Aadhar

आधार नहीं दिखाने पर इलाज नहीं होने से कारगिल शहीद की विधवा ने दम तोड़ा

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Pankaj Pandey

पंकज पाण्डेय

हरियाणा (सोनीपत)। इमरजेंसी रोगी की इलाज पहले जरूरी है या फिर आधार कार्ड? आज यह सवाल आपसे इसलिए कर रहें है क्योंकि यहाँ एक अस्पताल में इलाज के लिए आए एक गम्भीर मरीज का इलाज आधार कार्ड की मूल प्रति नहीं रहने के कारण शुरू नहीं हो पाई और ससमय इलाज नहीं मिल पाने के कारण उसने दम तोड़ दिया।घटना गुरुवार की है।

एक मरीज को सिर्फ इसलिए अस्पताल प्रबंधन ने भर्ती नहीं किया, क्योंकि उसके पास आधार कार्ड की मूल प्रति नहीं थी। इलाज करवाने के लिए साथ आया बेटा बारबार मोबाईल में सेव आधार कार्ड दिखा रहा था लेकिन अस्पताल प्रबंधन ने उसकी एक नही सुनी। इलाज में देर होने की वजह से महिला रोगी दम तोड़ दी। खास बात यह की दम तोड़ देने वाली महिला कारगिल शहीद की विधवा थीं।

बीमार मां को अस्पताल लेकर पहुंचा शहीद का बेटा गिड़गिड़ाता रहा, लेकिन निजी अस्पताल का प्रबंधन आधार कार्ड जमा करवाने पर अड़ा रहा। आधार कार्ड की कॉपी मोबाइल में दिखाने के बावजूद वे नहीं माने।

महलाना गांव निवासी लक्ष्मण दास कारगिल युद्ध में शहीद हुए थे। उनकी पत्नी शकुंतला कई दिनों से बीमार थीं। बेटा पवन कई अस्पतालों में उन्हें लेकर गया था। बाद में जब शहर स्थित आर्मी कार्यालय में गया तो वहां उन्हें पैनल में शामिल शहर के  निजी अस्पताल ले जाने को कहा गया।

पवन मां को लेकर अस्पताल में पहुंचे तो वहां उनसे आधार कार्ड मांगा। पवन ने मोबाइल में मौजूद आधार कार्ड का फोटो दिखाया व आधार कार्ड नंबर बताया मगर अस्पताल प्रबंधन नहीं पसीजा और पुलिस बुला ली।

पुलिस भी बेटे को ही धमकाने लगी। मां की लगातार बिगड़ती हालत देख परेशान बेटा दूसरे अस्पताल भागा लेकिन इलाज में देरी की वजह से शहीद की पत्नी ने दम तोड़ दिया।

पवन का आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन ने उसकी मां का इलाज करने के बजाय उसे बाहर निकालने के लिए पुलिस बुला ली। अस्पताल प्रबंधन भी मान रहा है कि मौके पर पुलिस बुलाई गई थी। हालांकि, उनका कहना है कि युवक को हंगामा करता देख पुलिस बुलाई गई थी।

पवन का आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने उनकी सुनने की बजाय उन्हें धमकाना शुरू कर दिया। दूसरी ओर, अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि अस्पताल में इलाज न होने पर परिजन हंगामा करते। हम इलाज करने के लिए तैयार थे लेकिन परिजन मरीज को इमरजेंसी वार्ड से बाहर ले गए। दूसरे अस्पताल में ले जाते समय महिला की मौत हुई है। अस्पताल पर लगाए जा रहे आरोप निराधार हैं।

अस्पताल के अपने कुछ नियम कानून हैं। जिन्हें हमें मानना पड़ता है। पेपर वर्क पूरा करना पड़ता है। कोई मरीज गंभीर हालत में है तो तुरंत उसे दाखिल किया जाता है, उसका इलाज शुरू किया जाता है।