धरोहर

विश्वनाथ मंदिर परिक्षेत्र में मकानों को न बेचने की अपील

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विश्वनाथ मंदिर प्रशासन द्वारा आसपास के घरों को खरीदकर ध्वस्त करनें के प्रयास का विरोध जारी, पीएम के जाते ही धरोहर समिति ने तेज किया अभियान, घर-घर जाकर किया जनसंपर्क…

Tabish Ahmed

ताबिश अहमद

 

 

 

 

 


वाराणसी: काशी की धरोहर बचाओ समिति ने प्रधानमंत्री का कार्यक्रम समाप्त होते ही एक बार फिर अपना अभियान तेज कर दिया है। मंगलवार को समिति ने प्रभावित इलाकों में व्यापक जनसंपर्क अभियान चलाया। बाद में इस कार्यक्रम में साझा संस्कृति मंच के साथी भी शामिल हो गये। समिति और मंच के लोगों ने स्थानीय नागरिकों से अपना भवन न बेचने की और किसी से भी न डरने की अपील की।
धरोहर

People from ‘Dharohar’ NGO distributing Hand Bill requesting not to sell their homes to Kashi Vishwanath Mandir Nyas…

गौरतलब है कि सोमवार को समिति की हुई बैठक में इलाके में चल रहे प्रशासनिक भय के वातावरण से लोगों को निकालने के मुद्दे पर विस्तृत चर्चा हुई। मीडिया में आ रही खबरों और अधिकारियों के बयानों से ऊहापोह की स्थिति को देखते हुए अब इस अभियान को और तेज किये जाने का निर्णय लिया गया।

इसी क्रम में मंगलवार से समिति ने अपना अभियान प्रारंभ कर दिया। समिति के सदस्यों ने सरस्वती फाटक से अभियान शुरू किया, नीलकंठ, मणिकर्णिका घाट, चमरोटिया, ललिता घाट आदि इलाकों में जन संपर्क किया। इस दौरान कई निवासियों ने बताया कि मंदिर प्रशासन के लोग उन पर मकान बेचने का दबाव बना रहे हैं और तरह-तरह के प्रलोभन दे रहे हैं। समिति ने सभी को आश्वस्त किया कि उनकी मदद के लिये समिति तैयार है। वे किसी भी दशा में अपना मकान मंदिर प्रशासन को न बेंचे। समिति का यह अभियान आगे भी चलता रहेगा।

जनसंपर्क के बाद एक बैठक मे तय हुआ कि 21 मार्च को पराड़कर स्मृति भवन में विचार गोष्ठी का आयोजन किया जाएगा। इसमें नगर के सामाजिक संगठनों, धर्माचार्य, राजनीतिक दलों, व्यापारिक संगठनों और बार एसोसिएशन के साथ अन्य संगठनों को आमंत्रित किया जाएगा। इसके बाद पूरे शहर की भागीदारी के लिये जल्द ही एक बड़े सत्याग्रह का भी आयोजन प्रस्तावित किया गया।

कार्यक्रम में काशी विश्वनाथ मंदिर के महंत राजेंद्र तिवारी, काशी विशालाक्षी मंदिर के महंत व वरिष्ठ पत्रकार राजनाथ तिवारी, कृष्ण कुमार शर्मा, शरद पांडेय, राजन ठाकर, राजकुमार कपूर, सोनू कपूर, अजय अग्रवाल, लालजी सेठ, रविकांत यादव, सुनील मेहरोत्रा, रविशंकर गिरि, वल्लभाचार्य पांडेय, जागृति राही, महालक्ष्मी शुक्ला, विनय शंकर राय मुन्ना, रंजू सिंह, डॉ इंदू पांडेय, डॉ अनूप श्रमिक, प्रेम सोनकर, हजारी शुक्ला आदि शामिल थे।