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सैकड़ों वर्ष पुरानी प्रथा को बदलना चाहा…बीच में टूटा रथ!

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Shubham Tiwadi

शुभम तिवाड़ी

करौली। श्री महावीर जी, श्री दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र श्री महावीरजी में चल रहे वार्षिक मेले मैं आज विशाल रथ यात्रा निकाली गई। भगवान जिनेंद्र के जयकारों से गुंजायमान अतिशय क्षेत्र भक्तिमय हो गया।

पूरे भारत वर्ष के प्रमुख शहर जयपुर आगरा मेरठ गुवाहाटी लखनऊ दिल्ली सहारनपुर एवं अन्य शहरों से पधारे जैनजेनोत्तेर ने पदयात्रा में हिस्सा लिया। भारी तादाद में भीड़ भगवान महावीर के दर्शन कर रही थी तथा रथ यात्रा का मुख्य आकर्षण इस बार रथ यात्रा में शामिल किया गया नया रथ था।

जिस पर सारथी बने हिंडोन अधिकारी शेर सिंह लोहाडीया मंदिर कमेटी के अध्यक्ष सुधांशु कासलिवाल आगे-आगे ऐरावत हाथी और नाचते गाते श्रद्धालु बाबा महावीर की रथयात्रा को चार चांद लगा रहे थें। चांदनपुर गांव वाले का यह रथ मुख्य मंदिर से कटला परिसर आम बाजार होते हुए गंभीर नदी के तट पर पहुंचने से पहले जब भक्तों की खुशी चरम पर पहुंची तब भगवान महावीर को नया रथ रास नहीं आया।

अचानक रथ क्षतिग्रस्त हो गया और भक्तों मे हडकंप मच गया। भक्तों में मचे हडकंप को देखते कुछ कमेटी के लोगों ने भक्तों को धैर्य धरने को कहा और भक्तों ने धैर्य रखा। मंदिर कमेटी द्धारा सैकड़ों वर्ष पुराने मूल रथ को लाया गया और फिर से बैलों द्धारा यात्रा को पूर्ण किया। वहीं भक्तों में तरह-तरह की चर्चा शुरू हो गई।

भक्तों द्धारा तरह-तरह की बाते बनने लग गई। इसे भगवान महावीर की नाराजगी कहे या भक्तों की आस्था से खिलवाड़, मामला चाहे जो भी हो, महावीर भगवान के आगे कमेंटी फेल हो गई और आखिरकार आधुनिक रथ तोड़ पुराने पर होकर सवार भगवान महावीर गंभीर नदी के तट पर पहुंचें।

जहां पंडित मुकेश शास्त्री ने वैदिक पूजा विधान के अनुसार मंत्रोचार कर भगवान महावीर का जलाभिषेक किया तत्पश्चात भगवान महावीर के रजत कलसो की बोली लगाई गई। वापसी में भगवान जितेंद्र की पदयात्रा गंभीर नदी-नदी से मुख्य बाजार होती हुई मुख्य मंदिर पहुंची।