीद संजोने लगी है। पार्टी के कार्यकर्ताओं में इसकी सुगबुगाहट होने लगी है, लेकिन भी जिम्मेदार अपना मुंह खोलने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है।

सूत्र बताते हैं कि सपा मुखिया और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव खुद भी इसमें रुचि दिखा रहे हैं। इससे भोजपुरी सुपरस्टार दिनेश लाल यादव उर्फ निरहुआ में उम्मीदवार बनाये जाने का रास्ता लगभग साफ है।

फिर आसान नहीं है राह….

समाजवादी पार्टी भले ही निरहुआ पर दांव लगाना उचित समझ रही हो, लेकिन यह राह आसान नहीं है। यह बात सही है कि दावेदारों की लिस्ट में सबसे ऊपर चल रहे ‘दिनेश लाल यादव उर्फ निरहुआ’ के गोरखपुर समेत पूर्वांचल में काफी फैन हैं, लेकिन योगी आदित्यनाथ के फॉलोवर्स और हिन्दू युवा वाहिनी और भाजपा के समर्पित कार्यकर्ताओं की भी कमी नहीं है। यहां हिंदुत्व समर्थक लोगों की अच्छी-खासी संख्या योगी और भाजपा को काफी मजबूत करने वाला कारण है।

भाजपा को करना होगा गंभीर प्रयास…

राजनैतिक विश्लेषकों की मानें तो भारतीय जनता पार्टी को भी चुनौती का सामना करना पड़ सकता है। अगर निरहुआ को सपा ने अपना उम्मीदवार बनाया चुनाव काफी रोचक हो सकता है। युवाओं का एक बड़ा तपका भाजपा से अलग होकर सपा से जुड़ सकता है। इसकी फिल्मी स्टाइल युवाओं को आकर्षित कर सकती है। इसलिए भाजपा को सपा के इस निर्णय से दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए भाजपा और मंदिर को अपना गढ़ बचाने को अधिक मेहनत करनी होगी।

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