Vidla Hospital

विडला के नाम से महशूर अस्पताल बन्द होने की कगार पर

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Sarvesh Tyagi

सर्वेश त्यागी

ग्वालियर। बीआईएमआर हॉस्पिटल की आर्थिक स्थिति अब बुरी तरह से लड़खड़ा गई है। करोड़ो के बैंक कर्ज से दबे इस हॉस्पिटल के पास अब अपने स्टाफ को तनख्वाह देने के लिए भी पैसे नहीं है। बात सुनने में अजीब लगती है, लेकिन हकीकत कुछ यही है। खबर है कि स्टाफ का वेतन देने के लिए भी बीआईएमआर हॉस्पिटल को बैंक से लोन लेना पड़ रहा है।

बताया जाता है कि इस हालत के पीछे दिल्ली में बैठने वाले ट्रस्ट के चेयरमेंन श्री मंडेलिया के गलत फैसले है। हॉस्पिटल की इस हालत को देख आज बीआईएमआर हॉस्पिटल के चिकित्सक व स्टाफ लामबंद हो गए।

डॉक्टरों ने कहा बिना सीईओ चलाएगे हॉस्पिटल…

अगर ऐसा ही चलता रहा तो बीआईएमआर हॉस्पिटल जल्द बंद हो जाएगा। इस हालत को देखते हुए आज बीआईएमआर हॉस्पिटल के डॉक्टर लामबंद हुए। डॉक्टर व अन्य स्टाफ प्रबंधन से मिला और कहा कि इस हॉस्पिटल को बचाने के लिए अब वह बिना सीईओ के काम करेंगे। खर्चे कम हो इसके लिए आज बीआईएमआर हॉस्पिटल के पूर्व डायरेक्टर डॉ. एसबीएल श्रीवास्तव की अध्यक्षता में एक कमेटी का भी गठन किया गया है। यह कमेटी हर रोज होने वाले खर्चो की मॉनीटरिंग करेगी।

सस्ते इलाज का भरोसा देकर मंहगा किया इलाज…

बीआईएमआर हॉस्पिटल ट्रस्ट द्वारा संचालित होता है। इस हॉस्पिटल को शुरू किया गया था तब ग्वालियर के लोगों को भरोसा दिलाया गया था कि उन्हे यहां पर सस्ता और अच्छा इलाज मिलेगा। काफी लम्बे वक्त तक हॉस्पिटल का ये दावा और वादा दोनों कायम भी रहा, लेकिन कुछ वर्षों में इस हॉस्पिटल में इलाज करा पाना आर्थिक रूप से सामान्य वर्ग और खासकर गरीब लोगों के लिए किसी सपने की तरह बन गया है। मजबूरन भर्ती होने वाले गरीब मरीजों को उधार लेकर या फिर अपनी संपत्ति बेचकर इलाज कराना पड़ रहा है।

महंगा इलाज फिर भी हालत खस्ता…

हर इलाज को मंहगा करने के बाद भी बीआईएमआर हॉस्पिटल की हालत खस्ता है। असल में इसके पीछे ट्रस्ट द्वारा गलत फैसले लेना बताए जा रहें है। बताया जाता है कि हॉस्पिटल के मूल मकसद को भुलाकर सुविधाओं के नाम पर इलाज मंहगा किया और जिन लोगों व चिकित्सको की बदौलत इस अस्पताल ने नाम कमाया उन्हे किनारा कर दिया गया। बताया जाता है कि वर्तमान बीआईएमआर हॉस्पिटल के सीओ का वेतन लगभग 5 लाख रूपए है।