raebareli press conference

मंत्री जी के विकास के दावों की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बीच जमीनी हकीकत की पड़ताल

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Rahul Yadav

राहुल यादव

रायबरेली। 4 बरस पहले निराशा के माहौल में अपने प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार की भाषाई कुशलता, व्यापक प्रचार, सटीक नारों से भाजपा पूर्ण बहुमत के साथ केन्द्रीय सत्ता पर आसीन हुई थी। कांग्रेस के गढ़ रायबरेली में भी तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्षा के सामने भाजपा नेतृत्व ने सुप्रीम कोर्ट केे वकील को उतारा था। जिसका रायबरेली से वास्ता भी न था फिर भी एडवोकेट अजय अग्रवाल ने रायबरेली के इतिहास में पहली बार भाजपा को लगभग 2 लाख वोट दिलाए। 2017 विस चुनाव में भी जिले से भाजपा के तीन विधायक चुने गए।

खैर केन्द्र में सत्ता के 4 वर्ष की पूर्णता पर जिले के प्रभारी मंत्री नन्द गोपाल गुप्ता ‘नन्दी’ ने पत्रकार वार्ता की। मंत्री जी ने भाजपा सरकार की तमाम योजनाओं का जिक्र करते हुए गुजरात माडल तक की व्याख्या कर डाली। देश-प्रदेश के विषय में पार्टी की आधारभूत बातें भी सुना डाली लेकिन जब पत्रकारों ने जिले से सम्बन्धित प्रश्न पूछना आरम्भ किया तो मंत्री जी के माथे पर बल पड़ने लगा। प्रभारी मंत्री जी की बॉडी लैंग्वेज ने,  हर प्रश्न पर उनका बार बार डीएम की ओर ताकना, लगभग मामलों में उनके द्वारा अनभिज्ञता प्रकट कर देना यह बताने के लिए काफी था कि जिले के हवाई दौरों के अतिरिक्त उनका जिले की जमीनी हकीकत से कोई खास वास्ता नहीं है।

जिले के आम जनमानस से  सरोकार रखने वाले मुद्दों जैसे- विद्युत, पेयजल, आवास, सड़क, प्रशासनिक भ्रष्टाचार के विषय में जब पत्रकारों ने जानना चाहा तो कार्यवाही की बात कह कर वे टालमटोल करने में ही जुटे रहे व तथ्यात्मक जवाब न दे सके। हालांकि एक साल बीतने के बाद भी मंत्री जी ये कहने से नहीं चूके कि पिछली सरकारों के कारण व्यवस्थाएं अभी तक बिगड़ी हैं।

जिले की एक भारी-भरकम बजट वाली महनीय योजना- अमृत योजना में गड़बड़ी के प्रश्न पर प्रभारी मंत्री ने लगभग संज्ञान में न होने जैसा संकेत देते हुए डीएम से जांच कर कार्यवाही के लिए कहा। अमृत योजना जैसी जिले के विकास की तमाम योजनाओं व दावों के बीच हमने जमीनी पड़ताल की है। रायबरेली के मुख्य डाकघर में पासपोर्ट कार्यालय खुलवाना का श्रेय लूटने की भरपूर कोशिश होती है लेकिन हकीकत यह है कि उद्घाटन के महज एक दिन बाद ही उसकी व्यवस्थाएं धड़ाम हो गयी थी।

जिले की बेसिक शिक्षा, माध्यमिक शिक्षा में बहुत सुधार नहीं आ सका है। सरकार दावा तो सबको सस्ती और सुलभ शिक्षा देने की बात करती है लेकिन ये फुर्र तब हो जाता है जब जिले के सबसे महत्वपूर्ण संस्थान फिरोज गांधी कालेज का प्रवेश फार्म ही ₹ 500 का मिलता है जोकि बड़े-बड़े विश्वविद्यालयों के प्रवेश फार्म से भी मंहगा है।

विद्युत व्यवस्था के सन्दर्भ में 48 घंटे के भीतर ट्रान्सफार्मर बदल कर आपूर्ति बहाली के आदेश हैं, लेकिन जब हम सतांव गांव पहुँचें तो ग्रामीणों ने 2 मई की आंधी में टूटे खम्भे को दिखाया और बताया कि 24 दिन बाद सभी ग्रामीणों ने चन्दा लगाकर नया खम्भा मंगाया है हालांकि 25 दिनों के बाद भी आपूर्ति बहाल नहीं हो सकी है। इस बाबत जेई ने बजट न होने का हवाला दिया है।

स्वास्थ्य क्षेत्र में एम्स की ओपीडी जुलाई में शुरू हो जाने के दावे जरूर हैं लेकिन इसके इतर जिले के अस्पतालों में डाक्टरों व संसाधनों को बढ़ाने के प्रयास शून्य हैं। गंगा घाटों की सफाई केवल कागजों पर ही चल रही है। सड़कों के गड्ढे भरने के दावे जोर-शोर से किए गए लेकिन शहर के सबसे प्रमुख चौराहा डिग्री कालेज से कचहरी रोड का सफर हकीकत बताने के लिए काफी है।

कुल मिलाकर हम निष्कर्षतः यह कह सकते हैं कि प्रेस वार्ता का दौरान आधारभूत भाषण पढ़कर मंत्री जी ने जो माहौल बनाने की कोशिश की थी, जिले की समस्याओं के प्रश्नों ने उसे असफल कर दिया। उत्तर में मिला तो केवल कार्यवाही का आश्वासन व लजाई मुस्कान।