मैं और सपा के शिवपाल अपनी-अपनी पार्टी के ‘आडवाणी’ हैं: कुमार विश्वास

कुमार विश्वास
Charismatic Poet and AAP Leader opens his heart in poetry...
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‘मेरे लफ्जों पे मरते थे वो अब कहते हैं.. मत बोलो’ से बयां होता है कुमार का राज्यसभा ना भेजे जाने का दर्द

Shabab Khan
शबाब ख़ान (वरिष्ठ पत्रकार)

 

 

 

 

 

इटावा: आम आदमी पार्टी के दिग्गज नेता आज इटावा शहर के एक स्कूल में आयोजित कवि सम्मेलन में भाग लेने के लिए आए थे। पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि उनकी और शिवपाल की अपनी पार्टियों में स्थिति एक जैसी है। जिन लोगों ने पार्टी को खड़ा करने में खून-पसीना एक कर दिया नेतृत्व ने उनको पार्टी से किनारे कर दिया।मशहूर कवि और आम आदमी पार्टी नेता कुमार विश्वास को भी राज्यसभा न भेजे जाने का मलाल है। कविता में भी उनका यह दर्द झलका। कवि सम्मेलन में मौजूद सपा नेता व विधायक शिवपाल सिंह को खिताब करते हुए उन्होंने कि वह और शिवपाल अपनी पार्टी के आडवाणी हो गए हैं।

‘मेरे लफ्जों पे मरते थे वो अब कहते हैं.. मत बोलो’ यह मशहूर लाइने कुमार व‌िश्वास ने इटावा में काव्य पाठ करने के दाैैरान कहीं। अाम अादमी पार्टी के नेता कुमार व‌िश्वास इटावा में श‌िवपाल स‌िंह के जन्म द‌िन पर अायाेज‌ित एक क‌व‌ि सम्मेलन में भाग लेने के ल‌िए पहुंचे थे।

उन्होंने यह कविता “पुरानी दोस्ती को इस नई ताकत से मत तौलो, ये संबंधों की तुरपाई है षडयंत्रों से मत खोलो, मेरे लहजे की छैनी से गढ़े कुछ देवता जो कल मेरे लफ्जों पे मरते थे, वो अब कहते हैं मत बोलो,” पेश की। उन्होंने अपनी मशहूर कविता कोई दीवाना कहता है भी सुनाई। ​कुमार विश्वास ने बताया कि 2004 में कवि सम्मेलन में आया था तो उस समय मुख्यमंत्री मुलायम सिंह थे।

​उस दौरान कविता में मंत्री का विरोध किया तो उन्होंने सुरक्षा के साथ भेजा था। उन्होंने कहा कि हिंदी के लिए जो काम सपा परिवार ने किया वैसा किसी ने नहीं किया। उन्होंने अपनी पार्टी के 20 विधायकों की सदस्यता रद् करने के फैसले पर भी अफसोस जताया। हालांकि राष्ट्रपति के फैसले पर टिप्पणी नहीं की।

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