शहीद मेरे भगवान है, शहीद स्थल ही मेरा मंदिर है और इनकी शहादत का सम्मान ही मेरी पूजा है: रविकांत तिवारी

Ravikant Tiwari
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चौरी-चौरा काण्ड: इतिहास का एक लावारिस पन्ना…

इतिहास के गुमनाम पन्नो में दर्ज शहीदों की शहादत के सम्मान के लिए लड़ता एक क़िरदार…

Priyesh Kumar "Prince"
प्रियेश कुमार “प्रिंस”

गोरखपुर: फरवरी माह की 4 तारीख़ थी। आज ही के दिन 1922 में गोरखपुर जनपद के चौरी-चौरा में एक ऐतिहासिक घटना हुई थी। जिसमें 23 सिपाहियों को थाने के अंदर जला दिया गया था। इस काण्ड के 172 आरोपियों में से 19 लोंगो को फाँसी दे दी गई और शेष आरोपियों को क़ैद। भारतीय इतिहास में यह घटना “चौरी-चौरा कांड” के नाम से जाना जाता है।

इस घटना के बाद चौरी-चौरा का नाम इतिहास के पन्नों में तो दर्ज हो गया। लेकिन शहीदों की शहादत कई दशकों तक गुमनाम और उपेक्षित रही। फिर 1982 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने चौरी-चौरा के शहीदों की स्मृति में शहीद स्मारक की नींव रखी। और फिर एक दशक बाद 1993 में प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव ने लोकार्पण कर शहीदों को सच्ची श्रद्धांजलि दी।

आज चौरी-चौरा में शहीद स्मारक ख़ुद अपनी दुर्दशा और उपेक्षा पर रो रहा है। शहीद स्थल वीरान और बंजर सा हो गया है। स्वच्छता अभियान के इस दौर में शहीदों का यह स्मारक गंदगी के ढ़ेर में तब्दील हो गया है। यहाँ का संग्रहालय और इसमें लगी शहीद सपूतों की मूर्तियां कबूतरों का आशियाना बन कर रह गया है। आज यह संग्रहालय कम चिड़िया घर ज्यादा दिखता है।

शहीद स्मारक और संग्रहालय कई सालों से घुप्प अँधेरे में डूबा हुआ है। क्योंकि बिजली का बिल बाकी होने के चलते शहीदों को अँधेरे में रहने की सजा काटनी पड़ रही है। सरकार और प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार शहीदों की स्थली शहीद स्मारक आज भी अपने शहीदों के सम्मान के लिए एक फूल और टिमटिमाते दिये के लिए तरस रही है।

शहीद ही मेरे भगवान है, शहीद स्थल ही मेरा मंदिर है और शहीदों की शहादत का सम्मान ही मेरी पूजा है: रविकांत

जब शहीदों की शहादत और इनकी उपेक्षा का दर्द सहा नहीं गया तो शहादत की वर्षगांठ पर कार्यक्रम में सम्मिलित होने आए केंद्र सरकार के उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय में नवनियुक्त सलाहकार रविकांत तिवारी शहीद स्थल की दुर्दशा देख मातहतों पर विफ़र पड़े।

विडियो में देखें….

शहीदों की शहादत के वर्षगांठ पर स्मृति स्थल की उपेक्षा बरदाश्त नहीं हुई। शहीदों की शहादत को याद करते हुए रुंधे हुए गले से रविकांत कहते है कि ये शहीद हमारे पूर्वज है और यही मेरे भगवान है। यह स्थली ही मेरा मंदिर है और इनकी शहादत का सम्मान ही मेरी पूजा है। हम ऐसे इनकी उपेक्षा नहीं कर सकते। रविकांत ने लोगों से अपील कि हमें इन शहीदों के इतिहास को जानना चाहिए और प्रेरणा लेनी चाहिए। तभी जाकर हम अपनी आने वाली नस्लों को अपने इन पूर्वजों के इतिहास की वीर गाथा को बता सकेंगे।

एक जानकारी देते हुए रविकांत ने बताया कि अभी हाल ही में वर्तमान उत्तर प्रदेश सरकार के मुख्यमंत्री महंथ आदित्यनाथ ने चौरी-चौरा शहीद स्थल को आदर्श शहीद स्मारक के रूप में विकसित करने घोषणा की है। जब कि केंद्र सरकार ने अपने बजटीय घोषणा में अलग से बजट मुहैया कराने की बात कही है। शहीदों और इनके परिवारों के साथ-साथ शहीद स्थल के प्रति अपनी जबाबदेहि तय करते हुए बड़े ही गर्व के साथ रविकांत तिवारी अपनी प्राथमिकताओं को गिनाते हुए कहते हैं कि आज से इस शहीद स्थल के रख रखाव सफाई के साथ-साथ इसके सौंदर्यीकरण तथा विजली और पानी की व्यवस्था के लिए सरकार के सामने शिद्दत के साथ अपनी बातों को रखूंगा।

मेरी यह अब पूरी कोशिश होगी कि चौरी चौरा शहीद स्थल एक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित हो ताकि यहाँ के लोगों को रोजगार भी मिले और हमारे इतिहास को भी देश दुनिया और समाज के लोग जाने। जो शहादत इतिहास के पन्नो में गुमनाम हो गयी है उसे दुनिया के नक़्शे पर पुनः स्थापित करना ही मेरी शहीदों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि और इबादत होंगी।

Ravikant Tiwari
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शहादत दिवस के वर्षगाँठ पर रविकांत ने खुद अपने हाथों से झाड़ू लगाकर शहीद स्थल की सफाई की और विनम्र श्रद्धांजलि देते हुए शहीदों की याद में हजारों दिए जलाकर दीपांजलि दी।

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