बीएचयू: ईलाज के लिए छह घंटे तड़पती रही महिला, जांच के नाम पर उलझाये रहे डाक्टर

बीएचयू
Another case of BHU doctors' callousness surfaced...
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बीएचयू के डाक्टरों की फिर खुली पोल, बाहर से जांच नहीं करवाया तो सीरियस मरीज को कर दिया रेफर…

Tabish Ahmed
ताबिश अहमद

 

 

 

 

 

 

वाराणसी: बीएचयू के सर सुंदर लाल अस्पताल में जहां एक तरफ मरीजों को बेहतर सुविधाएं मुहैया कराने के लिए नई-नई योजनाएं शुरू की जा रही हैं। सुविधाओं और सहूलियतों के तमाम दावे किए जा रहे हैं, वहीं हकीकत की तस्वीर चौंकाने वाली है।आयुर्वेद संकाय के स्त्री रोग विभाग में इलाज के लिए आई एक महिला बुधवार को लेबर रूम के सामने दर्द से तड़पती रही। ब्लीडिंग से हालत बिगड़ती जा रही थी। घरवाले दवा-इलाज के लिए डॉक्टर से गुहार लगा रहे थे लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।

जांच के नाम पर इतना परेशान कर दिया गया कि महिला की जान पर बन आई। आखिरकार परिवारीजनों को कुछ नहीं सूझा तो उसे लेकर निजी अस्पताल भागे। अस्पताल के आयुर्वेद संकाय के स्त्री रोग विभाग के आपरेशन थिएटर के गेट पर यह वाकया दोपहर करीब तीन बजे का है।

ब्लीडिंग होने से महिला की हालत बिगड़ती जा रही थी। परिवारीजन परेशान थे। महिला की चीख-पुकार सुनकर तमाम इलाज कराने आए मरीजों-तीमारदारों की भीड़ जुट गई लेकिन परिवारीजनों की गुहार के बावजूद महिला को राहत के लिए दवा-इलाज मयस्सर नहीं हो पाया।

परिवारीजनों ने बताया कि वह सुबह आठ बजे से ही आए हैं। एक महिला डॉक्टर का नाम लेकर बताया कि उन्होंने पहले दो-तीन जांच कराने को कहा।

बाहर जांच कराने से मना किया तो डॉक्टर हो गईं नाराज
बीएचयू में ही ये जांच कराने के बाद जब वे रिपोर्ट लेकर डॉक्टर के पास गए तो उन्हें लंका के एक पैथालॉजी का पता बताकर वहां से जांच कराकर आने को कहा गया। इस पर जब उन्होंने आपत्ति जताई तो डॉक्टर नाराज हो गईं।

सुबह आठ बजे से दोपहर दो बजे तक बैठाए रखने के बाद बिना इलाज किए महिला को सरसुंदर लाल अस्पताल की स्त्री रोग विभाग में रेफर कर दिया। वहां जाकर नए सिरे से इलाज के लिए कतार में जुटने की परिवारीजन सोच पाते कि महिला की हालत और बिगड़ती गई।

घबराए परिजन तत्काल इलाज के लिए उसे लेकर निजी अस्पताल भागे। यह महिला शहर के ही माधोपुर क्षेत्र से इलाज के लिए यहां आई थी।

आयुर्वेद संकाय की प्रमुख प्रो. यामिनी भूषण त्रिपाठी ने कहा कि यह बेहद गंभीर मामला है। इससे विश्वविद्यालय की छवि धूमिल होती है। हालांकि किसी भी मरीज या उसके परिजनों की ओर से ऐसी कोई शिकायत नहीं की गई है। यदि शिकायत आती है तो तत्काल प्रभाव से कार्रवाई की जाएगी।

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