जनमंच विशेष: कुशीनगर हादसे का जिम्मेदार कौन? बुलेट ट्रेन की तैयारी कर रहे देश के हर रेलवे क्रॉसिंग पर फाटक क्यो नही?

कुशीनगर
Kushinagar Tragedy: whose fault is that? Railways or School?
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90 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से पैसेंजर ट्रेन नें उड़ाया था स्कूल वैन को…

Shabab Khan
शबाब ख़ान (वरिष्ठ पत्रकार)

 

 

 

 

 

 
जनमंच विशेष

कुशीनगर: कल दुदही बाजार के पास मानव रहित क्रासिंग पर जिस वक्त स्कूली वैन सीवान-गोरखपुर पैसेंजर ट्रेन से टकराई थी, उस समय उसकी गति 90 किलोमीटर प्रति घंटा थी।

इससे पहले पैसेंजर ट्रेन की गति 40-60 किलो मीटर प्रति घंटे ही रहती थी, लेकिन रेल लाइन दोहरीकरण के बाद गति सीमा बढ़ाकर 60 से 100 किलोमीटर प्रति घंटा कर दी गई थी।

पैसेंजर ट्रेन न० 55075 बृहस्पतिवार को सीवान रेलवे स्टेशन से चली थी। कुशीनगर के दुदही बाजार के पास बहपुरवा मानव रहित क्रासिंग के पास ट्रेन पहुंची तो स्कूली वैन ट्रेन से टकराई और 13 बच्चों की मौत हो गई।

ट्रेन की स्पीड ज्यादा होने के कारण उसे दुदही रेलवे स्टेशन पर रोका गया। ट्रेन के गार्ड दिलीप यादव को दुदही रेलवे स्टेशन पर पहुंचने के बाद इस बड़ी दुर्घना की जानकारी मिल सकी। हालांकि गार्ड ने कहा कि स्कूली वैन के ट्रेन से टकराने के बाद झटका लगा था।

पीछे मुड़कर देखा तो एक स्कूली वैन भी पलटी थी। धुआं उठ रहा था लेकिन उसमें विद्यार्थियों के होने की जानकारी नहीं थी। गार्ड के मुताबिक रेल लाइन दोहरीकरण की वजह से ट्रेन की स्पीड करीब 90 किलो मीटर प्रतिघंटा थी। इसी दौरान स्कूली वैन ट्रैक पर आ गई होगी।

सोचने वाली बात यह है कि जहां हम भारत में बुलेट ट्रेन चलाने की बात करते हैं वहीं हमारे पास रेलवे क्रॉसिंग पर फाटक तक नही है। देश में अभी भी ऐसी हजारो की संख्या में रेलवे क्रॉसिंग है जो पूरी तरह से असुरक्षित है, जहां कभी भी कोई गाड़ी तेज रफ्तार ट्रेन के चपेट में आ सकती है। हालांकि रेलवे नें इन लेवल क्रॉसिंग पर फाटक मित्रों को तैनात तो कर दिया है लेकिन उन्हे ऐसी कोई भी सुविधाएं मुहैया नही करायी गईं हैं जिससे वह जान सके कि वहां से ट्रेन कब गुजरने वाली है। जब फाटक पर तैनात व्यक्ति को ही नही पता होगा कि गाड़ी कब गुजरने वाली है तो वो कैसे और कब पटरी से गुजरी सड़क से आने-जाने वाले वाहनों को रोकेगा यह हमारी समझ से परे।

कुशीनगर स्कूल वैन हादसे का दोषी स्कूल या ड्राइवर बाद में है रेलवे प्रशासन पहले है, रेलवे के पास फंड की कमी नही है कि वह देश के हर रेलवे क्रॉसिंग पर फाटक की व्यावस्था न कर सके। यदि नही हो सकता तो लेवल क्रॉसिंग वाली सड़क को ही ध्वस्त कर देना चाहिए, कम से कम मासूमों से भरी कोई वैन, कोई बस जब तब तेज रफ्तार ट्रेन की चपेट में आकर कुशीनगर जैसी त्रासदी तो नही दोहरा पाएगी।

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