इस तस्वीर को ध्यान से देख लीजिए… आपको बहुत सारी बातें समझ आ जाएंगी

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सोनू यादव “महेंद्र”
सोनू यादव “महेंद्र” की दिल की कलम से  ✍✍✍

ब्लॉग। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव मुस्कुराते हुए नज़र आ रहें हैं। अखिलेश यादव के बगल में कन्नौज से सपा सांसद डिम्पल यादव दिख रही हैं, उनके चेहरे पर भी मुस्कान साफ दिखाई पड़ रही है। इस कार्यक्रम की अन्य तस्वीरों पर दृष्टिपात करने पर आपको चौधरी अंकल की कुटिल मुस्कान भी दिख जाएगी।

हालांकि, चौधरी अंकल के बार-बार मना करने के बावजूद कैमरामैन जबरजस्ती अंकिल का फोटो अखिलेश के साथ जोड़ देते हैं। आपको बता दें कि यह वही चौधरी अंकल हैं जो अखिलेश यादव और पार्टी के अनुशासन को हमेशा से किनारे पर रखते रहे हैं। इसमें गलती उनकी भी नही है। अन्य सभी लोगों पर गुरुत्वाकर्षण का प्रभाव ऊर्ध्वाधर होता है, लेकिन इन महोदय पर चिपक्वाधर पड़ता है।

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खैर हम बात कर रहे थे सांसद डिम्पल यादव की, जो सांसद कम भाभी के नाम से ज्यादा पापुलर हैं। हालांकि समाजवादी पार्टी में भईया-भाभी, चाचा-चाची, भतीजा-भतीजी के जयकारे ही सुनाई पड़ते हैं, ज़ाहिर सी बात है अगर नेता को नेता न मानकर आप रिश्तेदारी जोड़ेंगे तब समझिए आपसे बड़ा अंधभक्त दूसरा कोई नही है।

आपको सनद होगा 2017 विधानसभा चुनाव के दौरान डिम्पल जी को इलाहाबाद कैंपेनिंग में अपने ही कार्यकर्ताओं से डर लगने लगा था। अपने ही कार्यकर्ताओं से लगे इस ‘डर’ को जब मीडिया और भाजपा ने नमक मिर्च लगाकर मुद्दा बना दिया। तब जाकर ‘डर’ कम हुआ।

देश से लेकर प्रदेश तक में जब महिलाओं पर जघन्य अपराध होते हैं। मासूम बच्चियों का बलात्कार होता है, उनका अपहरण होता है, उन्हें मौत के घाट उतार दिया जाता है। महिलाओं को जिंदा जलाया जाता है, तब श्रीमती जी को रत्ती भर भी डर नही लगता है।

आखिर इसकी क्या वजह हो सकती है…? आपने सासंद पदासीन श्रीमती जी को नारी सशक्तिकरण पर कभी बोलते देखा है…? महिलाओं के साथ हो रही जघन्य घटनाओं पर रोष व्यक्त करते सुना है…? महिलाओं की समस्याओं पर आवज़ उठाते देखा है…? संसद में मासूम बच्चियों/महिलाओं के साथ घटित दुर्दिन घटनाओं पर मुखरता से गरजते हुए सुना है…?

आखिर सांसद होने के बाद भी आपके मुंह से महिला अधिकारों/हितों पर आवज़ क्यों नही निकलती है…? आपको कौन सी रिश्तेदारी टूटने का डर रहता है…? अगर ऐसे ही लोग संसद में महिलाओं का नेतृत्व करेंगे तो महिलाओं की समस्याएं खाक समाप्त होंगी।

इसके अलावा जहां तक एसिड अटैक पीड़िताओं की जीविका का साधन बने Sheroes Cafe को महंत जी द्वारा बंद करने की बात है। इसका एक कारण यह भी हैं कि पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कैफ़े की बागडोर अपने चहेते आलोक दीक्षित के हांथों में सौंपी थी।

वंही वर्तमान सीएम योगी आदित्यनाथ कैफ़े की कमान लोटस इंटरनैशनल के मालिक अशोक पाठक को देने की ठान चुके थे। इस अदला-बदली में सरकार की किरकिरी होते देख कैफ़े बन्द करने का फरमान आ गया।

यह लेखक के अपने विचार है….

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