भारत बंद: एक माँ का सवाल मेरे बेटे की मौत का जिम्मेदार कौन

SC ST Act protest day
Janmanchnews.com
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Sarvesh Tyagi
सर्वेश त्यागी

ग्वालियर। 2 अप्रैल को हुए भारत बंद के दौरान भड़की हिंसा अब धीरे धीरे शांत हो रही है, परन्तु इसके दौरन जो जख्म मिले वो सालों तक रहेंगे, ऐसा ही एक जख्म जबर सिंह के परिवार को मिला जो हिंसा बाले दिन बाज़ार में सामान लेने गया और उपद्रवियों का शिकार हो गया, उसकी लाश सड़क पर पड़ी रही, लोग उसकी लाश को कुचलते हुए आगे बड़ रहे थे, तथा पत्थरबाजी कर रहे थे। पता नहीं लोंगो में मानवता कहा चली गई जिसके के लिए भारत देश जाना जाता है।

एससी-एसटी एक्ट में बदलाव के विरोध में सोमवार को रखे गए भारत बंद के दौरान ग्वालियर-चंबल अंचल में आंदोलनकारियों ने जमकर उपद्रव किया। फायरिंग, पथराव आैर फिर पुलिस के लाठीचार्ज में 7 लाेग मारे गए। जबकि 175 से ज्यादा घायल हुए। मुरार इलाके के कुम्हरपुरा में सोमवार सुबह हिंसा की शुरूआत हुई। मुरार में 150 उपद्रवी मुरार मेटरनिटी होम में पहुंचे और ऑपरेशन थिएटर में तोड़फोड़ कर दी। उस समय यहां दो महिलाअों के ऑपरेशन डॉ. गीता को करने थे। विरोध करने पर युवकों ने डॉक्टरों से भी अभद्रता की। वार्ड में कब्जा कर लिया। उपद्रवियों ने मुरार थाने के बाहर एक बाइक, मुरार गर्ल्स कॉलेज के पास एक कार और 3 बाइकों को आग लगा दी।

दादाजी की तेरहवीं के लिए सामान खरीदने आया था, किसी ने गोली चला दी…

सोनी गांव निवासी जबर सिंह 40 वर्ष पुत्र श्रीराम के दादाजी का निधन कुछ दिन पूर्व हो गया था। उनकी तेरहवीं के लिए जबर सिंह मेहगांव सामान खरीदने आया था। इसी बीच उपद्रवियों ने हंगामा कर दिया। जबर सिंह कुछ समझ पाता तब तक किसी ने गोली चला दी जो जबर सिंह को लगी और वह गिरा पड़ा। भीड़ उसके शरीर को रोधते हुए आगे दब रहे थे, भीड़ के जाने के बाद  जबर सिंह को घायल देख साथ आए लोग उसे इलाज के लिए जेएएच लेकर आए, जँहा उसकी मौत हो गई।

उसके परिजन अब यह सवाल पूछ रहे हैं कि इसकी मौत का जिम्मेदार कौन, परंतु इसका जबाब किसी के पास नही है। क्योंकि सूत्र बताते है कि 2 अप्रैल को भारत बंद में न तो किसी एक इंसान ने अपील की थी बस सोशल मीडिया के दौरन फैली खबर इतना विशाल रूप ले लिया।

इस घटना के सरकार भी काफी हद तक जिम्मदार है, जिसने समय समय जातिवादक भड़काऊ वयान देते रहने पर एक समाज विशेष के अंदर ही अंदर नफरत भर दी, अगर समय रहते सरकार भारत बंद की घटना को रोकने की कोशिश करता तो शायद इतनी बड़ी घटना ने होती और इसके दौरन 8 लोंगो की गई जान बच जाती।

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