सिजेरियन डिलीवरी का बढ़ता क्रेज  

Cesarean-Delivery
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Khushboo
खुशबू
लाइफ डेस्क। प्रेगनेंसी एक ऐसा शब्द है जो हर शादीशुदा महिला के लिए खास होता हैं। शादी के बाद हर महिला के लिए इस एक शब्द बहुत मायने हैं। कहते हैं माँ बनने का सुख महिलाओं के जिंदगी मे ख़ुशी का पल लाता है। प्रेगनेंसी  के दौरान महिलाओं के मन मे बहुत सारे सवाल आते हैं जो की पूरी तरह से लाजमी भी हैं।

इन सब मे अगर कुछ सबसे जयादा खास है तो वो ये हैं की बच्चा नार्मल होगा या सेजीरियन। पूरे नौ महीने तक गर्भवती महिला के घर में इसी पर चर्चा होती है। घर की उम्रदराज़ महिलाओं की पहली सलाह एवं कोशिश यही रहते है की कैसे नॉर्मल डिलीवरी हो जाये। लेकिन आजकल नॉर्मल से ज्‍यादा सीजेरियन डिलीवरी की संख्‍या में इजाफा होता जा रहा है।

mother love with his child
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मुख्य वजह…आजकल देखा गया है की महिलाएं प्रेगनेंट होते ही फीजिकल वर्क करना छोड़ देती हैं और तो आराम करना उन्हें जायदा सही लगता हैं। वहीं कामकाजी महिलाओं की बात करें तो ज्‍यादात्‍तर घंटो लगातार बैठकर काम करते रहने से फीजिकल मूवमेंट रुक जाता हैं।

मूवमेंट न होने के वजह से उनके वजन भी बढ़ जाते हैं। प्रेग्नेंसी के दौरान एक्‍सरसाइज में कमी होने की वजह से भी वजन बढ़ जाता है सीजेरियन डिलीवरी की एक खास वजह महिलाओं की उम्र भी है। इन सभी के कारण उनकी बॉडी में फ्लैक्सिबिलिटी भी कम हो जाती है। महिलाएं के कम फिजिकल वर्क के वजह से भी बेबी ठीक रुप से डवलप नहीं हो पाता है जिस वजह से बच्‍चें की डिलीवरी आसानी से नहीं हो पाने के कारण भी सीजेरियन का सहारा लेना पड़ता है।

Mother feed
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अन्य कारण…वहीं कुछ महिलाएं तो लेबर पेन सहन नहीं करना चाहती हैं इसलिए वो सी-सेक्‍शन का सहारा लेती है। महिलाओं की माने तो उनके अंदर एक दर बना रहता है, नार्मल डिलीवरी के वक़त कही उन्हें जायदा परेशानियों का सामना ना करना पड़े। वहीं कुछ को एक खास डेट और डे पर ही बच्चा चाहिए होता है। इन कारणों से भी सीजेरियन डिलीवरी की तादात बढ़ती जा रही है।

गर्भाधारण से जुड़ी जानकारियां…

विशेषज्ञों की मानें तो उम्र के साथ महिलाओं में गर्भाधारण को लेकर परेशानियां भी बढ़ती जाती हैं। यहाँ तक की डॉक्टर्स का कहना है, पहला बच्चा जल्दी प्लान करना अच्छा होता हैं। आजकल के भागदौड़ की जिंदगी, खानपान की लापरवाही के वजह से बढ़ती उम्र में प्रेग्नेंसी प्लान करने में काफी दिकक्तों का सामना करना पढ़ रहा हैं।

Mother diet
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मोटाप व अन्य बीमारियां….

नॉर्मल डिलीवरी न होने की एक अन्य वजह गर्भवती महिला के मोटापे का शिकार होना भी है। गर्भावस्था के दौरान या उससे पहले युवती का अधिक मोटा होना बच्चों के जन्म के समय परेशानी का कारण बन सकती हैं। यही वजह है कि प्रेग्नेंसी प्लान करने के पहले और प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं को मोटापे पर नियंत्रण रखने की सलाह दी जाती है।

इसके अलावा यदि मां को मधुमेह, थॉयराइड या फिर उच्च रक्तचाप हो तो भी नॉर्मल डिलीवरी में परेशानियां आती ही हैं। गर्भाधारण करने से पहले रोग मुक्त होना बहुत ही जरुरी हैं। गर्भाधारण से लेकर डिलीवरी तक बीच-बीच में गर्भवती महिला को डॉक्टर की निगरानी में अल्ट्रासाउंड करवाते रहना चाहिए। इससे पहली बार मां बनने जा रही महिलाएं प्री-मैच्योर डिलीवरी और प्रेगनेंसी के दौरान एबनार्मल ब्लीडिंग आदि की समस्याओं से काफी हद तक मुक्त रह सकती हैं।

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महत्वपूर्ण बातें….

अक्सर महिलाएं अपने स्वास्थ्य के प्रति लापरवाह रहती हैं। शादी के बाद में फिट रहना उनके लिए और जरूरी हो जाता है। इसके लिए जरूरी है कि वे – नियमित रूप से व्यायाम अवश्य करें। तनावमुक्त रहने की कोशिश करें। जहां तक हो सके, जंक फूड का सेवन न करें, शराब या सिगरेट से बचें, नियमित रूप से योग, ध्यान आदि करें।

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